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: Chhattisgarh: एसडीएम पर छह लाख रुपये का जुर्माना, 15 दिन में करना था जमीन डायवर्जन, पांच माह तक अटकाया

News Desk / Wed, Dec 14, 2022


(सांकेतिक तस्वीर)

(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

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छत्तीसगढ़ के सरगुजा में लोक अदालत ने अंबिकापुर एसडीएम प्रदीप साहू पर छह लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एसडीएम साहू ने जमीन डायवर्जन के मामले को छह माह तक अटकाए रखा था। जबकि शासन के नियमानुसार 15 दिन में उसका निराकरण होना चाहिए। छत्तीसगढ़ में संभवत: यह अपनी तरह का पहला मामला है, जब सेवा नियमों को पूरा नहीं करने पर किसी अफसर को क्षतिपूर्ति का आदेश दिया गया है। 

दरअसल, मृगेंद्र सिंहदेव ने सरगवां में स्थित भूखंड क्रमांक 71, रकबा 16315 वर्ग मीटर भूमि पर कॉलोनी निर्माण के लिए भूमि का डायवर्सन कराना था। इसके लिए उन्होंने सभी शर्तों को पूरा करते हुए पंचायत का अनापत्ति प्रमाण पत्र, सहायक संचालक नगर व ग्राम निवेश की अनुमति, कालोनाइजर का प्रमाण प्रत्र प्राप्त कर लिया था। इन दस्तावेजों के साथ मृगेंद्र ने 28 फरवरी को एसडीएम साहू के सामने पेश किया। 

छत्तीसगढ़ शासन के नियमों के अनुसार, इस पर एसडीएम को 15 दिन में फैसला लेना था। अगर डायवर्जन नहीं हो सकता था तो प्रकरण को निरस्त करना चाहिए था, लेकिन एसडीएम ने मामले को अटका दिया। हालांकि मृगेंद्र ने एसडीएम से व्यक्तिगत संपर्क कर 18 मई को डायवर्सन के पहले आंतरिक विकास के लिए आंकलित राशि 13 लाख 5 हजार 200 रुपये की 20 प्रतिशत राशि बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करा दी। 

कलेक्टर से मुख्यमंत्री तक गुहार, पर नहीं हुई सुनवाई
इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर मृगेंद्र सिंहदेव ने 30 जून तक कलेक्टर सरगुजा के समक्ष दो बार, मुख्य सचिव रायपुर और मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर प्रकरण का निराकरण कराने का निवेदन किया। इसके बाद भी डायवर्सन नहीं किया गया। इस पर मृगेंद्र सिंहदेव ने स्थाई लोक अदालत में प्रकरण प्रस्तुत कर 10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति दिलाए जाने की मांग की थी।

निर्णय के एक दिन पूर्व किया डायवर्सन का आदेश
स्थाई लोक अदालत की अध्यक्ष उर्मिला गुप्ता ने 12 दिसंबर को मामले की सुनवाई करते हुए एसडीएम के अधिवक्ता को अपना पक्ष रखने के लिए कहा। एसडीएम की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। कोर्ट ने एक सप्ताह का समय देने से इंकार करते हुए 14 दिसंबर को निर्णय के लिए तिथि निर्धारित कर दी। निर्णय के एक दिन पहले 13 दिसंबर को एसडीएम ने डायवर्सन का आदेश पास कर दिया और जवाब के बदले डायवर्सन के आदेश की प्रति लगाकर कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई। 

सेवा में कमी के लिए छह लाख क्षतिपूर्ति
स्थाई लोक अदालत ने अपने आदेश में 15 दिनों की तय समय सीमा में प्रकरण का निराकरण नहीं किए जाने को अंबिकापुर एसडीएम प्रदीप साहू की सेवा में कमी माना। इसके बाद न्यायाधीश सुमन गुप्ता ने अंबिकापुर एसडीएम को क्षतिपूर्ति 6 लाख रुपये जमा करने का आदेश जारी किया है। 30 दिनों में राशि जमा नहीं करने पर प्रकरण पेश करने के दिनांक से 12 प्रतिशत की दर से ब्याज भी एसडीएम अंबिकापुर को देना 

