क्या सस्पेंड होंगे अनूपपुर कलेक्टर रहे हर्षल पंचोली? : IAS ने कौन सा कांड कर दिया, 500 केसों में गड़बड़ी, जानिए साहब की सीक्रेट कहानी ?
MP CG Times / Tue, Oct 20, 2026
IAS Harshal Pancholi Suspension News: मध्यप्रदेश में IAS हर्षल पंचोली पर निलंबन की तलवार लटक रही है। अनूपपुर के कलेक्टर रह चुके पंचोली पर SEIAA अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए हैं। अध्यक्ष ने 20 अक्टूबर को मुख्य सचिव को पत्र लिखकर उन्हें तत्काल सस्पेंड करने की सिफारिश की है।
विवाद पर्यावरण मंजूरी के करीब 500 लंबित मामलों से जुड़ा है। आरोप है कि बैठकों के एजेंडे में मनमाने तरीके से प्रकरण शामिल किए गए और अध्यक्ष की मंजूरी के बिना एजेंडा पोर्टल पर अपलोड किया गया।
IAS Harshal Pancholi Suspension News: मामले में NGT के आदेश की अनदेखी, पर्यावरण मंजूरी के पत्र जारी करने में देरी और बैठक की कार्यवाही समय पर अपलोड नहीं करने के आरोप भी हैं। अध्यक्ष ने निष्पक्ष जांच की मांग की है। अब सवाल है कि सरकार IAS हर्षल पंचोली पर क्या कार्रवाई करती है।

500 लंबित मामलों के बीच एजेंडा तैयार करने पर विवाद
SEIAA अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने मुख्य सचिव को लिखे पत्र में प्राधिकरण की 974वीं और 975वीं बैठकों के एजेंडे को लेकर गंभीर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। उनका आरोप है कि सदस्य सचिव हर्षल पंचोली ने एजेंडा तैयार करते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया।
पत्र के मुताबिक, मध्यप्रदेश SEIAA में करीब 500 प्रकरण लंबित हैं। ऐसे में लंबित मामलों को तय क्रम के अनुसार विचार के लिए रखा जाना चाहिए था। हालांकि, अध्यक्ष का आरोप है कि परिवेश पोर्टल पर उपलब्ध सूची में ऊपर और नीचे के कई प्रकरण छोड़ दिए गए और बीच में दर्ज मामलों को एजेंडे में शामिल कर लिया गया।
अध्यक्ष ने इस प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि लंबित मामलों के क्रम का पालन नहीं किया गया। इससे यह सवाल खड़ा हुआ कि किन प्रकरणों को बैठक में विचार के लिए शामिल किया गया और किन्हें बाहर रखा गया।

पत्र के अनुसार, 17 अक्टूबर 2026 को SEIAA की 974वीं और 975वीं बैठकों का एजेंडा केंद्र सरकार के परिवेश पोर्टल पर अपलोड किया गया था। अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एजेंडे में कुछ ऐसे मामले भी शामिल कर दिए गए, जो SEIAA में लंबित नहीं थे, बल्कि राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (SEAC) के पास लंबित थे।
वहीं, पर्यावरण मंजूरी से जुड़े कुछ अन्य प्रकरणों को एजेंडे से बाहर रखने पर भी आपत्ति जताई गई है। अध्यक्ष का कहना है कि इस तरह की प्रक्रिया से प्राधिकरण के सामने लंबित मामलों पर विचार करने की व्यवस्था प्रभावित होती है।
अध्यक्ष की मंजूरी के बिना एजेंडा अपलोड करने का आरोप
शिकायत में हर्षल पंचोली पर बैठकों का एजेंडा अध्यक्ष से अनुमोदन लिए बिना परिवेश पोर्टल पर अपलोड करने का आरोप भी लगाया गया है।
अध्यक्ष ने अपने पत्र में केंद्र सरकार के कार्यालय ज्ञापन और पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना-2006 के प्रावधानों का हवाला दिया है। उनके मुताबिक, SEIAA से जुड़े निर्णय प्राधिकरण की बैठकों में लिए जाने चाहिए और एजेंडा निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार तैयार किया जाना चाहिए।
चौहान का आरोप है कि सदस्य सचिव ने कुछ बैठकों का एजेंडा उनकी मंजूरी के बिना ही पोर्टल पर अपलोड कर दिया। इससे एजेंडा तैयार करने और उसे अंतिम रूप देने की निर्धारित प्रक्रिया पर सवाल खड़े हुए हैं।

