सड़क नहीं तो वोट नहीं के नारों से गूंजा पुष्पराजगढ़ : मौहारी-जरही-परसेल के ग्रामीणों का हल्लाबोल, 7 दिन में रोड नहीं तो आंदोलन; सांसद-विधायक के खोखले विकास की खुली पोल
MP CG Times / Tue, Aug 25, 2026
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले के पुष्पराजगढ़ में सड़क की मांग को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों का गुस्सा खुलकर सामने आया। मौहारी पंचायत और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों से करीब 250 से 300 लोग एकजुट होकर जनसुनवाई में पहुंचे। ग्रामीणों ने सड़क की बदहाल स्थिति और लंबे समय से चली आ रही मांग को लेकर प्रशासन के सामने अपनी बात रखी।
जनसुनवाई के दौरान ग्रामीणों ने ‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ और ‘हम अपना अधिकार मांगते हैं, किसी से भीख नहीं मांगते’ जैसे नारे लगाए। प्रदर्शन के बाद ग्रामीणों ने राज्यपाल के नाम SDM को ज्ञापन सौंपा। इसमें सड़क की समस्या का समाधान कराने और निर्माण कार्य को लेकर ठोस कार्रवाई की मांग की गई है।
ग्रामीणों ने प्रशासन को 7 दिन का अल्टीमेटम भी दिया है। उनका कहना है कि अगर तय समय में सड़क की समस्या को लेकर ठोस पहल नहीं हुई तो वे आगे आंदोलन की रणनीति बनाएंगे।

मौहारी पंचायत की सड़क को लेकर पहले भी हुई थी बातचीत
ग्रामीणों के मुताबिक, मौहारी पंचायत की सड़क को लेकर पहले भी संबंधित स्तर पर बातचीत हो चुकी है। सड़क की समस्या कोई नई नहीं है और इसे लेकर ग्रामीण लंबे समय से अपनी मांग अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के सामने रखते रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क उनके लिए सबसे जरूरी बुनियादी सुविधाओं में से एक है। गांव और आसपास के क्षेत्रों को मुख्य मार्गों से जोड़ने वाली सड़क की स्थिति ठीक नहीं होने से रोजाना आने-जाने वाले लोगों को परेशानी होती है।
इसी समस्या को लेकर मंगलवार को ग्रामीणों ने एकजुट होकर जनसुनवाई में पहुंचने का फैसला किया। इस बार ग्रामीणों की संख्या भी काफी अधिक रही। करीब 250 से 300 लोगों के पहुंचने से सड़क का मुद्दा प्रशासन के सामने सामूहिक रूप से रखा गया।

जनसुनवाई में बड़ी संख्या में पहुंचे ग्रामीण
मंगलवार को पुष्पराजगढ़ में आयोजित जनसुनवाई के दौरान ग्रामीण समूह में पहुंचे। उनके हाथों में अपनी मांगों से संबंधित ज्ञापन था। ग्रामीणों ने अधिकारियों के सामने सड़क निर्माण की मांग रखी और कहा कि समस्या का स्थायी समाधान किया जाए।
ग्रामीणों ने इस दौरान नारेबाजी भी की। ‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ का नारा लगाकर उन्होंने प्रशासन और राजनीतिक प्रतिनिधियों तक अपना संदेश पहुंचाने की कोशिश की।
वहीं ‘हम अपना अधिकार मांगते हैं, किसी से भीख नहीं मांगते’ के नारे के जरिए ग्रामीणों ने कहा कि सड़क जैसी मूलभूत सुविधा मांगना उनका अधिकार है। उनका कहना है कि वे किसी तरह की विशेष सुविधा नहीं मांग रहे, बल्कि अपने क्षेत्र में जरूरी सड़क व्यवस्था चाहते हैं।
सड़क की समस्या से रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की समस्या का असर केवल आवागमन तक सीमित नहीं है। खराब सड़क के कारण लोगों को रोजमर्रा के कामों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ती है।
स्कूल जाने वाले बच्चों, कामकाज के लिए बाहर जाने वाले ग्रामीणों और बाजार तक पहुंचने वाले लोगों को सड़क की स्थिति के कारण दिक्कत होती है। बारिश के मौसम में परेशानी और बढ़ जाती है। सड़क पर पानी और कीचड़ होने से आवागमन मुश्किल हो जाता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बेहतर होने से गांव के लोगों को स्कूल, अस्पताल, बाजार और अन्य जरूरी सेवाओं तक पहुंचने में सुविधा होगी। इसलिए सड़क को केवल निर्माण कार्य के रूप में नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास से जोड़कर देखा जाना चाहिए।