विस्तार

छत्तीसगढ़ के सरगुजा में लोक अदालत ने अंबिकापुर एसडीएम प्रदीप साहू पर छह लाख रुपये का जुर्माना लगाया है। एसडीएम साहू ने जमीन डायवर्जन के मामले को छह माह तक अटकाए रखा था। जबकि शासन के नियमानुसार 15 दिन में उसका निराकरण होना चाहिए। छत्तीसगढ़ में संभवत: यह अपनी तरह का पहला मामला है, जब सेवा नियमों को पूरा नहीं करने पर किसी अफसर को क्षतिपूर्ति का आदेश दिया गया है। 

दरअसल, मृगेंद्र सिंहदेव ने सरगवां में स्थित भूखंड क्रमांक 71, रकबा 16315 वर्ग मीटर भूमि पर कॉलोनी निर्माण के लिए भूमि का डायवर्सन कराना था। इसके लिए उन्होंने सभी शर्तों को पूरा करते हुए पंचायत का अनापत्ति प्रमाण पत्र, सहायक संचालक नगर व ग्राम निवेश की अनुमति, कालोनाइजर का प्रमाण प्रत्र प्राप्त कर लिया था। इन दस्तावेजों के साथ मृगेंद्र ने 28 फरवरी को एसडीएम साहू के सामने पेश किया। 

छत्तीसगढ़ शासन के नियमों के अनुसार, इस पर एसडीएम को 15 दिन में फैसला लेना था। अगर डायवर्जन नहीं हो सकता था तो प्रकरण को निरस्त करना चाहिए था, लेकिन एसडीएम ने मामले को अटका दिया। हालांकि मृगेंद्र ने एसडीएम से व्यक्तिगत संपर्क कर 18 मई को डायवर्सन के पहले आंतरिक विकास के लिए आंकलित राशि 13 लाख 5 हजार 200 रुपये की 20 प्रतिशत राशि बैंक ड्राफ्ट के माध्यम से जमा करा दी। 

कलेक्टर से मुख्यमंत्री तक गुहार, पर नहीं हुई सुनवाई
इसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं होने पर मृगेंद्र सिंहदेव ने 30 जून तक कलेक्टर सरगुजा के समक्ष दो बार, मुख्य सचिव रायपुर और मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र लिखकर प्रकरण का निराकरण कराने का निवेदन किया। इसके बाद भी डायवर्सन नहीं किया गया। इस पर मृगेंद्र सिंहदेव ने स्थाई लोक अदालत में प्रकरण प्रस्तुत कर 10 लाख रुपये क्षतिपूर्ति दिलाए जाने की मांग की थी।


निर्णय के एक दिन पूर्व किया डायवर्सन का आदेश
स्थाई लोक अदालत की अध्यक्ष उर्मिला गुप्ता ने 12 दिसंबर को मामले की सुनवाई करते हुए एसडीएम के अधिवक्ता को अपना पक्ष रखने के लिए कहा। एसडीएम की ओर से शासकीय अधिवक्ता ने जवाब देने के लिए एक सप्ताह का समय मांगा। कोर्ट ने एक सप्ताह का समय देने से इंकार करते हुए 14 दिसंबर को निर्णय के लिए तिथि निर्धारित कर दी। निर्णय के एक दिन पहले 13 दिसंबर को एसडीएम ने डायवर्सन का आदेश पास कर दिया और जवाब के बदले डायवर्सन के आदेश की प्रति लगाकर कार्रवाई रोकने की गुहार लगाई। 

सेवा में कमी के लिए छह लाख क्षतिपूर्ति
स्थाई लोक अदालत ने अपने आदेश में 15 दिनों की तय समय सीमा में प्रकरण का निराकरण नहीं किए जाने को अंबिकापुर एसडीएम प्रदीप साहू की सेवा में कमी माना। इसके बाद न्यायाधीश सुमन गुप्ता ने अंबिकापुर एसडीएम को क्षतिपूर्ति 6 लाख रुपये जमा करने का आदेश जारी किया है। 30 दिनों में राशि जमा नहीं करने पर प्रकरण पेश करने के दिनांक से 12 प्रतिशत की दर से ब्याज भी एसडीएम अंबिकापुर को देना 


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