पत्र में SEIAA की 966वीं बैठक का भी उल्लेख किया गया है। अध्यक्ष के मुताबिक, इस बैठक के एजेंडे में सात प्रकरणों को उनकी मंजूरी के बिना शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। इसके बाद 974वीं और 975वीं बैठकों के एजेंडे को लेकर भी इसी तरह की कथित अनियमितताओं का मुद्दा उठाया गया।
अध्यक्ष की शिकायत का मुख्य बिंदु यह है कि प्राधिकरण की बैठकों में किन मामलों पर विचार होना है, इसके लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन किया जाना जरूरी है। उनका आरोप है कि इस प्रक्रिया की अनदेखी से प्राधिकरण की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है।
NGT के आदेश के बाद भी मामलों को एजेंडे में नहीं रखने का आरोप
अध्यक्ष ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के 3 फरवरी 2026 के आदेश का हवाला देते हुए खनन से संबंधित कुछ मामलों का मुद्दा भी उठाया है।
पत्र के अनुसार, NGT ने खनन से जुड़े कुछ मामलों में SEIAA की अनुमति और सहमति के बिना की गई कार्रवाई को नियमों का उल्लंघन माना था। अध्यक्ष का आरोप है कि इस आदेश के अनुपालन के लिए उनकी ओर से कई बार पत्र लिखे गए, लेकिन संबंधित मामलों को SEIAA के समक्ष विचार के लिए एजेंडे में शामिल नहीं किया गया।
चौहान ने सवाल उठाया है कि जब किसी मामले में NGT के आदेश का पालन करना जरूरी है, तो उससे संबंधित प्रकरणों को प्राधिकरण के समक्ष विचार के लिए क्यों नहीं रखा गया।

शिकायत में सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक मामले का भी उल्लेख है। अध्यक्ष के मुताबिक, इस मामले में केंद्र सरकार की ओर से दाखिल जवाब के संदर्भ में भी आवश्यक प्रकरणों को एजेंडे में शामिल नहीं किए जाने की बात सामने आई है।
हालांकि, उपलब्ध शिकायत के विवरण में सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामले की पहचान और उससे जुड़े प्रकरणों का पूरा ब्योरा नहीं दिया गया है।
पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद EC लेटर जारी करने में देरी
अध्यक्ष ने पर्यावरण मंजूरी (Environmental Clearance-EC) मिलने के बाद संबंधित मंजूरी पत्र जारी करने में देरी का मुद्दा भी उठाया है।
उनके मुताबिक, कई मामलों में मंजूरी दिए जाने के बावजूद आवेदकों को EC लेटर समय पर नहीं मिलते। इससे पर्यावरण मंजूरी के लिए आवेदन करने वालों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ता है।
अध्यक्ष ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की जरूरत जताई है। उनका कहना है कि पर्यावरण मंजूरी से जुड़े मामलों में कथित अनियमितताओं की जांच कर जिम्मेदारी तय की जानी चाहिए।
हालांकि, कितने मामलों में EC लेटर जारी करने में देरी हुई और देरी की वास्तविक वजह क्या रही, इसका विस्तृत आंकड़ा उपलब्ध जानकारी में नहीं दिया गया है।
पांच कार्यदिवस में बैठक की कार्यवाही अपलोड नहीं करने का आरोप
अध्यक्ष ने SEIAA की बैठकों की कार्यवाही का विवरण यानी मिनट्स ऑफ मीटिंग (MoM) समय पर परिवेश पोर्टल पर अपलोड नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए हैं।
पत्र के अनुसार, बैठकों की कार्यवाही का विवरण निर्धारित पांच कार्यदिवस की समयसीमा के भीतर पोर्टल पर अपलोड किया जाना चाहिए। अध्यक्ष ने कुछ बैठकों की कार्यवाही देर से अपलोड किए जाने के उदाहरण देते हुए इसे प्रक्रिया संबंधी गंभीर लापरवाही बताया है।
