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: गरियाबंद में कब तक बहेगा पत्रकारों का खून ? रेत माफिया के कांड के तीसरे दिन हरकत में प्रशासन, अब तक सिर्फ नोटिस, एक्शन पर सूख रही कलम की स्याही ?

गिरीश जगत की रिपोर्ट

गरियाबंद जिले में अवैध रेत खनन को लेकर अब प्रशासन हरकत में आ गया है। सोमवार को एक पत्रकार पर खदान संचालक के गुर्गों के हमले के बाद जिला स्तर पर पत्रकार संगठन लामबंद हुआ। इसके बाद मंगलवार को प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक से मुलाकात कर पांच प्रमुख मांगें रखीं। कार्रवाई नहीं होने पर सात दिन के भीतर कलमबंद आंदोलन की चेतावनी भी दी गई थी।

प्रेस प्रतिनिधियों के इस दबाव के बाद अब प्रशासन ने कार्रवाई की शुरुआत कर दी है। कलेक्टर भगवान सिंह ने जिला खनिज अधिकारी रोहित साहू को कारण बताओ (शोकॉज) नोटिस जारी किया है। इसमें पूछा गया है कि पत्रकारों द्वारा पूर्व सूचना देने के बावजूद अवैध रेत खदानों पर कार्रवाई क्यों नहीं की गई। नोटिस के जवाब के लिए अधिकारी को सीमित समय दिया गया है।

पत्रकारों पर हमले के बाद अवैध रेत खदानें बनीं जांच के घेरे में

सोमवार को देवभोग क्षेत्र के पुरानापानी घाट में संचालित अवैध रेत खदान में पत्रकारों पर हमला हुआ था। आरोप है कि रेत ठेकेदार के गुर्गों ने जानलेवा हमला किया। इस घटना के बाद जिले भर के पत्रकार एकजुट हो गए और प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की।

पत्रकारों की प्रमुख मांगें:

अवैध खदानों को तत्काल बंद किया जाए

दोषियों पर आपराधिक प्रकरण दर्ज हो

माफिया के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो

पत्रकारों की सुरक्षा की गारंटी हो

भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों इसके लिए निगरानी व्यवस्था बने

जिले में 17 से ज्यादा अवैध खदानें सक्रिय, अब शुरू हुई सख्ती

जानकारी के मुताबिक, जिले में देवभोग के एक घाट को छोड़कर करीब 17 स्थानों पर अवैध रेत खनन धड़ल्ले से चल रहा था। हमले की घटना के बाद इनमें से आधे से ज्यादा स्थानों पर काम ठप हो गया, लेकिन कई खदानें अब भी सक्रिय हैं। इसी को लेकर पत्रकार संगठन ने इन्हें पूरी तरह बंद करने की मांग की थी।

कलेक्टर और एसपी ने आश्वस्त किया है कि

अवैध खदानों तक हाइवा और ट्रकों की पहुंच को रोका जाएगा

जिन रास्तों से रेत का परिवहन होता है, वहां स्ट्रक्चर बनाकर मार्ग अवरुद्ध किया जाएगा

अस्थायी रैंप और संपर्क मार्गों को तत्काल हटाया जाएगा

जिन पंचायतों में यह गतिविधि चल रही है, उन्हें अलर्ट नोटिस जारी किया जाएगा

मंगलवार शाम को ही कलेक्टर ने सभी एसडीएम और तहसीलदारों को निर्देश जारी किए हैं कि वे अवैध रेत खनन पर कड़ी निगरानी रखें और तत्काल कार्रवाई करें।

पीएम आवास निर्माणकर्ताओं को मिलेगी राहत

अवैध खनन पर सख्ती के बीच कलेक्टर भगवान सिंह ने स्पष्ट किया कि प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत जिन हितग्राहियों के मकान 33% पूरे हो चुके हैं, उन्हें रेत बिना रॉयल्टी के उपलब्ध कराई जाएगी।

कलेक्टर ने यह भी कहा कि यदि किसी ने पीएम आवास निर्माण में बाधा डाली या रेत ले जाने से रोका तो उस पर कार्रवाई तय है।

गरियाबंद में अवैध रेत खनन अब केवल पर्यावरण या राजस्व का नहीं, बल्कि पत्रकारों की सुरक्षा और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी मामला बन गया है। पत्रकारों की एकजुटता और प्रशासनिक दबाव के बीच अब देखना होगा कि कार्रवाई केवल नोटिस तक सिमटेगी या वाकई अवैध खनन पर लगाम लगेगी।

Read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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