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: आदिवासी छात्रों की हक की लड़ाई: IGNTU अमरकंटक में आखिर क्यों सड़क की लड़ाई लड़ने पर हैं मजबूर, क्या छात्रों के अधिकारों का किया जा रहा हनन ?

MP CG Times / Thu, Sep 16, 2021

अनूपपुर, अमरकंटक: इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अमरकंटक को आदिवासी समेत अन्य वर्ग के छात्रों की हित को देखते हुए खोला गया है, ताकि आदिवासी बाहुल्य क्षेत्र और अन्य इलाके के छात्रों को नई भविष्य मिल सके, लेकिन जब से विश्वविद्यालय बना है, तब से आसपास के जिले के आदिवासी छात्र और आदिवासी संगठन अपनी हक की लड़ाई लड़ रहे हैं, ताकि आदिवासी बच्चे भी पढ़कर लिखकर अपना और अपने मां बाप का नाम रौशन कर सकें, लेकिन आदिवासी छात्रों और संगठनों का आरोप है कि उनके साथ अन्याय किया जा रहा है. इसी कड़ी में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (N.S.U.I) Igntu अध्यक्ष रोहित सिंह मरावी, आदिवासी छात्र संगठन, जयस और सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ के नेतृत्व में IGNTU रजिस्ट्रार को अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा गया. इसके साथ ही छात्र और आदिवासी संगठनों ने शांकेतिक धरना प्रदर्शन किया, इसके अलावा प्रबन्धन को अल्टीमेटम भी दिया. दरअसल, आदिवासी छात्र और संगठनों का आरोप है कि IGNTU अमरकंटक में ST/SC छात्रों के साथ अन्याय, संवैधानिक अधिकारों और आरक्षण नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है. ऐसे में सभी संगठनों ने प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है. संगठनों ने कहा कि IGNTU अमरकंटक की स्थापना का उद्देश्य देश के आदिवासियों को उच्च शिक्षा के माध्यम से विकास की मुख्य धारा में जोड़ना था, लेकिन विश्वविद्यालय में पिछले कुछ वर्षों में विश्वविद्यालय प्रशासन ने जिस तरह छात्रों के साथ भेदभाव पूर्ण रवैया अपनाया है, जिससे इनके आदिवासी विरोधी मानसिकता को दर्शाता है. READ MORE- मूसलाधार बारिश से आमजन हलाकान: छग के कई जिलों में बाढ़ के हालात, भारी बारिश से डैम लबालब और कई गांव टापू में तब्दील जयस संगठन ने कहा कि शैक्षणिक सत्र 2020-21 में जो प्रवेश के लिये जो आवेदन मांगे गये हैं, जिसमें प्रतिशत के आधार पर प्रवेश देने का प्रावधान है, जिसमें आदिवासी समदाय के अधिकतर छात्रों के कम प्रतिशत होने के कारण प्रवेश प्रकिया से वंचित हो जाने का संदेह है. छात्र और संगठनों की मांग शैक्षणिक सत्र 2020-21 में पी.एच.डी. प्रवेश प्रक्रिया में आरक्षण और रोस्टर नियमों के उल्लंघन पर न्याययोचित कार्रवाई की जाये. विश्वविद्यालय में जो आदिवासी अध्ययन्न विभाग संचलित था, जिसमें सैंकडों छात्रों ने अपनी यू.जी./पी.जी की डिग्री प्राप्त कर चुके हैं और शोध कार्य कर रहे हैं, उन विभागों को दोबारा प्रारम्भ करें, ताकि छात्रों का भविष्य बर्बाद होने से रोका जा सके.
  • शिक्षा और नौकरी में आदिवासी छात्रों को 50 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया जाये.
  • आदिवासी भाषा, साहित्य, ज्ञान परम्परा, कला को विश्वविद्यालय के पाठयकमों अनिवार्य रूप से शामिल किया जाये.
  • फीस में हुई वृद्धि को वापस लिया जाये और बैकलॉग पदों पर नियुक्ति तत्काल कराई जाये.
बता दें कि संगठनों ने प्रधानमंत्री कार्यालय भारत सरकार, मावन संसाधन विकास मंत्रालय, U.G.C नई दिल्ली, ST/SC आयोग नई दिल्ली, आदिम जाति कल्याण मंत्रालय भारत और राज्यपाल को भी ज्ञापन की कॉपी भेजी है. गौरतलब है कि भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (N.S.U.I) Igntu अध्यक्ष रोहित सिंह मरावी, सह अध्यक्ष jyas जिला अध्यक्ष युवा प्रभाग अनूपपुर, इंद्रपाल मरकाम jays जिला अध्यक्ष डिंडोरी, मोहन मीणा संरक्षक आदिवासी छात्र संगठन IGNTU, मनीष धुर्वे जिला अध्यक्ष युवा प्रभाव GPM और सर्व आदिवासी समाज छत्तीसगढ़ के नेतृत्व में रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपा. read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanistan Taliban Left Behind in 2001 छत्तीसगढ़ की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें मध्यप्रदेश की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें खेल की खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें मनोरंजन की खबरें पढ़ने के लिए करें क्लिक

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