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500 गरीबों के रोजगार पर चला कलेक्टर का चाबुक ! : गरियाबंद आदिवासी विभाग ने कर्मचारियों को हटाया, 8 महीने की सैलरी कौन डकार गया ?

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में ट्राइबल विभाग में बिना लिखित आदेश भर्ती किए गए 500 से अधिक महिला-पुरुष दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इससे नाराज़ प्रभावित कर्मचारी आज कलेक्टोरेट घेराव की तैयारी में हैं। बताया जा रहा है कि छात्रावास और आश्रमों में स्वीकृत पदों से दोगुनी संख्या में नेताओं और अफसरों को खुश करने के लिए भर्तियां की गई थीं। इनमें से करीब 40 कर्मचारी ऐसे हैं, जो कलेक्टर से लेकर मंत्री के बंगले तक सेवा दे रहे हैं।

कलेक्टर भगवान सिंह उइके द्वारा 13 जनवरी को जारी एक आदेश ने ट्राइबल विभाग में कार्यरत 500 से अधिक कर्मचारियों के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। आदेश में शासन द्वारा वर्ष 2014 में तय सेटअप का हवाला देते हुए कहा गया है कि विभागीय संस्थानों में दैनिक वेतनभोगी और भृत्य के स्वीकृत पदों से अधिक कर्मचारी कार्यरत हैं। इसके तहत प्रत्येक माह की 5 तारीख को तय सेटअप के अनुसार पदस्थ कर्मचारियों की उपस्थिति प्रतिवेदन भेजने के निर्देश संस्थान अधीक्षकों को दिए गए हैं।

इस आदेश के बाद अधीक्षकों ने स्वीकृत पदों से अतिरिक्त करीब 519 कर्मचारियों को मौखिक रूप से काम पर नहीं आने के निर्देश दे दिए। इसके बाद आदिम जाति कल्याण विभाग के कर्मचारियों ने विभागीय कार्रवाई के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। प्रभावित कर्मचारियों ने इस कार्रवाई को अन्यायपूर्ण बताते हुए कई दौर की बैठकें कीं।

17 जनवरी और 27 जनवरी को कलेक्टर के नाम ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन सुनवाई नहीं होने पर 29 जनवरी को तीसरा ज्ञापन देकर 30 जनवरी को कलेक्टर घेराव की चेतावनी दी गई। आज सैकड़ों की संख्या में प्रभावित कर्मचारी रावणभाठा में एकत्र होकर कलेक्टोरेट घेराव के लिए रवाना होंगे।

संघ के जिला अध्यक्ष ने बताया कि घेराव का निर्णय एक दिन पहले हुई बैठक में लिया गया है। उनका कहना है कि पिछले 8-9 वर्षों से कार्यरत कर्मचारियों को भी हटाया जा रहा है। वहीं, नई भर्ती किए गए करीब 150 कर्मचारियों को अब तक 8 माह का वेतन नहीं मिला है।

अचानक हटाए जाने से कर्मचारियों के परिवारों के सामने रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है और इससे उनकी आर्थिक व मानसिक स्थिति पर गहरा असर पड़ेगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी जिला प्रशासन की होगी।

कलेक्टर से लेकर मंत्री आवास तक ड्यूटी

डोमार ने बताया कि बिना किसी लिखित आदेश के भर्ती किए गए करीब 40 कर्मचारियों की ड्यूटी एसडीएम, कलेक्टर, आयुक्त, ट्राइबल मंत्री और जज के बंगले में कराई जा रही है। इनमें से कुछ कर्मचारियों के नाम पर नियमित वेतन निकाला जा रहा है, जबकि हॉस्टलों में निष्ठापूर्वक सेवा देने वाले कई कर्मचारियों को महीनों से वेतन तक नहीं मिला है।

नेता-अफसरों को खुश करने के लिए हुई नियुक्तियां

बताया गया कि वर्ष 2019 में रिक्त पदों पर नियमितीकरण के बाद जिले के छात्रावास-आश्रमों में 369 अतिरिक्त कर्मचारी थे। कोरोना काल के बाद वर्ष 2022 से करीब 150 लोगों की मौखिक आदेश पर नियुक्ति कर दी गई।

नौकरी के लिए कई गरीब बेरोजगारों ने जमीन और जेवरात गिरवी रखकर डेढ़ से दो लाख रुपये तक खर्च किए। कुछ लोग जनप्रतिनिधियों की सिफारिश से आए, तो कुछ कथित दलालों के माध्यम से भर्ती हुए। तीन कर्मचारियों ने एक कांग्रेस नेता के खिलाफ गरियाबंद के सिटी कोतवाली में ठगी का मामला भी दर्ज कराया है।

स्वीकृत पदों से तीन गुना भर्ती होने के कारण विभागीय मद से वेतन भुगतान संभव नहीं हो पा रहा था। इसी वजह से सैकड़ों कर्मचारियों को पिछले 8-9 महीनों से वेतन नहीं मिला। वेतन की मांग को लेकर बढ़ते दबाव के चलते जिला प्रशासन ने छंटनी जैसा कठोर कदम उठाया है।

लोकेश्वर पटेल, सहायक आयुक्त, आदिवासी विभाग, गरियाबंद ने बताया कि कलेक्टर के आदेश के बाद स्वीकृत पदों के अनुसार ही उपस्थिति प्रतिवेदन भेजने के निर्देश अधीक्षकों को दिए गए हैं। इसी आधार पर वेतन भुगतान किया जाएगा। जो अतिरिक्त कर्मचारी बिना लिखित आदेश के कार्यरत थे, उन्हें काम पर आने से मना किया गया है। कर्मचारियों की सटीक संख्या कार्यालय पहुंचने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

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