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: एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई अपील

News Desk / Mon, Dec 19, 2022


जबलपुर हाई कोर्ट

जबलपुर हाई कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया

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पीएससी 2019 की दोबारा मुख्य परीक्षा करवाने को एकलपीठ ने अनुचित मानते हुए रिवाइज रिजल्ट में चयनित अभ्यार्थियों की विशेष परीक्षा करवाने के आदेश जारी किए थे। एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की गई है., जिस पर शीतकालीन अवकाश के बाद सुनवाई संभावित है।

याचिकाकर्ता दीपेन्द्र यादव, शैलवाला भार्गव और अन्य की तरफ से दायर की गई अपील में कहा गया था कि पीएससी 2019 की परीक्षा में संशोधित नियम लागू किए थे, जिसके खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की युगलपीठ ने असंशोधित नियम 2015 का परिपालन सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए थे। हाई कोर्ट का आदेश आने के पहले पीएससी ने मुख्य परीक्षा आयोजित करते हुए रिजल्ट जारी कर दिए थे, जिसके बाद पीएससी ने असंशोधित नियम के तहत रिवाइज रिजल्ट जारी करते हुए, उसके अनुसार दोबारा मुख्य परीक्षा करवाने का निर्णय लिया था।

उसके खिलाफ मुख्य परीक्षा में चयनित 100 से अधिक अभ्यार्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था, जिन अभ्यार्थियों का मुख्य परीक्षा में चयन हो गया है और साक्षात्कार के लिए शॉर्ट लिस्ट किया गया है, दोबारा परीक्षा उनके साथ अन्याय होगी। दोबारा मुख्य परीक्षा करवाने में अधिक व्यय होगा, जो जनहित में नहीं है। पहले की भांति नवीन सूची के अनुसार चयनित अभ्यार्थियों के लिए विशेष परीक्षा छह महीने में आयोजित की जाए। पूर्व की मुख्य परीक्षा और विशेष परीक्षा के परिमाण अनुसार अंतिम सूची तैयार की जाए।

दायर अपील में कहा गया है, प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा का रिजल्ट जारी करने में असंशोधित नियम 2015 का पालन नहीं किया गया है। अवैधानिक रिजल्ट के आधार पर चयनित अभ्यार्थियों के पास कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह और विनायक शाह ने प्रस्तुत की है। 

विस्तार

पीएससी 2019 की दोबारा मुख्य परीक्षा करवाने को एकलपीठ ने अनुचित मानते हुए रिवाइज रिजल्ट में चयनित अभ्यार्थियों की विशेष परीक्षा करवाने के आदेश जारी किए थे। एकलपीठ के आदेश को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट में अपील दायर की गई है., जिस पर शीतकालीन अवकाश के बाद सुनवाई संभावित है।

याचिकाकर्ता दीपेन्द्र यादव, शैलवाला भार्गव और अन्य की तरफ से दायर की गई अपील में कहा गया था कि पीएससी 2019 की परीक्षा में संशोधित नियम लागू किए थे, जिसके खिलाफ दायर याचिका की सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट की युगलपीठ ने असंशोधित नियम 2015 का परिपालन सुनिश्चित करने के आदेश जारी किए थे। हाई कोर्ट का आदेश आने के पहले पीएससी ने मुख्य परीक्षा आयोजित करते हुए रिजल्ट जारी कर दिए थे, जिसके बाद पीएससी ने असंशोधित नियम के तहत रिवाइज रिजल्ट जारी करते हुए, उसके अनुसार दोबारा मुख्य परीक्षा करवाने का निर्णय लिया था।

उसके खिलाफ मुख्य परीक्षा में चयनित 100 से अधिक अभ्यार्थियों ने हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका की सुनवाई करते हुए एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा था, जिन अभ्यार्थियों का मुख्य परीक्षा में चयन हो गया है और साक्षात्कार के लिए शॉर्ट लिस्ट किया गया है, दोबारा परीक्षा उनके साथ अन्याय होगी। दोबारा मुख्य परीक्षा करवाने में अधिक व्यय होगा, जो जनहित में नहीं है। पहले की भांति नवीन सूची के अनुसार चयनित अभ्यार्थियों के लिए विशेष परीक्षा छह महीने में आयोजित की जाए। पूर्व की मुख्य परीक्षा और विशेष परीक्षा के परिमाण अनुसार अंतिम सूची तैयार की जाए।

दायर अपील में कहा गया है, प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा का रिजल्ट जारी करने में असंशोधित नियम 2015 का पालन नहीं किया गया है। अवैधानिक रिजल्ट के आधार पर चयनित अभ्यार्थियों के पास कोई वैधानिक अधिकार नहीं है। याचिकाकर्ताओं की तरफ से अधिवक्ता रामेश्वर पी सिंह और विनायक शाह ने प्रस्तुत की है। 


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