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: Jabalpur: जेल अधिकारियों ने नहीं दिया पारिश्रमिक, अपील पर नोटिस जारी

News Desk

News Desk / Wed, Nov 23, 2022

Jabalpur: जेल अधिकारियों ने नहीं दिया पारिश्रमिक, अपील पर नोटिस जारी

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court new - फोटो : istock

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आर्म्स एक्ट में सजा से दंडित अभियुक्त ने जेल अधिकारियों द्वारा पारिश्रमिक राशि नहीं दिए जाने के खिलाफ अपील दायर की है। अपील में कहा गया था कि न्यायालय ने उसे कठोर कारावास की सजा से दंडित किया था। जेल में निरुद्ध रहने के दौरान वह सिर्फ एक सप्ताह अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती था। एजीजे राजकुमार चौहान ने अपील की सुनवाई करते हुए जेल अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

बता दें कि ग्वारीघाट रोड निवासी अजीत सिंह आनंद की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उसे आर्म्स एक्ट में न्यायालय ने दो साल के कठोर कारावास की सजा से दंडित किया था। जिसके बाद वह लगभग ढाई माह जेल में निरुध्द रहा। हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर वह रिहा हुआ था। कठोर कारावास से दंडित बंदियों से जेल में काम करवाया जाता है और शासन द्वारा निर्धारित पारिश्रमिक दिया जाता है। 

जेल अधिकारी द्वारा पारिश्रमिक की राशि का गबन करने का आरोप लगाते हुए न्यायालय की शरण ली थी। प्रकरण की सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया गया था कि वह एक सप्ताह तक उपचार के लिए जेल अस्पताल में भर्ती था। न्यायालय ने 197 के तहत अभियोजन की अनुमति नहीं लेने के कारण उसका आवेदन खारिज कर दिया गया था। इसके खिलाफ उक्त अपील दायर की गई है। अपील में मांग की गई है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। अपील में तत्कालीन जेल अधिक्षक गोपाल ताम्रकार, उप जेल अधीक्षक आरके मिश्रा तथा मदन कमलेश को अनावेदक बनाया गया है।
 

विस्तार

आर्म्स एक्ट में सजा से दंडित अभियुक्त ने जेल अधिकारियों द्वारा पारिश्रमिक राशि नहीं दिए जाने के खिलाफ अपील दायर की है। अपील में कहा गया था कि न्यायालय ने उसे कठोर कारावास की सजा से दंडित किया था। जेल में निरुद्ध रहने के दौरान वह सिर्फ एक सप्ताह अस्पताल में उपचार के लिए भर्ती था। एजीजे राजकुमार चौहान ने अपील की सुनवाई करते हुए जेल अधिकारियों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

बता दें कि ग्वारीघाट रोड निवासी अजीत सिंह आनंद की तरफ से दायर याचिका में कहा गया था कि उसे आर्म्स एक्ट में न्यायालय ने दो साल के कठोर कारावास की सजा से दंडित किया था। जिसके बाद वह लगभग ढाई माह जेल में निरुध्द रहा। हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर वह रिहा हुआ था। कठोर कारावास से दंडित बंदियों से जेल में काम करवाया जाता है और शासन द्वारा निर्धारित पारिश्रमिक दिया जाता है। 

जेल अधिकारी द्वारा पारिश्रमिक की राशि का गबन करने का आरोप लगाते हुए न्यायालय की शरण ली थी। प्रकरण की सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया गया था कि वह एक सप्ताह तक उपचार के लिए जेल अस्पताल में भर्ती था। न्यायालय ने 197 के तहत अभियोजन की अनुमति नहीं लेने के कारण उसका आवेदन खारिज कर दिया गया था। इसके खिलाफ उक्त अपील दायर की गई है। अपील में मांग की गई है कि दोषी अधिकारियों के खिलाफ अपराधिक प्रकरण दर्ज किया जाए। अपील में तत्कालीन जेल अधिक्षक गोपाल ताम्रकार, उप जेल अधीक्षक आरके मिश्रा तथा मदन कमलेश को अनावेदक बनाया गया है।
 


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