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: 4 सालों में सबसे ताकतवर ब्यूरोक्रेट्स बन गईं थी सौम्या चौरसिया, इस कारण उनसे प्रभावित थे सीएम भूपेश बघेल

News Desk / Tue, Dec 6, 2022


रायपुर: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के एक मध्यमवर्गीय परिवार में जन्मी सौम्या चौरसिया इन दिनों सुर्खियों में हैं। ईडी ने सौम्या चौरसिया को 2 दिसंबर को गिरफ्तार किया था। सौम्या तीन भाई-बहनों में सबसे बड़ी हैं। सौम्या चौरसिया 2008 में राज्य प्रशासनिक सेवा की परीक्षा पास की थी। इसके बाद वो पेंड्रा और बिलासपुर में एसडीएम के पद पर रहीं। सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी के बाद सियासत भी तेज है। छत्तीसगढ़ के सीएम भूपेश बघेल ने उनकी गिरफ्तारी के खिलाफ लड़ाई लड़ने की बात कही थी। बता दें कि ईडी की टीम ने सौम्या चौरसिया को अवैध वसूली और जमीन से जुड़े भ्रष्टाचार के मामले में गिरफ्तार किया है।

सौम्या चौरसिया के बारे में कहा जाता है कि बीते 4 सालों में वो राज्य की सबसे मजबूत ब्यूरोक्रेट्स बन गईं थी। स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुख्यमंत्री कार्यालय में कई सीनियर अधिकारी को भी सौम्या चौरसिया का निर्देश मानना पड़ता था। बता दें कि सौम्या चौरसिया पहली बार तब सुर्खियों में आई थीं। जब 2020 में उनके खिलाफ आयकर विभाग की टीम ने छापेमारी की थी।

काम करने की शैली से प्रभावित हुए थे भूपेश बघेल
दरअसल, 2015 में जब सौम्या चौरसिया मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के गृह जिले दुर्ग में एसडीएम थी उसी समय सुर्खियों में थी। दुर्ग ज़िले के पाटन के किसानों ने एसडीएम कार्यालय का घेराव किया था। इस दौरान भूपेश बघेल की नजर में वो पहली बार आई थी। भूपेश बघेल के विधानसभा क्षेत्र पाटन में एसडीएम रहते हुए उनके काम करने की शैली से भूपेश बघेल प्रभावित हुए थे। 2018 में जब राज्य में कांग्रेस की सरकार बनी और भूपेश बघेल ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली तो उन्हें मुख्यमंत्री सचिवालय में नियुक्ति मिली थी।

सौम्या चौरसिया नियुक्ति के कुछ महीनों के बाद भी सचिवालय की सबसे ताकतवर अधिकारी बन गई थीं। ऐशा कहा जाता है कि कई राजनीतिक फैसलों में भी उनका दखल देखने को मिलता था। अपने काम करने की शैली के कारण वो मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की क़रीबी अधिकारी बन गईं थीं।
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सीएम ने कहा था लड़ाई लड़ेंगे
सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी पर सीएम भूपेश बघेल ने ट्वीट किया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था- जैसा कि मैं कहता रहा हूं, ईडी द्वारा मेरी उप सचिव सौम्या चौरसिया की गिरफ्तारी एक राजनीतिक कार्रवाई है। हम इसके ख़िलाफ़ पूरी ताक़त से लड़ेंगे।


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