बैठकों की कार्यवाही में प्राधिकरण के निर्णयों और संबंधित मामलों पर हुई चर्चा का विवरण दर्ज होता है। इसे निर्धारित समयसीमा में अपलोड नहीं करने से निर्णयों की जानकारी उपलब्ध कराने और आगे की प्रक्रिया में देरी होने की आशंका रहती है।
चौहान ने अपनी शिकायत में इस मुद्दे को भी प्राधिकरण के कामकाज से जुड़ी कथित अनियमितताओं में शामिल किया है।
237 पर्यावरण मंजूरियों पर भी सवाल, तीन वरिष्ठ अधिकारियों के निलंबन की मांग
इस विवाद के पीछे पर्यावरण मंजूरी से जुड़े 237 मामलों का मुद्दा भी है। SEIAA अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने 16 अक्टूबर को मुख्य सचिव को लिखे एक अन्य पत्र में आरोप लगाया कि तत्कालीन सदस्य सचिव और पर्यावरण विभाग के तत्कालीन प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी के माध्यम से 237 ‘डीम्ड EC’ जारी की गईं। उनका दावा है कि नियमों में इस तरह मंजूरी देने का प्रावधान नहीं है।
डीम्ड EC का मतलब ऐसी पर्यावरण मंजूरी से है, जिसे निर्धारित समय में निर्णय नहीं होने पर स्वीकृत मान लिया जाए। चौहान का कहना है कि पर्यावरण मंजूरी देने का अधिकार केंद्र सरकार और SEIAA को है। उन्होंने इन 237 मामलों की समीक्षा कराने और कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की है।
इस शिकायत में हर्षल पंचोली के अलावा पर्यावरण विभाग के अपर मुख्य सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी, प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी और तत्कालीन सदस्य सचिव उमा महेश्वरी की भूमिका पर भी सवाल उठाए गए हैं। अध्यक्ष ने संबंधित अधिकारियों के निलंबन, अनुशासनात्मक कार्रवाई, आपराधिक मामले दर्ज करने और पूरे प्रकरण की CBI जांच कराने की मांग की है।
ये सभी आरोप हैं। इनकी स्वतंत्र पुष्टि और संबंधित अधिकारियों का पक्ष सामने आना बाकी है।
तीन महीने से पोर्टल बंद, अध्यक्ष के कमरे का इंटरनेट भी काटने का आरोप
शिकायत में SEIAA के कामकाज और कार्यालयीन व्यवस्थाओं को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए गए हैं। चौहान का दावा है कि उनके कक्ष का इंटरनेट कनेक्शन बंद कर दिया गया और प्राधिकरण का पोर्टल करीब तीन महीने से बंद है। इससे प्राधिकरण के कामकाज पर असर पड़ने की बात कही गई है।
अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कार्यालय के कर्मचारियों को बार-बार बदला गया। उनके मुताबिक, एक साल में 20 से अधिक बार कर्मचारियों की अदला-बदली की गई। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कामकाज की जानकारी रखने वाले कर्मचारियों को हटाकर ऐसे लोगों को तैनात किया गया, जो संबंधित काम करने में सक्षम नहीं हैं। कुछ कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने पर भी उन्होंने आपत्ति जताई है।
निजी सहायक की नियुक्ति से लेकर कर्मचारियों को हटाने पर सवाल
चौहान ने अपने निजी सहायक के रूप में पुस्तकालय सहायक रजनीश कुमार की तैनाती पर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि संबंधित कर्मचारी को टाइपिंग नहीं आती और उसने खुद इस बात को स्वीकार किया है।
अध्यक्ष ने वकील नाम के एक कर्मचारी को सेवक के रूप में तैनात किए जाने पर भी आपत्ति जताई। शिकायत में कहा गया है कि संबंधित कर्मचारी कैंसर से पीड़ित है और ठीक से चलने में असमर्थ है। चौहान ने इन नियुक्तियों को कार्यालयीन व्यवस्था से जुड़ी अनियमितताओं के रूप में पेश किया है। ये दावे अध्यक्ष की शिकायत पर आधारित हैं।
