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छेरछेरा के रंग में रंगा राजेन्द्रग्राम, थमी रफ्तार : राजेन्द्रग्राम में सड़क पर ट्राइबल डांस, लगी गाड़ियों की कतार, जानिए आदिवासी संस्कृति का उत्सव

शिवम साहू, अनूपपुर। मध्यप्रदेश के अनूपपुर जिले के राजेन्द्रग्राम (Rajendragram) क्षेत्र में उस समय एक अनोखा और रोचक दृश्य देखने को मिला, जब आदिवासी समुदाय के लोगों ने अपने पारंपरिक पर्व छेरछेरा (Chherchhera Festival) को पूरे उत्साह और उमंग के साथ मनाया। इस दौरान ढोल-नगाड़ों की गूंज पर युवक-युवतियां road celebration के तहत बीच सड़क पर नृत्य करते नजर आए, जिससे कुछ समय के लिए मुख्य मार्ग पर यातायात प्रभावित हो गया।

इस आयोजन के दौरान राजेन्द्रग्राम से अमरकंटक होते हुए छत्तीसगढ़ की ओर जाने वाले main road पर आदिवासी युवक-युवतियों ने लंबी कतार में शैला नृत्य (shaila Dance) किया।

नृत्य और उत्सव के चलते सड़क पर जाम की स्थिति बन गई। आने-जाने वाले वाहनों को कुछ समय के लिए रोका गया और राहगीरों से symbolic contribution के रूप में कुछ पैसों की मांग की गई।

हालांकि इस दौरान किसी पर कोई दबाव नहीं बनाया गया, लेकिन सड़क पर नृत्य और वाहनों की आवाजाही रुकने से traffic safety को लेकर जोखिम की स्थिति भी बनी रही।

परेशानी के बीच दिखा सांस्कृतिक उल्लास

इस उत्सव के कारण कुछ वाहन चालकों और राहगीरों को असुविधा का सामना करना पड़ा, वहीं कई लोग आदिवासी समुदाय के इस traditional tribal dance और लोक उत्सव को देखकर रुक गए और इस सांस्कृतिक रंग में रंगते नजर आए। ढोल-नगाड़ों की थाप, पारंपरिक वेशभूषा और सामूहिक नृत्य ने पूरे माहौल को उत्सवमय बना दिया।

छेरछेरा: आदिवासी नए वर्ष का प्रतीक

राजेन्द्रग्राम क्षेत्र में निवास करने वाला आदिवासी समुदाय हर वर्ष tribal new year celebration के रूप में छेरछेरा पर्व मनाता है। यह पर्व 1 जनवरी से 14 जनवरी तक चलता है। इस दौरान लोग सार्वजनिक स्थलों के साथ-साथ घर-घर जाकर छैला नृत्य करते हैं और folk songs के माध्यम से अपनी संस्कृति और परंपराओं को जीवंत बनाए रखते हैं।

लोक परंपराओं की झलक

छेरछेरा पर्व के दौरान डंडा नृत्य (Danda Dance) जैसी लोक परंपराएं भी देखने को मिलती हैं, जो आदिवासी समाज की समृद्ध cultural heritage को दर्शाती हैं। सामूहिक नृत्य और गीतों के माध्यम से समुदाय आपसी एकता और सामाजिक जुड़ाव का संदेश देता है।

स्थानीय लोगों की बात

राजेन्द्रग्राम की रहने वाली दुर्गा ने बताया कि वे हर साल यह पारंपरिक छेरा छेरी त्यौहार मनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह पर्व एक जनवरी से लेकर 14 जनवरी तक चलता है, जिसमें लोग घर-घर और सार्वजनिक स्थानों पर नृत्य करते हैं। इस दौरान राहगीरों से बिना किसी दबाव के प्रतीकात्मक रूप से कुछ पैसे लिए जाते हैं, जो परंपरा का हिस्सा है।

संस्कृति बनाम यातायात चुनौती

राजेन्द्रग्राम में छेरछेरा के दौरान दिखा यह दृश्य भले ही traffic management के लिहाज से चुनौतीपूर्ण रहा हो, लेकिन इसमें आदिवासी समाज की living tradition, उत्सवधर्मिता और सांस्कृतिक पहचान साफ तौर पर झलकती नजर आई। यह आयोजन बताता है कि आधुनिक समय में भी आदिवासी समुदाय अपनी परंपराओं को पूरी आस्था और गर्व के साथ जीवित रखे हुए है।

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