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तालाब की मिट्टी से बना दी 24 करोड़ की सड़क ? : गरियाबंद PWD-पालिका ने खेला खेल, ठेकेदार को बनाया मालामाल, जानिए कैसे हुआ कमाल ?

MP CG Times / Thu, Jul 16, 2026

गिरीश जगत, गरियाबंद। 24 करोड़ की सड़क के लिए फाइलों में 'सेलेक्टेड सॉइल' लिखी गई, लेकिन जमीन पर तालाब की मिट्टी बिछा दी गई। शीतला तालाब के सौंदर्यीकरण के बदले नगर पालिका ने ठेकेदार को मिट्टी दे दी। इससे तालाब का गहरीकरण भी हो गया। ठेकेदार को महंगी मिट्टी लाने की जरूरत भी नहीं पड़ी। सवाल यह है कि क्या इस 'समन्वय' में सड़क की गुणवत्ता की कीमत चुकाई गई?

राजिम में नगर पालिका और पीडब्ल्यूडी की इसी जुगलबंदी पर सवाल उठ रहे हैं। सड़क निर्माण के तकनीकी मानकों के मुताबिक अर्थवर्क में तय गुणवत्ता वाली 'सेलेक्टेड सॉइल' का इस्तेमाल होना चाहिए था, लेकिन दावा है कि उसकी जगह वर्षों से पानी में भीगी तालाब की मिट्टी डाल दी गई। बारिश के बाद सड़क पर दिख रहे कटाव ने इस पूरे निर्माण और करोड़ों रुपए के काम की गुणवत्ता पर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अब डिटेल्स से पढ़िए करप्शन की पूरी कहानी

धर्मनगरी राजिम में करीब 24 करोड़ रुपए की सड़क निर्माण परियोजना को लेकर गुणवत्ता और नियमों पर सवाल खड़े हो गए हैं। आरोप है कि सड़क के अर्थवर्क (भराई) में तय मानकों के अनुसार 'सेलेक्टेड सॉइल' का इस्तेमाल करने के बजाय शीतला तालाब से निकाली गई मिट्टी डाल दी गई। दावा किया जा रहा है कि तालाब के सौंदर्यीकरण के बदले नगर पालिका ने ठेकेदार को मिट्टी उपलब्ध कराई, जिससे सड़क निर्माण की लागत कम हुई, लेकिन गुणवत्ता से समझौता हो गया।

तालाब सौंदर्यीकरण और सड़क निर्माण का 'समन्वय' बना चर्चा का विषय

राजिम नगर में शीतला तालाब के सौंदर्यीकरण और पुराने मेला स्थल को नए मेला स्थल से जोड़ने वाली सड़क परियोजना के बीच हुए कथित समन्वय ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं।

जानकारी के मुताबिक, तालाब सौंदर्यीकरण के लिए करीब एक करोड़ रुपए और सड़क निर्माण के लिए करीब 24 करोड़ रुपए की मंजूरी मिली है। दोनों परियोजनाओं के लिए अलग-अलग तकनीकी मानक और नियम तय हैं, लेकिन आरोप है कि दोनों विभागों ने निर्माण कार्यों को आपस में जोड़कर काम किया।

गहरीकरण और पचरी के बदले ठेकेदार को दे दी तालाब की मिट्टी

नियमों के अनुसार नगर पालिका की मिट्टी का उपयोग किसी दूसरे विभाग के निर्माण कार्य में नहीं किया जा सकता। इसके बावजूद नगर पालिका ने तालाब से निकली मिट्टी सड़क निर्माण में उपयोग के लिए उपलब्ध करा दी।

इस मामले में नगर पालिका के सीएमओ संतोष विश्वकर्मा का कहना है कि यह फैसला नगर पालिका के जनप्रतिनिधियों के निर्णय के आधार पर लिया गया। उन्होंने बताया कि तालाब के गहरीकरण के लिए किसी सरकारी मद में अलग से बजट का प्रावधान नहीं था।

