Logo
Breaking News Exclusive
महिला बोली- दवाई लेने आए थे, गड़ासा-रिवॉल्वर दिखाकर डराया; बच्चे के सामने हाथ-पैर बांधे स्कूल शिक्षा मंत्री बोले-छात्र नहीं थे, इसलिए बंद कीं; बच्चे मिलेंगे तो दोबारा शुरू करेंगे जेठानी ने देवरानी को चाकू मारे; लाश टंकी में डाली, भाई पर किया था कमेंट डबल मर्डर से पहले भाई को फोन कर बोला- घर आ जाओ; लहूलुहान पड़ी थीं लाशें किडनैप कर जंगल में पीटा; कटा पंजा पॉलीथीन में भरकर अस्पताल पहुंचा पीड़ित अस्पताल के बाहर 8 साल की बच्ची रो पड़ी, बोली- मां अब तो उठ जाओ झाड़-फूंक और लापरवाही भी दिखी, बीमार 'कोबरा' का डॉक्टरों ने इलाज कर बचाई जान मवेशियों को लेकर घर लौट रहा था, पीछे से आई काल बनी गाड़ी, फरार ड्राइवर की तलाश जारी टेबल पर शराब की बोतल रख क्लासरूम में सोए मिले मास्टर जी, मध्याह्न भोजन में भी धांधली, BEO ने थमाया शो-कॉज नोटिस 68 लाख की PM सड़क 1 साल में ही उखड़ी, अफसरों ने झाड़ा पल्ला तो भड़के 7 गांवों के लोग महिला बोली- दवाई लेने आए थे, गड़ासा-रिवॉल्वर दिखाकर डराया; बच्चे के सामने हाथ-पैर बांधे स्कूल शिक्षा मंत्री बोले-छात्र नहीं थे, इसलिए बंद कीं; बच्चे मिलेंगे तो दोबारा शुरू करेंगे जेठानी ने देवरानी को चाकू मारे; लाश टंकी में डाली, भाई पर किया था कमेंट डबल मर्डर से पहले भाई को फोन कर बोला- घर आ जाओ; लहूलुहान पड़ी थीं लाशें किडनैप कर जंगल में पीटा; कटा पंजा पॉलीथीन में भरकर अस्पताल पहुंचा पीड़ित अस्पताल के बाहर 8 साल की बच्ची रो पड़ी, बोली- मां अब तो उठ जाओ झाड़-फूंक और लापरवाही भी दिखी, बीमार 'कोबरा' का डॉक्टरों ने इलाज कर बचाई जान मवेशियों को लेकर घर लौट रहा था, पीछे से आई काल बनी गाड़ी, फरार ड्राइवर की तलाश जारी टेबल पर शराब की बोतल रख क्लासरूम में सोए मिले मास्टर जी, मध्याह्न भोजन में भी धांधली, BEO ने थमाया शो-कॉज नोटिस 68 लाख की PM सड़क 1 साल में ही उखड़ी, अफसरों ने झाड़ा पल्ला तो भड़के 7 गांवों के लोग

पैसे नहीं थे, 2 घंटे पत्नी की लाश लिए बैठा रहा : अस्पताल के बाहर 8 साल की बच्ची रो पड़ी, बोली- मां अब तो उठ जाओ

झांसी मेडिकल कॉलेज के बाहर शुक्रवार सुबह पत्नी की लाश लेकर बैठा युवक बेबस दिखा। उसके पास इतने पैसे भी नहीं थे कि पत्नी का शव घर तक ले जा सके। युवक एक ओर स्ट्रेचर पर पड़ी पत्नी और दूसरी ओर 8 साल की बेटी को देख खुद को कोस रहा था। बेटी बार-बार कह रही थी…मां बस एक बार उठ जाओ न।

