'लगा करियर खत्म हो रहा, तब मोदी का फोन आया' : PM मोदी ने कहा- CM नहीं, अपने शिवराज से बात कर रहा हूं; जानिए 'अपनापन' किताब के 10 किस्से
Shivraj Singh Chouhan Book: PM Modi 35 Years Experiences: मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपने 35 साल के अनुभवों पर एक किताब लिखी है। ‘अपनापन : नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ नाम की किताब का विमोचन दिल्ली में मंगलवार (26 मई) को पूर्व पीएम एचडी देवेगौड़ा और पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू ने किया।
Shivraj Singh Chouhan Book: PM Modi 35 Years Experiences: शिवराज की इस किताब में कई चौंकाने वाली बातें हैं। एक किस्सा 2023 के विधानसभा चुनाव के वक्त का है। इस दौरान शिवराज सिंह चौहान के राजनीतिक करियर को लेकर विपक्ष तेजी से मुद्दा बना रहा था।
इस बीच पीएम मोदी का उनके पास कॉल आया, जिसमें उन्होंने कहा था कि मैं मुख्यमंत्री से नहीं, अपने शिवराज से बात कर रहा हूं। इस किताब में शिवराज ने पहलगाम हमला, कोरोना काल, 1990 के दशक की कई बातों को शामिल किया है।
Shivraj Singh Chouhan Book: PM Modi 35 Years Experiences: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यकर्ताओं के प्रति प्रेम, संगठन के प्रति निष्ठा और अपने अनुभवों को खासतौर पर बताया है।

अब जानिए किताब की 10 मुख्य बातें..
1. जब शिवराज को आया पीएम मोदी का फोन
शिवराज लिखते हैं कि 2023 के विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा की पहली सूची जारी हुई, लेकिन उसमें शिवराज सिंह चौहान का नाम नहीं था। इसी बीच उनके एक भाषण की लाइन- “यदि हम चले जाएंगे तो याद बहुत आएंगे” को विपक्ष ने इस तरह प्रचारित करना शुरू कर दिया, मानो उनका राजनीतिक अंत तय हो चुका हो।
कांग्रेस नेताओं ने ‘मामाजी का श्राद्ध’ जैसे तंज कसने शुरू कर दिए। माहौल ऐसा बनाया जा रहा था कि शिवराज का दौर खत्म हो गया। इसी तनावपूर्ण माहौल में नरेंद्र मोदी का फोन आया।
किताब में शिवराज लिखते हैं कि मोदी ने बातचीत की शुरुआत ही इस वाक्य से की..मैं मुख्यमंत्री से बात नहीं कर रहा, मैं अपने शिवराज से बात कर रहा हूं।” इसके बाद उन्होंने राजनीति नहीं, मन की बात की। कहा था- इतनी चिंता क्यों कर रहे हो? कुछ दिन एकांत में जाओ, अपने भीतर झांको, मन को शांत करो।
शिवराज लिखते हैं कि मोदी सिर्फ एक नेता की तरह नहीं, बल्कि बड़े भाई की तरह बात कर रहे थे। उन्होंने समझ लिया था कि यदि शिवराज का मनोबल टूटता है तो उसका असर लाखों कार्यकर्ताओं पर पड़ेगा।
इसके बाद शिवराज उत्तराखंड गए। वहां उन्होंने गंगा किनारे आत्ममंथन किया। लौटने के बाद वे पूरे जोश के साथ चुनाव प्रचार में जुट गए। किताब के मुताबिक, उन्होंने 13-14 दिनों में 165 से ज्यादा सभाएं कीं।

2. पहलगाम हमले के बाद कहा था इस बार अलग होगा
किताब की शुरुआत ही पहलगाम आतंकी हमले के बाद हुई कैबिनेट बैठक के जिक्र से होती है। अप्रैल 2025 में हुए इस हमले में 26 लोगों की मौत हुई थी। शिवराज लिखते हैं कि पूरा देश गुस्से और दुख में था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब का दौरा बीच में छोड़कर लौटे थे।
