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अनूपपुर में लॉज गिरने का LIVE VIDEO : कोतमा में 15 सेकंड में गिरी 4 मंजिला बिल्डिंग, लील गई जिंदगियां, बिना परमिशन खुदाई; जानिए चीख-पुकार की इनसाइड स्टोरी ?

तारीख: 4 अप्रैल। समय: शाम 5:30 बजे । जगह: अनूपपुर का कोतमा बस स्टैंड। ठीक उसी वक्त, जब ढलती शाम की सुनहरी रोशनी कोतमा की बाजार को हल्के उजाले में रंग रही थी, अचानक सब कुछ बदल गया। बिना किसी चेतावनी, बिना किसी संकेत के, चार मंजिला अग्रवाल लॉज एक झटके में जमींदोज हो गया। पहले हल्का कंपन, फिर गड्ढे की ओर झुकती इमारत… और अगले ही पल—धूल का घना गुबार। कुछ सेकंड में सब कुछ खत्म हो चुका था।

चीखें, मलबा और सन्नाटा

धूल का गुबार छंटा, तो सामने था मौत का मंजर। कंक्रीट और लोहे के ढेर के नीचे दबे लोगों की चीख-पुकार ने पूरे इलाके को दहला दिया। हर तरफ मदद की गुहार थी, लेकिन सामने था मलबे का विशाल ढेर—बेबस, भारी और निर्दयी। यह कोई साधारण ढहना नहीं था, बल्कि एक ऐसा तांडव था जिसने पलक झपकते ही जिंदगी को निगल लिया।

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लॉज के सामने खड़ा ट्रैक्टर इस हादसे का मूक गवाह बन गया। जैसे ही बिल्डिंग झुकी, चालक ने बिना एक पल गंवाए इंजन स्टार्ट किया और वहां से भाग निकला। आसपास मौजूद लोग घबराकर इधर-उधर दौड़ पड़े। कोई अपनों को पुकार रहा था, तो कोई नंगे हाथों से मलबा हटाने की कोशिश कर रहा था।

मलबे में दबे सपने

रेस्क्यू टीम के पहुंचने तक कई आवाजें हमेशा के लिए खामोश हो चुकी थीं। कोतमा निवासी हनुमान दीन यादव (55), जो टाइल्स लगाने का काम करते थे, चौथी मंजिल पर मौजूद थे। जब उनका शव बाहर निकाला गया, तो मुंह से खून बह रहा था और शरीर की हड्डियां बुरी तरह टूट चुकी थीं। वहीं, राम कृपाल यादव (40) नाम का एक और मजदूर भी इस हादसे का शिकार बन गया।

दो शव… एक रात… और अनगिनत सवाल—जिनका जवाब अभी भी मलबे के नीचे दबा हुआ है।

रेस्क्यू का संघर्ष, हर पल भारी

रात गहराती गई, लेकिन रेस्क्यू थमा नहीं। SDRF, प्रशासन और SECL की करीब 100 लोगों की टीम लगातार मलबा हटाने में जुटी रही। तीन क्रेन और जेसीबी मशीनें मलबे को चीरने की कोशिश करती रहीं, लेकिन 12 फीट गहरी खुदाई और उसमें भरा पानी सबसे बड़ी बाधा बन गया।

बताया जा रहा है कि लॉज की दीवार से सटाकर खोदे गए गड्ढे ने ही इस इमारत की नींव को कमजोर कर दिया। जैसे ही जमीन ने साथ छोड़ा, पूरी बिल्डिंग उसी दिशा में ढह गई।

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हर चीख के साथ बढ़ती बेचैनी

रात भर मलबे के नीचे से आती कराहें और चीखें रेस्क्यू टीम के लिए उम्मीद और डर दोनों बनी रहीं। हर आवाज इस बात का संकेत थी कि कोई अभी भी जिंदा है… और हर बीतता पल उस उम्मीद को कमजोर कर रहा था।

आंखों देखी त्रासदी

प्रत्यक्षदर्शी अरुण सोनी बताते हैं, “बिल्डिंग एक तरफ गड्ढे की ओर गिरी। पूरा इलाका धुएं और धूल से भर गया। लोग चीख रहे थे… मलबे के अंदर से आवाजें आ रही थीं।”

