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15 साल के क्रिकेटर पर IIM की रिसर्च : सक्सेस फॉर्मूले को डिकोड करेगा, क्रिस गेल का रिकॉर्ड तोड़ने वाले 'वंडर बॉय' पर देश की पहली 'मल्टी-डिसिप्लिनरी स्टडी'

हाल ही में संपन्न हुए आईपीएल (IPL 2026) में अपनी हैरतंगेज बल्लेबाजी से दुनिया को हैरान करने वाले 15 वर्षीय क्रिकेटर वैभव सूर्यवंशी अब देश के सबसे प्रतिष्ठित मैनेजमेंट संस्थानों में से एक, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (IIM) इंदौर के सिलेबस का हिस्सा बनने जा रहे हैं। आईआईएम इंदौर ‘वैभव मॉडल’ पर देश की पहली मल्टी-डिसिप्लिनरी स्टडी (बहु-विषयक अध्ययन) शुरू करने जा रहा है।

इस विशेष रिसर्च में खेल, मनोविज्ञान और प्रबंधन (मैनेजमेंट) के एक्सपर्ट्स मिलकर यह खोजेंगे कि इतनी छोटी उम्र में इतनी बड़ी और असाधारण सफलता हासिल करने का सीक्रेट फॉर्मूला क्या है।

क्यों चुनी गई वैभव की जर्नी? गेल का 14 साल पुराना रिकॉर्ड ध्वस्त

आईआईएम इंदौर के डायरेक्टर प्रो. हिमांशु राय के मुताबिक, वैभव सूर्यवंशी की क्रिकेट जर्नी बेहद अद्भुत और प्रेरणादायक है।

गेल का रिकॉर्ड तोड़ा: राजस्थान रॉयल्स के इस युवा ओपनर ने आईपीएल के एक सीजन में सर्वाधिक 72 छक्के मारकर यूनिवर्स बॉस क्रिस गेल (59 छक्के) का 14 साल पुराना वर्ल्ड रिकॉर्ड तोड़ दिया है।

असाधारण स्ट्राइक रेट: वैभव ने इस सीजन में 237.30 के अविश्वसनीय स्ट्राइक रेट से 776 रन बनाए और 'सुपर स्ट्राइकर ऑफ द सीजन' बने। आईपीएल इतिहास में 700 से ज्यादा रन इतने स्ट्राइक रेट से आज तक किसी ने नहीं बनाए।

ऑरेंज कैप समेत 5 अवॉर्ड: महज 15 साल की उम्र में वैभव ने 16 पारियों में 1 शतक और 5 अर्धशतक जड़कर ऑरेंज कैप अपने नाम की। उन्हें 'इमर्जिंग प्लेयर ऑफ द सीजन' के खिताब से भी नवाजा गया।

0.3 सेकंड का डिसीजन टाइम: द्रविड़ को दिया था बेबाक जवाब

मैनेजमेंट फैकल्टी डॉ. आरती चोपड़ा के अनुसार, 5’7 फीट हाइट और 55 किलो वजन के वैभव अपनी जबर्दस्त बैट स्पीड और टाइमिंग के दम पर बड़े-बड़े शॉट खेलते हैं।

उनका डिसीजन टाइम महज 0.3 सेकंड है, जिसके कारण गेंदबाजों को सेट होने का मौका ही नहीं मिलता। पूर्व कोच विक्रम राठौर भी उनके इसी शानदार बैलेंस के कायल हैं।

द्रविड़ से बातचीत का किस्सा

जब महान क्रिकेटर राहुल द्रविड़ ने उन्हें थोड़ा संभलकर खेलने की सलाह दी थी, तो वैभव का बेबाक और आत्मविश्वास से भरा जवाब था— "सर, गेंदबाज मुझे देखे (मैं क्यों डरूं)"। आउट होने के डर से पूरी तरह मुक्त वैभव का खेल दबाव में भी नहीं बिखरता।

स्टडी का 'डार्क साइड' पर भी रहेगा फोकस, कॉरपोरेट को मिलेगा नया मॉडल

आईआईएम के डायरेक्टर हिमांशु राय ने बताया कि इस स्टडी में सिर्फ कामयाबी नहीं, बल्कि इसके 'डार्क साइड' (चुनौतियों) पर भी गहराई से शोध किया जाएगा:

मानसिक थकान और सोशल मीडिया का प्रेशर

कम उम्र में मिलने वाली भारी प्रसिद्धि, करोड़ों के विज्ञापन ऑफर और सोशल मीडिया की ट्रोलिंग या तारीफ टैलेंट को विचलित कर देती है। कई बच्चे अपेक्षाओं के बोझ तले दब जाते हैं।

टैलेंट मैनेजमेंट का ब्लूप्रिंट

आईआईएम एक ऐसे 'सपोर्ट सिस्टम' का ब्लूप्रिंट तैयार करना चाहता है, जो ऐसी अद्भुत प्रतिभाओं को लंबे समय तक सहेज कर रख सके। इससे कॉरपोरेट जगत को भी अपने कर्मचारियों के 'टैलेंट मैनेजमेंट' के लिए एक नया और बेहतरीन मॉडल मिलेगा।

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