झीरम घाटी में 29 लोगों की हत्या, 12 साल बाद फैसला : जगदलपुर NIA कोर्ट ने 10 नक्सलियों को माना दोषी; भूपेश-बैज बोले- यह इंसाफ नहीं खानापूर्ति, मास्टरमाइंड खुलेआम घूम रहे
MP CG Times / Sat, Sep 5, 2026
जगदलपुर। 25 मई 2013 को बस्तर की झीरम घाटी में घटित देश के सबसे बड़े और जघन्य राजनीतिक नक्सली नरसंहार में 5 सितंबर 2026 को जगदलपुर स्थित विशेष NIA अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुना दिया है। कोर्ट ने मामले में सुनवाई का सामना कर रहे सभी 10 आरोपियों को दोषी करार दिया है।
इस बहुचर्चित केस में कुल 11 आरोपियों के खिलाफ ट्रायल चल रहा था, जिनमें से एक आरोपी की सुनवाई के दौरान ही मौत हो चुकी है। अभियोजन पक्ष (NIA) ने कोर्ट के समक्ष 101 गवाहों के बयान और महत्वपूर्ण दस्तावेज पेश कर अपना पक्ष साबित किया, जिसके आधार पर कोर्ट ने यह फैसला सुनाया।
हालांकि, कोर्ट के फैसले के बाद फैसले से असंतुष्ट बचाव पक्ष और कांग्रेस नेताओं और पीड़ितों का भारी आक्रोश सामने आ रहा है।

झीरम घाटी के 10 आरोपी
प्रमिला कोडियाम उर्फ ज्योति, बंजामी उर्फ सन्ना, अयाता मरकाम, अयाता माड़कम, मुक्का मंडावी, मड़कामी देवा, कवासी कोसा, चौतू उर्फ मुन्ना, कोसा कवासी, महादेव नाग और सुमित्रा शामिल है।
भूपेश बघेल, बैज और पीड़ितों का हमला: 'बड़े नक्सली और षड्यंत्रकारी अब भी बेनकाब नहीं'
एनआईए कोर्ट के फैसले के बाद राज्य में राजनीतिक भूचाल आ गया है। कांग्रेस नेताओं और पीड़ित परिवारों ने इस फैसले को 'अधूरा न्याय' और 'खानापूर्ति' करार दिया है:
पूर्व सीएम भूपेश बघेल: "हम कोर्ट के फैसले का सम्मान करते हैं, लेकिन एनआईए ने पूरी जांच में केवल लीपापोती की है। जिन बड़े नक्सली नेताओं के नाम एफआईआर में थे, उन पर एक्शन नहीं हुआ। सबसे बड़ी बात, इस जघन्य घटना के पीछे के 'राजनीतिक षड्यंत्र' और सुरक्षा हटाने की जांच ही नहीं की गई। हमारी सरकार की बनाई एसआईटी (SIT) जांच को रोकने के लिए एनआईए सुप्रीम कोर्ट तक गई थी।"
पीसीसी चीफ दीपक बैज: "बस्तर का बच्चा-बच्चा जानता है कि झीरम हमला एक सोची-समझी सुपारी किलिंग और राजनीतिक षड्यंत्र था। जिन 10 लोगों को सजा मिली है, वे कोई बड़े लीडर नहीं हैं। मुख्य साजिशकर्ता खुलेआम घूम रहे हैं।"
महेंद्र कर्मा की बेटी तूलिका कर्मा व उमेश पटेल: "घटना के समय जो लोग मौके पर मौजूद थे या जिम्मेदार अफसर थे, उनसे एनआईए ने पूछताछ तक नहीं की। न्याय के नाम पर खानापूर्ति हुई है। हम इस फैसले के खिलाफ और षड्यंत्र की निष्पक्ष जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।"
प्रत्यक्षदर्शी शिव सिंह ठाकुर (जिन्हें पीठ पर गोली लगी थी): "जिन्होंने इस हमले की साजिश रची थी, वे आज भी आजाद घूम रहे हैं। पीड़ितों को न्याय नहीं मिला।"
क्या हुआ था 25 मई 2013 की उस काली दोपहर? (झीरम हमले की पूरी कहानी)
कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा: 2013 विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस पूरे प्रदेश में परिवर्तन यात्रा निकाल रही थी। 25 मई को सुकमा में जनसभा के बाद करीब 25 गाड़ियों का काफिला (200 से अधिक नेता व कार्यकर्ता) जगदलपुर के लिए रवाना हुआ।
घात लगाकर हमला: दोपहर करीब 3:40 बजे जैसे ही काफिला झीरम घाटी के सघन जंगल में पहुंचा, 200 से ज्यादा नक्सलियों ने पेड़ गिराकर रास्ता बंद कर दिया और आईईडी (IED) ब्लास्ट के साथ चारों तरफ से अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
टॉप लीडरशिप का सफाया: इस बर्बर हमले में तत्कालीन प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल, बस्तर टाइगर के नाम से मशहूर महेंद्र कर्मा, पूर्व मंत्री विद्याचरण शुक्ल, और उदय मुदलियार समेत 29 लोगों की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इसमें 10 जांबाज पुलिसकर्मी भी शहीद हुए थे।
100 गोलियों से कर्मा की हत्या: नक्सलियों ने महेंद्र कर्मा को पहचान कर गाड़ी से उतारा और उनके शरीर पर लगभग 100 गोलियां दागी थीं।
2 जांच आयोग, NIA और SIT का उलझा जाल
इस नरसंहार की जांच को लेकर पिछले 13 सालों से लगातार कानूनी और राजनीतिक रस्साकशी चलती रही है:
2013: जस्टिस प्रशांत कुमार मिश्रा की अध्यक्षता में पहला विशेष न्यायिक जांच आयोग बना। साथ ही मामला एनआईए (NIA) को सौंपा गया।
2018: राज्य में कांग्रेस सरकार आने के बाद राजनीतिक षड्यंत्र की परतें खोलने के लिए एसआईटी (SIT) का गठन किया गया, जिसे लेकर राज्य और केंद्र (NIA) के बीच कानूनी जंग छिड़ी।
2021: जस्टिस सतीश अग्निहोत्री और जस्टिस गुलाम मिन्हाजुद्दीन की अध्यक्षता में दूसरा न्यायिक जांच आयोग गठित किया गया था।
बचाव पक्ष के वकील अरविंद चौधरी का बयान
बचाव पक्ष के वकील ने कहा कि वे इस फैसले से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं और दोषियों को बेकसूर बताते हुए फैसले के खिलाफ तत्काल छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में अपील करेंगे।
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