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गरियाबंद में कहीं मौत का इंजेक्शन न बन जाए इलाज ? : बिना डिग्री मेडिकल स्टोर की आड़ में क्लिनिक, सरकारी सिस्टम भी मददगार, देखिए ये VIDEO

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के अमलीपदर थाना क्षेत्र के सरनाबहाल गांव में मेडिकल स्टोर की आड़ में मरीजों के इलाज का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में एक व्यक्ति मेडिकल स्टोर के पीछे बने कमरे में मरीज को इंजेक्शन लगाता दिखाई दे रहा है। वीडियो में मेडिकल स्टोर का नाम ‘धनेश्वर मेडिकल’ नजर आ रहा है। हालांकि, वीडियो की सत्यता और उसमें दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है।

गांव में लोगों का कहना है कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति धोबलेश्वर यादव है। लोगों के मुताबिक, उसके पास न तो फार्मेसी की डिग्री है और न ही नर्सिंग से संबंधित वैध दस्तावेज। वीडियो सामने आने के बाद मेडिकल स्टोर की आड़ में बिना जरूरी योग्यता के मरीजों का इलाज किए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

मेडिकल से दवा निकाली, पीछे कमरे में जाकर लगाया इंजेक्शन

वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि एक व्यक्ति मेडिकल स्टोर के अंदर मोबाइल पर बात कर रहा है। इसी दौरान वह मरीज के लिए दवा निकालता है। इसके बाद मोबाइल पर बात करते हुए ही एक इंजेक्शन लेकर मेडिकल स्टोर के पीछे बने कमरे में जाता है। कमरे में पहुंचकर वह मरीज को इंजेक्शन लगाता दिखाई देता है।

वीडियो सामने आने के बाद यह सवाल उठ रहा है कि मेडिकल स्टोर पर दवा बेचने वाले व्यक्ति को मरीजों का इलाज करने और इंजेक्शन लगाने की अनुमति है या नहीं। मामले में यह भी जांच का विषय है कि संबंधित व्यक्ति के पास मरीजों के उपचार से जुड़ी कोई वैध योग्यता या दस्तावेज हैं या नहीं।

ड्रग इंस्पेक्टर बोले- मेडिकल स्टोर की पूरी जांच होगी

ड्रग इंस्पेक्टर धर्मवीर ध्रुबे ने बताया कि उन्हें वीडियो की जानकारी मिली है। मामले की जांच की जाएगी। टीम वीडियो में दिखाई दे रहे मेडिकल स्टोर पर जाकर उसका पूरा निरीक्षण करेगी।

उन्होंने कहा कि वीडियो में संबंधित व्यक्ति मरीज का इलाज करता हुआ भी दिखाई दे रहा है। ऐसे में मामला नर्सिंग एक्ट से भी जुड़ा हो सकता है। इसके लिए सीएमएचओ को जानकारी दी जाएगी और संयुक्त जांच कमेटी बनाकर मामले की जांच कराई जाएगी। जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

जिले में करीब 300 मेडिकल स्टोर, वनांचल में ज्यादा शिकायतों का दावा

गरियाबंद जिले में करीब 300 मेडिकल स्टोर हैं। इनमें लगभग 60 मेडिकल स्टोर देवभोग और मैनपुर क्षेत्र में बताए गए हैं। ग्रामीण और वनांचल क्षेत्रों में मेडिकल स्टोर की आड़ में मरीजों का इलाज किए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं।

स्थानीय स्तर पर आरोप हैं कि कई जगह मेडिकल स्टोर सिर्फ दवा बेचने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उन्हें इलाज के केंद्र की तरह संचालित किया जा रहा है। कुछ मेडिकल स्टोर में फार्मासिस्ट की जरूरी योग्यता और दस्तावेज कागजों पर पूरे बताए जाते हैं, लेकिन दवा बेचने और मरीजों का इलाज करने वाला व्यक्ति खुद योग्य नहीं होता।

आरोप यह भी हैं कि ड्रग विभाग की जांच शहरी क्षेत्र के मेडिकल स्टोर तक ज्यादा सीमित रहती है। ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में संचालित मेडिकल स्टोर संचालक अधिकारियों से संपर्क कर निरीक्षण से बचने की कोशिश करते हैं। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की हालत खराब, डॉक्टरों के पद भी खाली

दरअसल, जिस अमलीपदर इलाके में यह तस्वीर सामने आई है, वहां सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही चरमराई हुई है। 4 साल से ज्यादा समय से अमलीपदर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घोषित किया जा चुका है, लेकिन भवन होने के बावजूद यहां डॉक्टर नहीं हैं।

इसके अधीन संचालित 2 उपस्वास्थ्य केंद्र और 34 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में 40 से ज्यादा हेल्थ वर्करों के पद रिक्त पड़े हैं। ऐसे में करीब 70 गांवों और लगभग 1 लाख की आबादी के सामने सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं की उपलब्धता बड़ी चुनौती बनी हुई है।

अमलीपदर क्षेत्र में 2 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 34 उपस्वास्थ्य केंद्र संचालित हैं। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े अमले की कमी और दूरदराज के वन क्षेत्र में होने के कारण नियमित निगरानी भी चुनौती बनी हुई है।

कागजी निरीक्षण के आरोप, झोलाछापों को बढ़ावा

वन और दूरदराज के क्षेत्र में होने के कारण आरोप लगते रहे हैं कि अधिकारियों का निरीक्षण कई बार मौके पर पहुंचने के बजाय मुख्यालय से कागजी कार्रवाई तक सीमित रह जाता है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में बिना पर्याप्त योग्यता के इलाज करने वालों को बढ़ावा मिलने की बात कही जा रही है।

इलाके में सरकारी स्वास्थ्य सुविधाओं की कमी के कारण झोलाछापों का प्रभाव भी बढ़ा है। डॉक्टरों और हेल्थ वर्करों के पद खाली होने से ग्रामीणों को इलाज के लिए निजी स्तर पर उपलब्ध लोगों पर निर्भर होना पड़ता है। इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोग मेडिकल स्टोर या अन्य जगहों से इलाज करने की कोशिश करते हैं।

अमलीपदर में वायरल वीडियो ने इसी पूरी व्यवस्था पर सवाल खड़े किए हैं। अब ड्रग विभाग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त जांच के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि वीडियो में दिखाई दे रहा व्यक्ति कौन है, उसके पास इलाज से जुड़ी क्या योग्यता है और मेडिकल स्टोर की आड़ में मरीजों का उपचार किस स्तर पर किया जा रहा था।

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