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पति ने बेडरूम में लगाए CCTV कैमरे : बॉयफ्रेंड को न्यूड VIDEO कॉल करती थी पत्नी, हाईकोर्ट पहुंचा केस

छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले से जुड़े एक वैवाहिक विवाद में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण आदेश देते हुए महासमुंद फैमिली कोर्ट के फैसले को निरस्त कर दिया है। हाईकोर्ट ने मामले की दोबारा सुनवाई का निर्देश देते हुए कहा कि पति द्वारा पेश की गई CCTV फुटेज वाली सीडी को रिकॉर्ड पर लिया जाए।

डिवीजन बेंच के जस्टिस संजय के. अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा ने कहा कि फैमिली कोर्ट तकनीकी आधार पर इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य को खारिज नहीं कर सकता, भले ही उसके साथ भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 65-B का सर्टिफिकेट संलग्न न हो।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि मामला चार साल से अधिक समय से लंबित है, इसलिए फैमिली कोर्ट इसे प्राथमिकता के आधार पर निपटाए।

क्या है पूरा मामला?

महासमुंद निवासी महिला की शादी वर्ष 2012 में रायगढ़ निवासी युवक से हुई थी। पति जिंदल पावर, तमनार में कार्यरत था, इसलिए शादी के बाद पत्नी वहीं रहने लगी।

पत्नी के आरोप

महिला का आरोप है कि तमनार आने के बाद पति ने अतिरिक्त पैसों की मांग शुरू कर दी और मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न किया। उसने यह भी आरोप लगाया कि पति ने बेडरूम में गुप्त रूप से CCTV कैमरे लगवाए, जिससे उसकी निजता का उल्लंघन हुआ।

विरोध करने पर मारपीट और घर से निकालने की धमकी दिए जाने का भी आरोप है। बाद में पत्नी ने थाने में शिकायत दर्ज कराई और फैमिली कोर्ट में दांपत्य अधिकारों की बहाली (Restitution of Conjugal Rights) की याचिका लगाई।

पति के आरोप

वहीं पति ने पत्नी पर क्रूरता और आपत्तिजनक ऑनलाइन व्यवहार का आरोप लगाते हुए तलाक की अर्जी लगाई। उसने दावा किया कि पत्नी अन्य पुरुषों के साथ अश्लील चैटिंग और वीडियो कॉल करती थी। इसी को साबित करने के लिए उसने बेडरूम में CCTV लगवाने की बात कही और फुटेज को CD के रूप में कोर्ट में पेश किया।

फैमिली कोर्ट ने क्या किया था?

महासमुंद फैमिली कोर्ट ने पति की तलाक याचिका खारिज कर दी थी और कहा था कि इलेक्ट्रॉनिक सबूत के साथ धारा 65-B का सर्टिफिकेट नहीं है, इसलिए CD स्वीकार नहीं की जा सकती। वहीं पत्नी की याचिका स्वीकार कर ली गई थी।

हाईकोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणी

हाईकोर्ट ने कहा कि:

फैमिली कोर्ट एक्ट, 1984 की धारा 14 और 20 के तहत फैमिली कोर्ट को व्यापक अधिकार हैं

वैवाहिक विवाद सुलझाने के लिए कोर्ट तकनीकी नियमों से बंधा नहीं है

इसलिए इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड को सिर्फ 65-B सर्टिफिकेट के अभाव में खारिज करना उचित नहीं

अब फैमिली कोर्ट को दोनों पक्षों के साक्ष्यों पर नए सिरे से विचार करना होगा।

मामला क्यों अहम है?

यह फैसला दो बड़े मुद्दों को छूता है:

वैवाहिक रिश्तों में निजता का अधिकार

इलेक्ट्रॉनिक सबूतों की स्वीकार्यता

आगे की सुनवाई में यह भी अहम होगा कि CCTV कैमरे लगाना निगरानी (surveillance) था या गोपनीयता का उल्लंघन।

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