छत्तीसगढ़ में पहली बार सांप की इतनी बड़ी सर्जरी : अजगर के मुंह से निकाला 200 ग्राम का ट्यूमर, अंबिकापुर से 250 KM दूर बिलासपुर लाकर बचाई जान, ड्रिप पर रखा गया
छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में वाइल्डलाइफ ट्रीटमेंट के क्षेत्र में एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। यहां के कानन पेंडारी में वेटरनरी डॉक्टरों की टीम ने एक इंडियन रॉक पाइथन (अजगर) के मुंह से 200 ग्राम का ट्यूमर (गांठ) सफलतापूर्वक बाहर निकाला है। करीब 2 घंटे से ज्यादा समय तक चली इस जटिल सर्जरी के बाद डॉक्टरों ने अजगर की जान बचा ली।
अगर समय पर यह ट्यूमर नहीं निकाला जाता, तो अजगर को कैंसर होने का खतरा था। ऑपरेशन के बाद अजगर को ड्रिप लगाकर विशेष निगरानी में रखा गया है।

अंबिकापुर से 250 किलोमीटर का सफर तय कर लाए बिलासपुर
दरअसल, अंबिकापुर के जाने-माने स्नेक रेस्क्यूअर सत्यम द्विवेदी को सरगुजा के जंगल से इस अजगर का कॉल आया था। जब उन्होंने करीब 8.5 किलो वजनी इस अजगर का रेस्क्यू किया, तो उनकी नजर उसके गले के पास आई सूजन पर पड़ी। अजगर के मुंह का आकार असामान्य रूप से बढ़ा हुआ था।
सत्यम ने तुरंत वेटरनरी डॉक्टरों से संपर्क कर जांच कराई, जिसमें ट्यूमर होने की पुष्टि हुई। इसके बाद 12 अक्टूबर को सत्यम अजगर को सुरक्षित बक्से में रखकर 250 किलोमीटर का सफर तय करते हुए अंबिकापुर से बिलासपुर पहुंचे।
कानन पेंडारी में डॉक्टर पीयूष दुबे की टीम ने किया ऑपरेशन
बिलासपुर के कानन पेंडारी में वरिष्ठ वेटरनरी डॉक्टर पीयूष दुबे और उनकी टीम ने इस 8.5 किलो के अजगर की सर्जरी शुरू की। रेप्टाइल्स (सरीसृपों) की सर्जरी में एनेस्थीसिया और कटिंग बेहद जोखिम भरी होती है, इसलिए डॉक्टरों को काफी सावधानी बरतनी पड़ी।

कैंसर में बदल सकती थी गांठ
डॉक्टरों के मुताबिक, अजगर के मुंह में मौजूद 200 ग्राम वजनी यह गांठ लगातार बढ़ रही थी। समय रहते अगर ट्यूमर नहीं निकाला जाता तो यह कैंसर का रूप ले लेती और अजगर की भूख-प्यास से तड़पकर मौत हो जाती।
ड्रिप लगाई गई, रिकवरी पर विशेष नजर
सफल ऑपरेशन के बाद डॉक्टरों ने अजगर को रिकवरी के लिए विशेष ऑब्जर्वेशन रूम में रखा है। उसे ड्रिप (ग्लूकोज/एंटीबायोटिक्स) लगाई गई है, ताकि सर्जरी के घाव जल्दी भर सकें और शरीर में ताकत बनी रहे। स्थिति सामान्य होने पर इसे वापस प्राकृतिक रहवास में छोड़ दिया जाएगा।
राज्य में किसी सांप की अपनी तरह की पहली सफल सर्जरी
वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ में किसी रेप्टाइल (सांप/अजगर) के मुंह से गांठ निकालने का यह पहला सफल ऑपरेशन है। समय पर रेस्क्यू और बिलासपुर तक सही इलाज मिलने की वजह से बेजुबान की जान बच सकी।
10 सालों में 10 हजार से ज्यादा सांपों का रेस्क्यू कर चुके हैं सत्यम
अंबिकापुर के स्नेकमैन सत्यम द्विवेदी पिछले 10 सालों से सांपों के संरक्षण और रेस्क्यू के काम में जुटे हुए हैं। वे अब तक 8 से 10 हजार से अधिक जहरीले और गैर-जहरीले सांपों का सुरक्षित रेस्क्यू कर उन्हें जंगलों में छोड़ चुके हैं। इस बार भी उनकी पैनी नजर और सही फैसले की वजह से अजगर को नया जीवन मिला है।
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