कैबिनेट बैठक में सभी के मन में सवाल था कि अब क्या होगा, लेकिन शिवराज के मुताबिक, मोदी के चेहरे पर न गुस्सा था और न ही बेचैनी। वे बेहद शांत और संयमित दिखाई दे रहे थे, तभी उन्होंने कहा-इस बार का ऑपरेशन अलग होगा। यह सर्जिकल स्ट्राइक और एयरस्ट्राइक से भी अलग होगा, जिन्होंने यह किया है, उन्हें और उनके आकाओं को नहीं छोड़ेंगे।
शिवराज लिखते हैं कि यह बयान भावनाओं में बहकर नहीं, बल्कि ठोस संकल्प के साथ दिया गया था। उन्होंने इसे ऐसे नेतृत्व की मिसाल बताया, जो संकट के समय भी धैर्य नहीं खोता।
3. एमपी के प्रभारी रहते पूछा- किसी के पास ईमेल आईडी है
किताब में 1990 के दशक का एक रोचक किस्सा भी है। उस दौर में राजनीति में कम्प्यूटर और ई-मेल जैसी चीजें लगभग अनजान थीं। शिवराज लिखते हैं कि उन्होंने मोदी को दिल्ली के एक छोटे कमरे में घंटों डेस्क टॉप कम्प्यूटर पर काम करते देखा।
1998 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की बैठक में मोदी ने कार्यकर्ताओं से पूछा- आपमें से कितनों के पास ई-मेल आईडी है? इस पर वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर मजाक में बोले- ईमेल-फीमेल करते रहते हैं, इससे क्या होगा? तब बैठक में ठहाके लगे थे।
शिवराज लिखते हैं कि उस समय भी मोदी समझ चुके थे कि आने वाला दौर तकनीक का है। वही तकनीक आज राजनीति, प्रशासन और आम जिंदगी का सबसे बड़ा माध्यम बन चुकी है।
4. कोविड में भर्ती शिवराज को आया प्रधानमंत्री का फोन
कोविड महामारी के दौरान जब शिवराज सिंह चौहान खुद संक्रमित होकर अस्पताल में भर्ती थे, तब अचानक नरेंद्र मोदी का फोन आया। किताब में शिवराज लिखते हैं कि उन्हें विश्वास ही नहीं हुआ कि पूरे देश के संकट के बीच प्रधानमंत्री उनके स्वास्थ्य की चिंता कर रहे हैं।
मोदी ने सिर्फ औपचारिक हालचाल नहीं पूछा। उन्होंने ऑक्सीजन लेवल, दवाओं और परिवार की सुरक्षा तक की जानकारी ली। बार-बार पूछते रहे कि डॉक्टर क्या कह रहे हैं? दवाएं समय पर मिल रही हैं या नहीं।
शिवराज लिखते हैं…उस बातचीत में उन्हें प्रधानमंत्री कम और परिवार के बड़े सदस्य जैसा स्नेह ज्यादा महसूस हुआ। यही वजह है कि भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच ‘मोदी का परिवार’ जैसा भाव पैदा हुआ।
5. पिता के निधन पर सबसे पहला फोन मोदी का था
2019 में शिवराज सिंह चौहान के पिता का निधन हुआ। किताब में उन्होंने लिखा है कि सबसे पहला सांत्वना कॉल नरेंद्र मोदी का आया था। मोदी ने सिर्फ औपचारिक संवेदना व्यक्त नहीं की, बल्कि पिता की बीमारी, अंतिम समय और परिवार की स्थिति के बारे में विस्तार से पूछा।
कुछ दिनों बाद जब शिवराज दिल्ली पहुंचे, तब भी मोदी ने दोबारा परिवार का हाल जाना। शिवराज लिखते हैं कि राजनीति में इतनी बड़ी जिम्मेदारियों के बीच किसी नेता का इस तरह व्यक्तिगत दुख में साथ खड़ा होना उन्हें अंदर तक छू गया।
6. बेटों की शादी में रिश्तेदारों से मिलते रहे मोदी
2025 में जब शिवराज अपने दोनों बेटों की शादी का निमंत्रण देने परिवार सहित मोदी से मिलने पहुंचे तो उन्हें लगा था कि प्रधानमंत्री कुछ मिनट का समय देंगे, लेकिन मोदी ने करीब 40 मिनट तक पूरे परिवार के साथ बैठकर बातचीत की।
