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: विकास को तरस रहे 68 गांव के कमार जनजाति: गरियाबंद में सड़कें नहीं, रोजगार नहीं, घोड़े से ढोते हैं राशन, CEO मैडम को पलायन की जानकारी ही नहीं

गिरीश जगत, गरियाबंद: छत्तीसगढ़ के गरियाबंद का अमली गांव आज भी अपनी बदनसीबी पर आंसू बहा रहा है। विकास धरातल पर नहीं दिखता है। यहां की सड़कें भी खराब हैं। गांव में बदहाली है। नेता, मंत्री न स्थानीय जनप्रतिनिधि कोई ध्यान नहीं देता। रोजगार नहीं है। पलायन को मजबूर हैं। यहां के लोग सांसद विधायक तक को नहीं जानते, लेकिन विकास के आस में हर बार टकटकी लगाए बैठे रहते हैं। प्रशासन भी इधर आंख बंदकर के बैठा है, जिससे विकास गांव तक नहीं पहुंचा।

दरअसल, गरियाबंद में 191 गांवों में कमार जनजाति के 17 हजार 968 लोग रहते हैं, लेकिन ज्यादातर गांवों में मूलभूत सुविधाओं की कमी है। कहीं बिजली नहीं तो कहीं सड़कें नहीं है। गांव में रोजगार नहीं मिल रहा है। लोग पलायन करने को मजबूर हैं। सड़कें नहीं होने के कारण ग्रामीण राशन को घोड़े पर लादकर गांव तक ले जाते हैं। इनमें से अमली गांव की तस्वीर भी कुछ इसी तरह है, जहां विकास नहीं पहुंचा है। 11 परिवार के लोग काम की तलाश में पलायन कर गए।

जन मन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजाति (कमार) बसाहट वाले गांव की तस्वीर बदलने के कवायद थी, लेकिन इंदागांव के आश्रित ग्राम अमली में पलायन जारी है। मैनपुर जनपद के 11 कमार जनजाति परिवार के 11 महिला समेत कुल 28 लोगों पलायन कर गए हैं।

सड़क की मंजूरी में वन अधिनियम बाधा उप सरपंच उत्तम बस्तीय ने कहा कि 80 महिला 130 पुरुष बसाहट वाला यह गांव 80 के दशक से बसा हुआ है। इस गांव की प्रमुख समस्या सड़क है। गांव को पंचायत मुख्यालय या फिर जनपद मुख्यालय से जोड़ने के लिए सड़क की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन इलाका उदंती सीता नदी अभ्यारण्य के दायरे में आता है। ऐसे में सड़क की मंजूरी में वन अधिनियम बाधा बन रही है। मनरेगा के तहत काम नाकाफी उप सरपंच ने बताया कि गांव में मनरेगा के काम खोले जाते हैं, जो नाकाफी होता है। इसलिए रोजगार के लिए प्रति वर्ष अमली के कुछ परिवार आंध्र प्रदेश के ईंट भट्ठों में काम करने अक्टूबर माह में जाते हैं, जो फिर जुलाई अगस्त में वापस आ जाते हैं। 68 में से 35 सड़क के लिए 40 करोड़ की मंजूरी आदिवासी विकास विभाग के सहायक आयुक्त नवीन भगत ने बताया कि जिले में विशेष पिछड़ी जनजाति रहने वाले 191 गांव के 4919 परिवार को संपूर्ण मूलभूत सुविधा देने कार्ययोजना पर काम शुरू हो गया है। सड़क विहीन 68 गांव की सूची में अमली भी शामिल है। पहले चरण में 35 सड़कों को मंजूरी मिली है, जिसकी कुल लम्बाई 65 किमी है। इसके लिए 40 करोड़ रुपए की राशि मंजूरी मिली है। पीएमजीएसवाय के तहत काम कराने की प्रक्रिया जल्द शुरू की जाएगी। अन्य सड़कों के लिए वन विभाग से एनओसी लेने की प्रक्रिया जारी है। सड़कों के बिना अन्य योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा आ रही थी। सड़क बन जाने से ऐसे गांवों में पलायन की समस्या नहीं रहेगी। आवास, स्वास्थ्य, पानी, बिजली की सुविधा के लिए योजना नवीन भगत ने बताया कि 191 गांव में रहने वाले विशेष पिछड़ी जनजाति के 17968 लोग रहते हैं। जरूरतमंद 1,925 परिवार के लिए आवास की मंजूरी देकर पहली किश्त की राशि उनके खातों में ट्रांसफर किया गया है। स्वास्थ्य, पानी, बिजली के साथ साथ इनके रोजगार की व्यवस्था पर भी काम जारी है। गाड़ी नहीं घोड़े खरीदते हैं ग्रामीण सड़क के अभाव में मैनपुर विकासखंड के पहाड़ों में बसे कमार जनजाति के लोग जरूरत के समानों को ढ़ोने के लिए घोड़े का उपयोग करते हैं। जमा पूंजी से कमार जनजाति के लोग वाहन के बजाए घोड़े की खरीदी करते हैं। कुल्हाड़ी घाट पंचायत के आश्रित ग्राम कुरुवापानी, भालू डिग्गी, मटाल, ताराझर जैसे गांव में 25 से भी ज्यादा घोड़े हैं। एक घोड़े की कीमत 20 हजार से 45 हजार तक होती है। 90 के दशक से इन गांव में जरूरत के सामान ढ़ोने घोड़े रखने की चलन बढ़ गई है। जनपद सीईओ को पलायन की जानकारी नहीं पलायन की जानकारी से मैनपुर जनपद सीईओ अंजली खलको ने अनभिज्ञता जाहिर की, लेकिन उन्होंने कहा कि पंचायत की मांग के आधार पर रोजगार के लिए मनरेगा से पर्याप्त काम कराए जा रहें। क्या है जन मन योजना ? प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश के गरीब, पिछड़ें सहित विशेष पिछड़ी जनजातियों के आवासहीन परिवारों को स्वयं का पक्का मकान देने की पहल से इन वर्गों में खुशी की लहर है। विशेष पिछड़ी जनजाति तबके की भलाई के लिए सरकार प्रधानमंत्री जनमन योजना संचालित कर रही है। इस योजना से विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के लोगों को शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं जैसे-प्रधानमंत्री आवास, आयुष्मान भारत, नलजल, शिक्षा, बिजली, कृषि, सड़क, आधार पंजीयन इत्यादि में शामिल कर विकास की मुख्य धारा से जोड़ा जा रहा है। Read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanistan Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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