गंगा नदी में नाव पलटी, 13 बच्चों की मौत : बिहार में 25 से ज्यादा लोग सवार थे; छेद से भरने लगा पानी, 15 साल की चांदनी ने 2 बच्चों को बचाया
बिहार के वैशाली जिले में गंगा नदी में नाव पलटने से 13 बच्चों की मौत हो गई। हादसा मंगलवार रात करीब 8:30 बजे राघोपुर इलाके में हुआ। नाव में 25 से ज्यादा लोग सवार थे। सभी नदी पार कर एक तेरहवीं के भोज में शामिल होने जा रहे थे।
हादसे में मरने वाले बच्चों की उम्र 6 से 18 साल के बीच थी। मृतकों में एक ही परिवार की 7 बच्चियां शामिल हैं। हादसे के बाद गांव में मातम पसरा है। बच्चों के शव गांव पहुंचने पर परिजन बिलख पड़े।
हादसे में बचाए गए बच्चों ने बताया कि नाव में छेद था, जिससे पानी अंदर आने लगा। पानी बढ़ने के बाद नाव पलट गई। 15 साल की चांदनी ने दो बच्चों की जान बचाई। हादसे में घायल चार लोगों का पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (NMCH) में इलाज चल रहा है।
नाव में छेद होने से भरने लगा पानी
हादसे में बचाए गए बच्चे आदित्य कुमार ने बताया कि नाव में एक छोटा सा छेद था। इससे पानी अंदर आने लगा था। नाव डूबने लगी तो तेजी से पानी भरने लगा और आखिरकार नाव पलट गई।
आदित्य ने बताया कि जो लोग समय रहते नाव से बाहर नहीं निकल पाए, वे बच नहीं सके। उसने एक व्यक्ति के पैर पकड़ लिए। उस व्यक्ति ने उसे कंधे पर उठा लिया। इसके बाद एक दूसरे व्यक्ति ने पेड़ की मोटी टहनी पकड़ने के लिए दी। फिर वह उसे तैरकर किनारे ले आया।
एक अन्य बच्चे अश्विनी कुमार ने बताया कि नाव में उसके समेत 25 लोग सवार थे। उसके दादाजी ने उसे बचाया।
चिराग पासवान ने पीड़ित परिवारों से मुलाकात की
केंद्रीय मंत्री चिराग पासवान बुधवार सुबह मृतकों के परिजन से मिलने पहुंचे। वैशाली उनका संसदीय क्षेत्र है। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे बच्चों की मौत से पीड़ा और बढ़ जाती है।
चिराग पासवान ने कहा कि मृतकों को वापस नहीं लाया जा सकता, लेकिन जीवित बचे लोगों का सही इलाज और पीड़ित परिवारों की मदद जरूरी है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार से परिवारों को सहायता दिलाने का प्रयास करेंगे।
दोषियों पर कार्रवाई की मांग
भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने हादसे को दुखद बताया। उन्होंने कहा कि घटना के लिए जो भी दोषी पाए जाएंगे, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि जिसकी भी गलती होगी, उसे बख्शा नहीं जाएगा।
पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने भी हादसे में जान गंवाने वालों के परिवारों को उचित मुआवजा देने और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की।
अंतिम संस्कार को लेकर क्या बताया ग्रामीणों ने?
स्थानीय निवासी चंदन के मुताबिक, उनके समुदाय में शव को नदी में प्रवाहित करने की परंपरा है। उन्होंने बताया कि वे कबीर पंथ को मानते हैं और शवों को जलाने या दफनाने के बजाय नदी में प्रवाहित करते हैं।
ग्रामीणों के अनुसार, शवों को गंगा में प्रवाहित करने से पहले उन पर मिट्टी बांधी जाएगी, ताकि वे पानी की सतह पर न आएं। परिजन ने पोस्टमॉर्टम कराने से इनकार कर दिया है।
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