उन्होंने सिर्फ औपचारिक बातें नहीं कीं, बल्कि बेटों के डेयरी कारोबार के बारे में विस्तार से पूछा। गाय की कौन सी नस्ल है? कितना दूध उत्पादन होता है? कौन-कौन से उत्पाद बनते हैं? इन सभी विषयों पर चर्चा की। शादी समारोह में भी मोदी हर रिश्तेदार से मिलते रहे। तस्वीरें खिंचवाते रहे। हालचाल पूछते रहे। शिवराज लिखते हैं कि वहां प्रधानमंत्री नहीं, परिवार का मुखिया दिखाई दे रहा था।
7. एयरपोर्ट छोड़ने से रोका, कहा- निवेशकों के बीच रहिए
2014 में इंदौर में ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट हो रही थी। कार्यक्रम खत्म होने के बाद प्रोटोकॉल के तहत शिवराज सिंह प्रधानमंत्री को एयरपोर्ट छोड़ने जा रहे थे, तभी मोदी ने उनका हाथ पकड़ लिया और कहा- आप यहीं डेलीगेट्स के बीच रहिए। इससे प्रदेश को ज्यादा फायदा होगा।
शिवराज लिखते हैं कि मोदी के लिए व्यक्तिगत सम्मान और औपचारिकता से ज्यादा जरूरी कार्यक्रम का उद्देश्य था। वे चाहते थे कि मुख्यमंत्री निवेशकों के साथ ज्यादा समय बिताएं, ताकि राज्य को लाभ मिले। ऐसा ही प्रसंग महाकाल लोक लोकार्पण के दौरान भी आया, जब मोदी ने उन्हें हेलिपैड जाने के बजाय श्रद्धालुओं और संतों के बीच रहने की सलाह दी।
8. दो दशक बाद भी पुराने कार्यकर्ता को पहचान लिया
2023 में हरियाणा के झज्जर की एक रैली में पीएम मोदी की नजर अचानक दीपक कुमार नाम के पुराने कार्यकर्ता पर पड़ी। दीपक 1990 के दशक में हरियाणा भाजपा कार्यालय में काम करते थे और मोदी के लिए खिचड़ी-दलिया बनाया करते थे।
दो दशक से ज्यादा समय गुजरने के बाद भी मोदी ने उन्हें तुरंत पहचान लिया। मंच से उतरकर उनके पास गए। गले लगाया और पुराने दिनों को याद करते हुए हंसी-मजाक भी किया। शिवराज लिखते हैं कि वहां मौजूद लोग यह देखकर हैरान थे कि इतने वर्षों बाद भी मोदी को एक साधारण कार्यकर्ता याद था।
9. ट्रम्प टैरिफ विवाद में बोले- किसानों से समझौता नहीं होगा
किताब में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के टैरिफ विवाद का भी जिक्र है। उस समय चर्चा थी कि भारत को अमेरिकी दबाव के आगे झुकना पड़ सकता है। कैबिनेट बैठक में मोदी ने साफ शब्दों में कहा कि किसानों, मछुआरों और पशुपालकों के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।
उन्होंने कहा कि यदि इसके लिए व्यक्तिगत राजनीतिक कीमत भी चुकानी पड़े तो तैयार हैं। शिवराज लिखते हैं कि उस बैठक में मोदी सिर्फ प्रधानमंत्री नहीं, बल्कि किसानों के हितों के प्रहरी की तरह दिखाई दे रहे थे।
10. रेहड़ी-पटरी वालों को पहली बार मिला सम्मान
किताब में पीएम स्वनिधि योजना का जिक्र बेहद भावुक अंदाज में किया गया है। शिवराज लिखते हैं कि उन्होंने खुद देखा है कि रेहड़ी-पटरी वालों की दुकानें रातों-रात तोड़ दी जाती थीं। उनकी जिंदगी उजड़ जाती थी।
कोविड के दौरान मोदी ने पीएम स्वनिधि योजना शुरू की। इससे रेहड़ी-पटरी वालों को सिर्फ ऋण नहीं मिला, बल्कि पहचान और सम्मान भी मिला। मोदी ने सुझाव दिया था कि इन लाभार्थियों से सीधा संवाद किया जाए।
इसके बाद मुख्यमंत्री निवास में स्ट्रीट वेंडरों के कार्यक्रम हुए। लोग अपने सबसे अच्छे कपड़े पहनकर आए, कविताएं सुनाईं और पहली बार खुद को सम्मानित महसूस किया। शिवराज लिखते हैं कि मोदी ने इन्हें लाभार्थी नहीं, बल्कि ‘स्ट्रीटप्रेन्योर’ के रूप में देखने की सोच दी।
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