उन्होंने केंद्र सरकार की ओर से तैनात अश्विनी कुमार की सेवा समाप्त कराने की कोशिश का आरोप भी लगाया है। चौहान के मुताबिक, अपर मुख्य सचिव अनिरुद्ध मुखर्जी ने अश्विनी कुमार को हटाने के लिए केंद्र सरकार के सचिव को पत्र लिखा और बार-बार फोन भी किए।
शिकायत में कार्यालय सहायक पूनम झा को सेवा समाप्ति का नोटिस दिए जाने का भी उल्लेख है। अध्यक्ष ने इन घटनाओं को प्राधिकरण के कामकाज में कथित हस्तक्षेप से जोड़ते हुए जांच की मांग की है।
बैठकें टालने और मंजूरी के बाद भी पत्र रोकने का आरोप
चौहान ने आरोप लगाया है कि SEIAA की बैठकें नियमित रूप से नहीं कराई जातीं। बैठकों की तारीख और समय बार-बार बदले जाते हैं। इसके साथ ही, बैठकों की कार्यवाही का विवरण तैयार करने और उसे पोर्टल पर अपलोड करने में भी देरी होती है।
उनका आरोप है कि प्राधिकरण से पर्यावरण मंजूरी मिलने के बाद भी आवेदकों को EC लेटर जारी नहीं किए जाते। इससे मंजूरी मिलने और संबंधित पत्र मिलने के बीच अनावश्यक देरी होती है। अध्यक्ष ने इस मुद्दे को भी प्राधिकरण के कामकाज में कथित बाधा से जोड़ा है।
237 मंजूरियों का मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा
पर्यावरण मंजूरी से जुड़े 237 मामलों का विवाद सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच चुका है। इस मामले में केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय ने अदालत में दाखिल हलफनामे में कहा था कि नियमों में डीम्ड पर्यावरण मंजूरी देने का प्रावधान नहीं है। मंत्रालय ने यह भी कहा कि प्रत्येक मामले पर निर्धारित प्रक्रिया के अनुसार निर्णय SEIAA को लेना चाहिए।
मामले की पड़ताल के लिए एक तथ्य-जांच समिति ने भी जांच की थी। मंत्रालय ने सभी 237 मामलों की अलग-अलग समीक्षा कर निर्णय लेने की सलाह दी थी। हालांकि, मंत्रालय के हलफनामे को इन सभी मंजूरियों के अवैध होने का अंतिम न्यायिक फैसला नहीं माना जा सकता।
इन मंजूरियों से जुड़े मामलों में उस समय पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिव नवनीत मोहन कोठारी, SEIAA की तत्कालीन सदस्य सचिव उमा महेश्वरी और कार्यवाहक सदस्य सचिव श्रीमन शुक्ला की भूमिका का भी उल्लेख सामने आया है। वहीं, मौजूदा विवाद में अध्यक्ष ने हर्षल पंचोली और अनिरुद्ध मुखर्जी की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। अलग-अलग समय के अधिकारियों की भूमिका और जिम्मेदारी का निर्धारण जांच तथा संबंधित दस्तावेजों के आधार पर ही किया जा सकता है।
मुख्य सचिव से कार्रवाई और CBI जांच की मांग
SEIAA अध्यक्ष ने मुख्य सचिव को भेजे पत्र में अनिरुद्ध मुखर्जी, हर्षल पंचोली, नवनीत मोहन कोठारी और तत्कालीन सदस्य सचिव उमा महेश्वरी के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निलंबित करने, अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने और आपराधिक मामले दर्ज कराने का अनुरोध किया है। साथ ही, पूरे मामले से जुड़े कामकाज और अभिलेखों की CBI जांच कराने की मांग भी की गई है।
पत्र की प्रतियां केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव और SEIAA की सदस्य डॉ. सुनीता सिंह को भी भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि मुख्य सचिव और राज्य सरकार इन आरोपों पर क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल हर्षल पंचोली के निलंबन की मांग की गई है, लेकिन उनके खिलाफ निलंबन का आदेश जारी होने की पुष्टि उपलब्ध जानकारी में नहीं है। आरोपों पर संबंधित अधिकारियों का पक्ष और शासन के अंतिम निर्णय का इंतजार है।
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