मरीजों को अस्पताल ले जाने में भी परेशानी का मुद्दा
ग्रामीणों ने सड़क की समस्या को स्वास्थ्य सुविधाओं से भी जोड़कर देखा है। उनका कहना है कि किसी व्यक्ति के बीमार पड़ने या आपात स्थिति आने पर मरीज को अस्पताल तक पहुंचाना जरूरी होता है।
अगर रास्ता खराब हो तो वाहन से मरीज को ले जाने में समय और परेशानी दोनों बढ़ सकते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क की बेहतर व्यवस्था होने से आपात स्थिति में अस्पताल तक पहुंचना आसान होगा।
उनका सवाल है कि जब सड़क का इस्तेमाल रोजाना गांव के बच्चे, बुजुर्ग, किसान, महिलाएं और अन्य लोग करते हैं तो इसकी स्थिति सुधारने में देरी क्यों हो रही है।

बारिश में बढ़ जाती है परेशानी
ग्रामीणों के मुताबिक, बारिश के दौरान सड़क की समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है। पानी और कीचड़ के कारण सड़क पर चलना मुश्किल हो जाता है। दोपहिया वाहनों के लिए फिसलने का खतरा रहता है, जबकि चार पहिया वाहनों से आवागमन में भी परेशानी होती है।
ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य दिनों में लोग किसी तरह रास्ता पार कर लेते हैं, लेकिन बारिश के दौरान यही रास्ता कई बार बड़ी चुनौती बन जाता है।
इसी वजह से ग्रामीण चाहते हैं कि सड़क की समस्या का अस्थायी समाधान नहीं, बल्कि स्थायी निर्माण कराया जाए।

किसानों के लिए भी सड़क जरूरी
मौहारी पंचायत और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग खेती से जुड़े हैं। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क खराब होने का असर कृषि कार्य पर भी पड़ता है।
खेती के लिए जरूरी सामान गांव तक लाने और कृषि उपज को बाजार तक पहुंचाने के लिए वाहनों की जरूरत होती है। खराब सड़क के कारण वाहन चलाने में परेशानी होती है और समय भी ज्यादा लगता है।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क बेहतर होने से केवल लोगों का आवागमन आसान नहीं होगा, बल्कि किसानों को अपनी उपज और कृषि सामग्री के परिवहन में भी सुविधा मिलेगी।

‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ क्यों लगाया नारा?
ग्रामीणों ने प्रदर्शन के दौरान ‘सड़क नहीं तो वोट नहीं’ का नारा लगाकर अपना रुख स्पष्ट किया। उनका कहना है कि चुनाव के समय जनता से वोट मांगे जाते हैं, लेकिन चुनाव के बाद क्षेत्र की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होने से लोगों में नाराजगी बढ़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि वे किसी राजनीतिक दल के खिलाफ केवल नारेबाजी नहीं कर रहे, बल्कि सड़क की समस्या का समाधान चाहते हैं। उनका कहना है कि अगर सड़क को लेकर ठोस काम होता है तो उन्हें आंदोलन या चुनाव बहिष्कार जैसी स्थिति की ओर जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
हालांकि, अभी ग्रामीणों ने केवल 7 दिन का अल्टीमेटम दिया है और आगे की रणनीति प्रशासन की कार्रवाई के आधार पर तय करने की बात कही है।

