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: Project Cheetah: चीतों ने भारत आने के लिए साउथ अफ्रीका से भरी उड़ान, कल सीएम शिवराज कूनो में छोड़ेंगे

News Desk / Thu, Feb 16, 2023


देश के वन्य-जीव संरक्षण के इतिहास में शनिवार को एक और नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। श्योपुर के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में दक्षिण अफ्रीका से 12 चीते आ रहे हैं। चीतों ने भारत आने के लिए साउथ अफ्रीका से अपनी यात्रा शुरू कर दी है। पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव ने ट्वीट कर इसकी जानकारी दी और तस्वीरें साझा की। भारतीय वायु सेना का सी-17 ग्लोबमास्टर विमान शनिवार को चीतों को लेकर ग्वालियर पहुंचेगा। 

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान दक्षिण अफ्रीका से लाये जा रहे 12 चीतों को छोड़ेंगे। इनमें सात नर और पांच मादा चीता हैं। दो भाईयों की जोड़ियां हैं। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 17 सितंबर को नामीबिया से लाए पांच चीतों को कूनो में छोड़ा था। वन विभाग के अधिकारी के अनुसार सुबह 10 से 11 के बीच चीते एयरफोर्स के प्लेन से ग्वालियर एयरपोर्ट आएंगे। इसके बाद हेलीकॉप्टर से 11:30 बजे तक कूनो नेशनल पार्क पहुचेंगे, जिसके बाद सीएम चीतों को बाड़े में छोड़ेंगे। कूनों में नए मेहमानों के लिए पूरी तैयारी कर ली गई हैं। 
 

10 क्वारंटीन बोमा बनाएं गए हैं
कूनो में चीतों की देखभाल के लिये व्यापक इंतजाम किये गये हैं। 12 चीतों को रखने के लिये 10 क्वारंटीन बोमा (बाड़े) तैयार किये गये हैं। इनमें आठ नये और दो पुराने क्वारंटीन बोमा को परिवर्तित किया गया है। सभी क्वारंटीन बोमा में छाया के लिये शेड बनाये गये हैं। चीतों के लिये पानी की व्यवस्था की गई है। हेलीकाप्टर से 12 चीतों को उतारने के बाद उन्हें क्वारंटीन बोमा में लाया जायेगा। हेलीपेड से क्वारंटीन बोमा की दूरी लगभग एक किमी है।
 
1235 वर्ग किमी क्षेत्र में फैला है
कूनो करीब 350 वर्ग किलोमीटर के अभयारण्य के रूप में शुरू हुआ था और एक पत्ती के आकार का था, जिसके बीचों-बीच में एक रीढ़ की हड्डी की तरह कूनो नदी बहती है। इस संरक्षित क्षेत्र का नाम भी पड़ा है। राज्य सरकार ने वर्ष 1981 में लगभग 3300 वर्ग किमी के बड़े वन क्षेत्र के अंतर्गत लगभग 345 वर्ग किमी के कूनो वन्य-जीव अभयारण्य की स्थापना की। वन्य-जीव संरक्षण को और मजबूत करने और इस क्षेत्र के उचित प्रबंधन को सुनिश्चित करने के लिए अतिरिक्त 891 वर्ग किमी क्षेत्र को बफर के रूप में जोड़ कर वर्ष  2002  में 1235 वर्ग किमी के कूनो वन्य-जीव प्रभाग की स्थापना की गयी।

1952 में चीते विलुप्त घोषित हुए
1947 में भारत में सिर्फ तीन चीते बचे थे। शिकार हो जाने से उनका अस्तित्व खत्म हो गया था और 1952 में भारत में चीतों को विलुप्त घोषित कर दिया गया। तब से अब तक देश में फिर से चीतों के पुनर्वास के कोई सार्थक प्रयास नहीं हुए थे। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में चीता एक्शन प्लान को सार्थक बनाया गया। चीतों के पुनर्वास के लिये नामीबिया, साउथ अफ्रीका सहित भारत के वैज्ञानिकों और विषय-विशेषज्ञों के शोध के बाद तैयार विस्तृत चीता एक्शन प्लान के सुखद परिणाम से अब कूनो नेशनल पार्क का गौरव बढ़ा है।
 


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