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MP में ‘खड़े हनुमान मंदिर’ का चमत्कार : 10 दिन तक JCB और क्रेन से प्रतिमा हिला तक नहीं सका प्रशासन, 1000 साल पुरानी मूर्ति में मिली इंटरलॉक तकनीक!
Wed, Sep 9, 2026
धार्मिक नगरी उज्जैन में आगामी सिंहस्थ के मद्देनजर कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक करीब 15 मीटर सड़क चौड़ीकरण का काम चल रहा है। इसी दायरे में आने वाले प्रसिद्ध 'खड़े हनुमान मंदिर' के ढांचे को तो हटा दिया गया, लेकिन इसके बाद जो हुआ उसने प्रशासन को अचंभित और भक्तों को भक्तिभाव से सराबोर कर दिया है।
नगर निगम और प्रशासन की क्रेन व जेसीबी मशीनें लगातार 10 दिनों की मशक्कत के बावजूद हनुमान जी की प्रतिमा को अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिला सकीं। कटर चलाने और भारी बल प्रयोग के विरोध में भक्त व पुजारी खड़े हो गए, जिसके बाद आखिरकार नगर निगम को हाथ पीछे खींचकर IIT इंदौर की वैज्ञानिक टीम और विशेषज्ञों की मदद लेनी पड़ी है।
IIT इंदौर ने स्पेशल इक्विपमेंट से की स्कैनिंग: रिपोर्ट के बाद फैसला
मंगलवार को नगर निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा के निर्देश पर IIT इंदौर की एक्सपर्ट टीम उज्जैन पहुंची। टीम ने विशेष वैज्ञानिक उपकरणों और स्कैनर के जरिए करीब दो घंटे तक प्रतिमा की गहराई, नीचे के ढांचे और आसपास की जमीन की बारीकी से जांच की।
निगम कमिश्नर अभिलाष मिश्रा ने बताया कि मंदिर के पुजारी और श्रद्धालुओं के आग्रह पर IIT की टीम बुलाई गई है। टीम की विस्तृत रिपोर्ट मिलने के बाद ही यह तय होगा कि प्रतिमा को बिना किसी नुकसान के सुरक्षित तरीके से विस्थापित करना संभव है या नहीं।
पुरातत्व एक्सपर्ट्स का दावा: राजा भोज के दौर की 1000 साल पुरानी हो सकती है प्रतिमा
विक्रम विश्वविद्यालय उज्जैन के पुरातत्व विशेषज्ञ प्रो. डॉ. रमण सोलंकी ने इस प्रतिमा को ऐतिहासिक धरोहर बताया है।
इंटरलॉक तकनीक (Interlock Technique):
प्राचीन काल में विशाल प्रतिमाओं को जमीन के भीतर इंटरलॉक तकनीक से स्थापित किया जाता था, ताकि वे सदियों तक अडिग रहें। खड़े हनुमान जी की प्रतिमा में भी यही तकनीक इस्तेमाल होने की पूरी संभावना है।
परमार कालीन बेसाल्ट पत्थर:
यह प्रतिमा मालवा क्षेत्र में मिलने वाले अति-मजबूत 'बेसाल्ट पत्थर' से बनी है। परमार वंश और राजा भोज के समय ऐसे पत्थरों पर तराशकर कलाकृतियां बनाई जाती थीं। वर्षों से चढ़ रहे सिन्दूर के चोले के कारण इसकी मूल बनावट ढकी हुई है।
'उज्जैन का एम्स' और 'डॉक्टर हनुमान' क्यों कहते हैं भक्त?
स्थानीय श्रद्धालुओं, पुजारियों और सर्वसमाज में इस मंदिर की अटूट आस्था है। लोग इस मंदिर को 'उज्जैन का एम्स' और प्रतिमा को 'डॉक्टर हनुमान' के नाम से पुकारते हैं।
झाड़नी और ताबीज से इलाज का दावा:
पुजारी महेश बैरागी के मुताबिक, यहां बरसों से गंभीर बीमार बच्चों को झाड़नी दी जाती है और काला ताबीज बांधा जाता है। उन्होंने बताया कि दिल्ली में लिवर ट्रांसप्लांट के लिए ले जाए जा रहे एक बच्चे की तबीयत बार-बार बिगड़ रही थी, लेकिन मंदिर से ताबीज बंधवाने के बाद वह सुरक्षित दिल्ली पहुंचा और उसका सफल ऑपरेशन हुआ।
मुस्लिम परिवार भी मांगते हैं मन्नत:
भक्त शिवेंद्र तिवारी ने बताया कि इस मंदिर में न सिर्फ हिंदू, बल्कि मुस्लिम समाज के लोग भी निसंतानता और बीमारियों से मुक्ति पाने के लिए मन्नत मांगने आते हैं।
रामलला की तरह टेंट में विराजे बजरंगबली
मंदिर का ऊपरी पक्का ढांचा तोड़े जाने के बाद प्रशासन ने प्रतिमा की सुरक्षा और धूप-बारिश से बचाव के लिए उसके ऊपर केनोपी यानी टेंट लगा दिया है। भक्त इसे अयोध्या के राम मंदिर से जोड़कर देख रहे हैं।
भक्तों का कहना है कि जैसे एक समय भगवान श्रीराम को अयोध्या में टेंट में रहना पड़ा था, ठीक वैसे ही आज खड़े हनुमान भी टेंट के नीचे विराजित होकर भक्तों को दर्शन दे रहे हैं। पुजारी और हिंदू संगठनों ने स्पष्ट किया है कि वे विकास के खिलाफ नहीं हैं, लेकिन प्रतिमा की सुरक्षा और गरिमा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।