राज्यपाल के नाम SDM को सौंपा ज्ञापन
ग्रामीणों ने जनसुनवाई के दौरान अपनी मांगों को लेकर राज्यपाल के नाम ज्ञापन SDM को सौंपा। ज्ञापन में सड़क निर्माण से जुड़ी समस्या को प्रमुखता से रखा गया है।
ग्रामीणों की मांग है कि उनकी समस्या पर प्रशासन गंभीरता से विचार करे और सड़क को लेकर आगे की कार्रवाई की जानकारी दी जाए। वे चाहते हैं कि सड़क निर्माण को लेकर केवल आश्वासन न मिले, बल्कि जमीन पर काम शुरू हो।
ज्ञापन सौंपने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन को 7 दिन का समय दिया है।
7 दिन में कार्रवाई नहीं हुई तो आगे क्या?
ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा है कि 7 दिन का अल्टीमेटम दिया गया है। इस अवधि में अगर सड़क की समस्या को लेकर ठोस पहल नहीं होती है तो वे आगे आंदोलन की रणनीति पर फैसला करेंगे।
ग्रामीणों का कहना है कि अगला कदम क्या होगा, यह प्रशासन के जवाब और कार्रवाई पर निर्भर करेगा। फिलहाल उनकी प्राथमिकता यह है कि प्रशासन सड़क की समस्या को गंभीरता से ले और जल्द समाधान की दिशा में काम शुरू करे।
ग्रामीणों ने यह भी संकेत दिया है कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। यानी जनसुनवाई में दिया गया ज्ञापन फिलहाल इस मुद्दे पर पहला बड़ा सामूहिक कदम है।
पुरानी मांग फिर बनी बड़ा मुद्दा
मौहारी पंचायत की सड़क को लेकर ग्रामीण पहले भी अपनी समस्या सामने रख चुके हैं। अब जनसुनवाई में बड़ी संख्या में लोगों के पहुंचने से यह मुद्दा फिर चर्चा में आ गया है।
ग्रामीणों का कहना है कि पहले भी सड़क को लेकर बातचीत हुई है, लेकिन अब वे समयबद्ध समाधान चाहते हैं। उनका कहना है कि बार-बार आवेदन और आश्वासन से समस्या दूर नहीं होगी। सड़क का काम कब और कैसे होगा, इसकी स्पष्ट जानकारी चाहिए।
ग्रामीणों का सवाल- सड़क के लिए और कितना इंतजार?
ग्रामीणों का सबसे बड़ा सवाल यही है कि सड़क की समस्या के समाधान के लिए उन्हें और कितना इंतजार करना पड़ेगा। उनका कहना है कि सड़क कोई ऐसी सुविधा नहीं है, जिसकी मांग सिर्फ किसी खास वर्ग या कुछ लोगों के लिए हो। इसका इस्तेमाल पूरे क्षेत्र के लोग करते हैं।
स्कूल जाने वाले बच्चों से लेकर किसान, मरीज और रोजाना काम के लिए बाहर जाने वाले ग्रामीण तक सड़क पर निर्भर हैं। इसलिए सड़क का निर्माण पूरे इलाके के लिए जरूरी है।
ग्रामीणों का कहना है कि ‘हम अपना अधिकार मांगते हैं, किसी से भीख नहीं मांगते’ का उनका नारा इसी भावना को दर्शाता है। वे चाहते हैं कि उनकी समस्या को प्राथमिकता के साथ लिया जाए।
अब प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी नजर
फिलहाल जनसुनवाई में ज्ञापन सौंपे जाने और 7 दिन का अल्टीमेटम दिए जाने के बाद अब ग्रामीणों की नजर प्रशासन की अगली कार्रवाई पर है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि सड़क की मांग पर प्रशासन की ओर से क्या कदम उठाया जाता है।
ग्रामीणों ने अपनी बात प्रशासन तक पहुंचा दी है। बड़ी संख्या में लोगों का एक साथ जनसुनवाई में पहुंचना, नारेबाजी करना और राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपना बताता है कि सड़क का मुद्दा अब केवल व्यक्तिगत शिकायत नहीं रह गया है।
अब ग्रामीण चाहते हैं कि उनकी मांग पर समयबद्ध और जमीन पर दिखाई देने वाली कार्रवाई हो। 7 दिन का अल्टीमेटम पूरा होने तक अगर कोई ठोस पहल होती है तो आंदोलन की स्थिति टल सकती है। लेकिन अगर ग्रामीणों के मुताबिक समस्या जस की तस रहती है, तो वे आगे क्या कदम उठाते हैं, इस पर पूरे पुष्पराजगढ़ की नजर रहेगी।
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