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: जानिए राजधानी की सड़कों पर क्यों दिखा कफन और लाशों का अंबार ?

रायपुर: राजधानी में शनिवार को अनुकंपा नियुक्ति (compassionate appointment) की मांग को लेकर दिवंगत पंचायत शिक्षक (widows of late panchayat teacher) की विधवाओं ने राजधानी की सड़क पर कफन ओढ़कर प्रदर्शन किया. जिस तरह से मौत होने के बाद शव को कफन से ढका जाता है ठीक उसी तरह का प्रदर्शन दिवंगत पंचायत शिक्षक की विधवा और उनके परिजनों ने किया. प्रदर्शन कर रहे लोगों का साफ कहना है कि जब तक सरकार अनुकंपा नियुक्ति की मांग (seeking compassionate appointment)को पूरी नहीं करेगी, तब तक इनका प्रदर्शन जारी रहेगा. प्रशासन की ओर से मीना साहू ने तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा.

राजधानी के बूढ़ा तालाब धरना स्थल (Budha talab) से यह प्रदर्शनकारी सप्रे स्कूल पहुंचे और प्रदर्शन किया. महिलाओं ने जमीन पर लेट कर कफन ओढ़ा और सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि सरकार 1 सूत्रीय मांग अनुकंपा नियुक्ति को पूरी नहीं करती हो तो आने वाले समय में यहां से हमारी लाशें घर वापस जाएंगी. इस प्रदर्शन में विधवाओं के साथ उनके बच्चे भी हैं. कुछ बच्चे जो घर में हैं वह अपनी मम्मी से फोन करके पूछते हैं की मम्मी घर कब आओगे. अनुकंपा संघ का यह प्रदर्शन पिछले 46 दिनों से लगातार चल रहा है.

अनुकंपा नियुक्ति की मांग (seeking compassionate appointment) को लेकर कई बार दिवंगत पंचायत संघ ने शिक्षा मंत्री (Education Minister Prem Sai Singh Tekam) से गुहार लगाई है. लेकिन अब तक किसी भी मंत्री ने इनकी फरियाद नहीं सुनी है. प्रदर्शन के दौरान एक विधवा भी बेहोश हो गई थी जिसे कुछ देर के बाद होश आया. प्रदर्शन कर रहे हैं विधवाओं का कहना है कि हम सरकार से किसी तरह की कोई नई नौकरी नहीं मांग रहे हैं. बल्कि हमारे पति की मृत्यु होने के बाद उनकी जगह पर अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रहे हैं.

अनुकंपा नियुक्ति को लेकर मापदंड कठिन

सरकार के द्वारा दिवंगत पंचायत शिक्षक के आश्रितों को अनुकंपा नियुक्ति के लिए निर्धारित अनिवार्य शैक्षणिक योग्यता बीएड, डीएड और टीईटी की परीक्षा देनी होगी. जिसके आधार पर ही उनको अनुकंपा नियुक्ति मिल सकेगी. सरकार द्वारा कठिन मापदंड तय किए गए हैं. जिसके चलते उन्हें आज तक अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल पाई है. दिवंगत पंचायत शिक्षक के आश्रित परिवारों के पास दो वक्त की रोजी रोटी के साथ ही परिवार पालने के लिए भी पैसे नहीं है. ऐसे में डीएड बीएड और टीईटी की परीक्षा वह कहां से देंगे.

प्रदेश सरकार ने 1 जुलाई 2018 को शिक्षा कर्मियों का संविलियन किया था. ऐसे परिवार के मुखिया का निधन होने पर उनके आश्रितों को सरकार ने अनुकंपा नियुक्ति दे दी है. लेकिन साल 2006 से 2018 के बीच जितने पंचायत शिक्षकों की मौतें हुई हैं. उनके आश्रितों को अब तक अनुकंपा नियुक्ति नहीं मिल पाई है. जिसके कारण इन आश्रित परिवारों को सड़क पर उतर कर अलग अलग तरीके से प्रदर्शन करना पड़ रहा है.

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प्रदेश में 935 दिवंगत पंचायत शिक्षक की विधवा और परिजन है

पूरे प्रदेश में लगभग 935 दिवंगत पंचायत शिक्षक की विधवाएं और बच्चें हैं जो अनुकंपा नियुक्ति की मांग कर रहे हैं. उनका कहना है कि डीएड बीएड और टीईटी की अनिवार्यता को शिथिल करते हुए उन्हें नियुक्ति दी जाए.

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