सीएमओ के मुताबिक, तालाब में फाउंटेन और लाइटिंग लगाने के लिए अधिक गहराई और पर्याप्त जलभराव की जरूरत थी। ऐसे में मिट्टी निकालने से तालाब का गहरीकरण भी हो गया। इसके अलावा ठेका कंपनी तालाब के किनारे 15 से 20 मीटर ऊंची दो पचरियों का निर्माण भी करेगी। इसी कारण मिट्टी उपलब्ध कराई गई।

आरोप- ठेकेदार को कम खर्च में मिल गई मिट्टी

पुराने मेला स्थल को नए मेला स्थल से जोड़ने के लिए संगम तट होते हुए करीब तीन किलोमीटर लंबी पक्की और चौड़ी सड़क बनाई जा रही है। इस परियोजना के लिए करीब 36 करोड़ रुपए स्वीकृत होने का भी उल्लेख किया गया है।

आरोप है कि सड़क निर्माण में अर्थवर्क के लिए सेलेक्टेड सॉइल का उपयोग होना था, लेकिन सड़क के किनारे स्थित शीतला तालाब की मिट्टी का इस्तेमाल कर दिया गया। इससे मिट्टी की ढुलाई (लीड) कम हो गई और अर्थवर्क अपेक्षाकृत कम लागत में पूरा हो गया।

क्या होती है 'सेलेक्टेड सॉइल' और क्यों जरूरी है इसका इस्तेमाल

सड़क निर्माण में किसी भी मिट्टी का उपयोग नहीं किया जा सकता। भारतीय सड़क कांग्रेस (IRC) और पीडब्ल्यूडी के मानकों के अनुसार अर्थवर्क के लिए सेलेक्टेड सॉइल का उपयोग किया जाता है।

क्या क्या होना चाहिए ?

CBR वैल्यू 8 प्रतिशत से अधिक होनी चाहिए।

प्लास्टिसिटी इंडेक्स 6 प्रतिशत से कम होना चाहिए।

ऑर्गेनिक पदार्थ नहीं होना चाहिए।

75 मिमी से बड़े पत्थर या कंकड़ नहीं होने चाहिए।

लाल मुरम, पीली मिट्टी, रेत और छोटे कंकड़ों का मिश्रण सबसे उपयुक्त माना जाता है।

'तालाब की दलदली मिट्टी सड़क के लिए उपयुक्त नहीं'

आरोप लगाने वालों का कहना है कि सड़क निर्माण में जिस मिट्टी का उपयोग किया गया, वह वर्षों से तालाब में भीगी हुई दलदली मिट्टी है। इसलिए उसमें सेलेक्टेड सॉइल जैसी गुणवत्ता नहीं है।

बारिश के बाद सड़क पर कई स्थानों पर कटाव और गहरी खाइयां बनने लगी हैं। इसे निर्माण गुणवत्ता पर सवाल उठाने का आधार बताया जा रहा है। दावा किया गया है कि नदी तट के पास बन रही इस सड़क में मानकों के अनुरूप मिट्टी का उपयोग नहीं होने से भविष्य में सड़क की मजबूती प्रभावित हो सकती है।

PWD का दावा- जांच में मिट्टी सभी मानकों पर सही

लोक निर्माण विभाग (PWD) के एसडीओ मनीष साहू ने आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि सड़क निर्माण में उपयोग की गई तालाब की मिट्टी की जांच कराई गई है और वह सभी तकनीकी मानकों पर उपयुक्त पाई गई है। उन्होंने बताया कि अर्थवर्क का भुगतान भी जारी है।

मामले में उठ रहे प्रमुख सवाल

क्या सड़क निर्माण में तय मानकों के अनुसार सेलेक्टेड सॉइल का उपयोग किया गया?

क्या नगर पालिका की मिट्टी दूसरे विभाग के निर्माण कार्य में दी जा सकती है?

तालाब की दलदली मिट्टी सड़क निर्माण के लिए तकनीकी रूप से उपयुक्त है या नहीं?

यदि मिट्टी मानकों के अनुरूप थी तो सेलेक्टेड सॉइल की शर्त क्यों रखी गई थी?

बारिश के बाद सड़क पर दिख रहे कटाव की वजह क्या है?

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