इस मेले की खासियत यह है कि इसकी शुरुआत मुगल शासक औरंगजेब ने कराई थी। सतना जिले की चित्रकूट नगर पंचायत इस मेले का आयोजन करती है। इस बार इस मेले में मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश ही नहीं बल्कि बिहार, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से भी व्यापारी पहुंचे हैं। पांच हजार से अधिक गधे और खच्चर बेचने के लिए मेले में आए हैं। मजे की बात तो यह है कि गधे को खरीदने-बेचने वालों से ज्यादा भीड़ इस मेले को देखने वालों की है।
: MP News: सतना में लगा गधों का मेला, सलमान बिका एक लाख में, शाहरुख के मिले 90 हजार
News Desk / Tue, Oct 25, 2022
नाम बनाते हैं इन गधों को खास
मुगल सेनाओं में गधों और खच्चरों का महत्वपूर्ण योगदान रहता था। चित्रकूट के मेले से ही औरंगजेब ने अपनी सेना के लिए गधे-खच्चर मंगवाए थे। इससे इसका महत्व बढ़ जाता है। कई व्यापारी अपने गधों के नाम फिल्मी सितारों के नाम पर रखते हैं और यही पहचान उन्हें आम से खास बना देती है। इस मेले में उन्नत किस्म के गधे और खच्चर बिकने के लिए आते हैं।
हर गधे की लगती है एंट्री फीस
गधों के मेले में गधा बेचने के लिए एंट्री फीस भी चुकानी होती है। चित्रकूट नगर पंचायत प्रत्येक गधे के लिए 300 रुपये की एंट्री फीस वसूलती है। इसी तरह एक खूंटे के लिए 30 रुपये चुकाने होते हैं। इसके बाद गधों के लिए बोलियां लगती हैं और गधे की नस्ल और सेहत को देखकर कीमत तय की जाती है। औसतन तीन से चार हजार गधे हर साल इस मेले में बिक जाते हैं।
Source link
Tags :
विज्ञापन
विज्ञापन
जरूरी खबरें
विज्ञापन