इधर, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने घटना पर दुख जताया। मंत्री दिलीप जायसवाल, कलेक्टर हर्षल पंचोली और एसपी मोती उर रहमान मौके पर पहुंचे और रेस्क्यू की निगरानी में जुटे रहे।

हीरा सिंह श्याम ने जताया दुख

अनूपपुर भाजपा के जिला अध्यक्ष हीरा सिंह श्याम ने भी दुख जताया है। श्याम ने कहा कि हमारे अनूपपुर जिले के कोतमा नगर पालिका क्षेत्र में होटल का भवन ढहने की दुर्घटना दुखद है।

दो लोगों की मौत होना पीड़ादायक है। ईश्वर दिवंगत को श्रीचरणों में स्थान दें और शोकसंतप्त परिजनों को दुःख सहन करने की शक्ति प्रदान करें। घायलों के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की कामना करता हूं।

मीडिया के जवाबों से भागते दिखे CMO

कोटमा नगर पालिका के CMO प्रदीप झारिया सवालों से बचते नज़र आए। वे घटना स्थल पर रात करीब 1:00 बजे पहुंचे। हर सवाल के जवाब में उन्हें यह कहते हुए देखा गया कि वे जांच के बाद ही जवाब देंगे। इसके अलावा इस घटना से जुड़ी लापरवाही के मामले में भी वे वही जवाब दे रहे हैं। यानी बाद में जानकारी देने का वादा कर रहे हैं।

कलेक्टर बोले- CM मोहन करेंगे मुआवजे का ऐलान

कलेक्टर हर्षल पंचोली ने बताया कि रेस्क्यू ऑपरेशन पूरी तत्परता से जारी है। अब तक 4 लोगों को मलबे से निकाला गया है, जिनमें एक की मौत हो गई है। घायलों का इलाज जारी है। मुख्यमंत्री जल्द मुआवजे का ऐलान करेंगे।

वहीं, मंत्री दिलीप जायसवाल ने हादसे को दुखद बताते हुए कहा कि प्रशासन, पुलिस और रेस्क्यू टीमें पूरी क्षमता के साथ राहत कार्य में जुटी हैं। मुख्यमंत्री स्वयं पूरे घटनाक्रम की निगरानी कर रहे हैं। फिलहाल प्राथमिकता रेस्क्यू ऑपरेशन है, जांच बाद में की जाएगी।

एक हादसा… जो सिर्फ खबर नहीं

उस रात कोतमा बस स्टैंड पर खड़ा हर शख्स एक ही आवाज सुन रहा था—मलबे के नीचे दबे किसी अपने की अंतिम पुकार। एंबुलेंस की सायरन, मशीनों की गूंज और लोगों की चीखें मिलकर एक ऐसी त्रासदी लिख रही थीं, जिसे शब्दों में बांधना आसान नहीं।

यह सिर्फ एक इमारत का गिरना नहीं था—यह एक शाम का मातम में बदल जाना था। और जब तक आखिरी मलबा नहीं हटेगा, तब तक यह कहानी अधूरी ही रहेगी।

यह सिर्फ एक इमारत नहीं गिरी थी। यह कोतमा के उन मेहनतकशों की जिंदगियाँ गिरी थीं, जो चौथी मंजिल पर टाइल्स लगा रहे थे, जो शाम को घर लौटने वाले थे,
जिनके घरवाले रात का खाना बनाकर इंतजार कर रहे थे।

वह इंतज़ार अधूरा रह गया। वह खाना ठंडा पड़ा रहा। और कोतमा की उस शाम की चीखें – सदियों तक गूंजती रहेंगी।

Q1. अनूपपुर में लॉज क्यों गिरा?
संभावित कारण बगल में की गई गहरी खुदाई और उसमें भरा पानी माना जा रहा है, जिससे नींव कमजोर हुई।

Q2. हादसे में कितने लोग प्रभावित हुए?
अब तक 2 मौतों की पुष्टि और कई लोगों के दबे होने की आशंका है।

Q3. क्या CCTV फुटेज सामने आया है?
हाँ, हादसे का CCTV वीडियो सामने आया है जिसमें बिल्डिंग गिरती दिख रही है।

Q4. रेस्क्यू ऑपरेशन कौन कर रहा है?
SDRF, प्रशासन और SECL की टीम मिलकर रेस्क्यू ऑपरेशन चला रही हैं।

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