युवक ने लोगों से कहा- इमरजेंसी के डॉक्टर ने भी मदद नहीं की। उन्होंने कहा कि किराए की एंबुलेंस करो और पत्नी की लाश ले जाओ। करीब दो घंटे बाद एक सिपाही की नजर पड़ी तो उसने पूरा मामला समझा। फिर एक संस्था को जानकारी दी। संस्था के कोषाध्यक्ष ने 16 किमी दूर घर तक फ्री में शव भिजवाया।

पति बोला- 15 दिन से बीमार थी पत्नी

झांसी से सटे मध्य प्रदेश के ओरछा इलाके के नकटा गांव निवासी राहुल आदिवासी ने बताया- हमारी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं है। मैं और मेरी पत्नी रामवती (35) मजदूरी करते थे। हमारे दो बेटे विजय (20), राकेश (15) और एक बेटी नंदिनी (8) हैं। करीब 15 दिन से पत्नी रामवती बीमार चल रही थी।

शुक्रवार सुबह पत्नी की तबीयत अचानक से ज्यादा खराब हो गई। उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी। मैं अपनी बेटी के साथ पत्नी को ओरछा सीएचसी ले गया। वहां डॉक्टरों ने झांसी ले जाने के लिए कहा। मैं ऑटो करके पत्नी को झांसी मेडिकल कॉलेज लाया। यहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।

पार्किंग में पत्नी का शव लिए बैठे रहे

पति ने बताया- घर में पैसों की व्यवस्था नहीं थी। अचानक पत्नी की तबीयत खराब हुई तो पैसों का इंतजाम भी नहीं कर पाया। सोचा था कि सरकारी अस्पताल है तो पैसे नहीं लगेंगे। मगर डॉक्टर ने किराए की एंबुलेंस करके शव को घर ले जाने के लिए कहा।

पैसे नहीं थे तो शव को स्ट्रेचर पर इमरजेंसी के सामने बनी पार्किंग में ले गया। वहां पर पत्नी के शव को रखकर भगवान को याद करने लगा। लगभग दो घंटे बाद एक सिपाही अजय ने हमारी मदद की। उन्होंने ही एंबुलेंस बुलाकर शव को घर भिजवाने की व्यवस्था की।

संस्था के कोषाध्यक्ष बोले- गांव जाकर देखा तो परिवार की स्थिति दयनीय

पार्किंग में स्ट्रेचर पर शव रखकर राहुल जमीन पर बैठ गया। जबकि उसकी बेटी मां के शव के पास खड़ी थी। उनके पास एक डॉग का बच्चा भी था। मासूम बेटी मां को बुलाते हुए रोती रही। इस दौरान बारिश भी हो रही थी।

राजाराम स्वयंसेवी संस्था के कोषाध्यक्ष श्यामसुंदर शर्मा ने बताया- आज दोपहर को मेडिकल चौकी के एक सिपाही अजय का फोन आया था। उसने एक परिवार की मदद करने के लिए कहा। जब इमरजेंसी के बाहर पहुंचा तो एक युवक अपनी पत्नी की लाश रखकर बैठा था।

उसके पास पत्नी की लाश घर तक ले जाने के लिए पैसे नहीं थे। पास में बैठी उसकी मासूम बच्ची रो रही थी। तब अपनी एंबुलेंस से शव को फ्री में घर तक पहुंचाया। गांव में जाकर देखा तो परिवार की आर्थिक स्थिति बहुत ही दयनीय थी। एक झोपड़ी बनाकर परिवार रह रहा है।

CMS बोले- शव वाहन दिलाया जाता है, जांच कराएंगे

मेडिकल कॉलेज के सीएमएस सचिन माहौर ने कहा- अस्पताल की इमरजेंसी में मरीज की मौत होने पर परिजन शव वाहन की डिमांड करते हैं। हम लोग उनको शव वाहन उपलब्ध करा देते हैं। हो सकता है कि डॉक्टर ने शव परिजनों को सौंपा हो, लेकिन परिजनों ने शव वाहन की जरूरत के बारे में डॉक्टर को न बताया हो। फिर भी हम मामले की जांच करा रहे हैं।

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन