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: MP News: जिला पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशी पर कलेक्टर द्वारा कराई FIR को चुनौती, हाईकोर्ट ने जिलाधीश को दिया नोटिस

News Desk

News Desk / Wed, Nov 23, 2022

MP News: जिला पंचायत अध्यक्ष प्रत्याशी पर कलेक्टर द्वारा कराई FIR को चुनौती, हाईकोर्ट ने जिलाधीश को दिया नोटिस

(सांकेतिक तस्वीर)

(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

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जिला पंचायत अध्यक्ष उमरिया की प्रत्याशी सावित्री धुर्वे की शिकायत के बाद वहां के कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव द्वारा दूसरे दिन स्वयं थाने जाकर एफआईआर दर्ज कराए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। जस्टिस डीके पालीवाल की एकलपीठ ने मामले में उमरिया पुलिस थाना व कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि यह मामला सावित्री धुर्वे की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि आवेदिका जिला पंचायत अध्यक्ष की प्रत्याशी थी तथा 29 जुलाई 2022 को अध्यक्ष के चुनाव में उन्हें तथा उनके प्रतिद्वंद्वी को 5-5 मत प्राप्त हुए थे। इसलिए परिणाम के लिए लॉटरी डाली गई। आरोप है कि कलेक्टर ने सत्तारूढ़ दल के नेता के दबाव में पक्षपात करते हुए पर्ची बदल दी। जिस पर याचिकाकर्ता ने तुरंत लिखित शिकायत प्रस्तुत की तथा कलेक्टर द्वारा याचिकाकर्ता के साथ अभ्रद व्यवहार किया गया। जिसकी शिकायत पुलिस में की गई। पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई ना करने पर लिखित शिकायत एसपी उमरिया के समक्ष की गई। 

उक्त जानकारी होने पर घटना के दूसरे दिन कलेक्टर ने व्यक्तिगत रूप से पुलिस थाना उमरिया में जाकर आवेदिका के खिलाफ  FIR दर्ज करा दी। जिसे निरस्त करने हाईकोर्ट की शरण ली गई है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि  कलेक्टर ने दुर्भावनावश अपने खिलाफ की जा रही कार्रवाई से बचने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आवेदिका के ऊपर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई है। क्योंकि चुनाव मामले में जिला निर्वाचन अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए जाना आवश्यक नहीं है। 

कोर्ट को बताया गया कि जिला निर्वाचन अधिकारी अपने किसी मातहत कर्मचारी को अधिकृत कर एफआईआर दर्ज करा सकता है अथवा मौके पर उपस्थित एसपी एवं थाना प्रभारी को निर्देश देकर एफआईआर दर्ज करा सकता है, किंतु कलेक्टर का एक दिन बाद व्यक्तिगत रूप से पुलिस थाने में जाना यह प्रमाणित करता है कि कलेक्टर ने दुर्भावनापूर्ण रिपोर्ट दर्ज कराई है। वह भी आवेदिका के रिपोर्ट दर्ज करने के बाद जो काउंटर मामले की श्रेणी में आता है। याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए तर्कों से सहमत होते हुए न्यायालय ने कलेक्टर को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा।
 

विस्तार

जिला पंचायत अध्यक्ष उमरिया की प्रत्याशी सावित्री धुर्वे की शिकायत के बाद वहां के कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव द्वारा दूसरे दिन स्वयं थाने जाकर एफआईआर दर्ज कराए जाने को हाईकोर्ट में चुनौती दी गई है। जस्टिस डीके पालीवाल की एकलपीठ ने मामले में उमरिया पुलिस थाना व कलेक्टर संजीव श्रीवास्तव को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं।

बता दें कि यह मामला सावित्री धुर्वे की ओर से दायर किया गया है। जिसमें कहा गया है कि आवेदिका जिला पंचायत अध्यक्ष की प्रत्याशी थी तथा 29 जुलाई 2022 को अध्यक्ष के चुनाव में उन्हें तथा उनके प्रतिद्वंद्वी को 5-5 मत प्राप्त हुए थे। इसलिए परिणाम के लिए लॉटरी डाली गई। आरोप है कि कलेक्टर ने सत्तारूढ़ दल के नेता के दबाव में पक्षपात करते हुए पर्ची बदल दी। जिस पर याचिकाकर्ता ने तुरंत लिखित शिकायत प्रस्तुत की तथा कलेक्टर द्वारा याचिकाकर्ता के साथ अभ्रद व्यवहार किया गया। जिसकी शिकायत पुलिस में की गई। पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई ना करने पर लिखित शिकायत एसपी उमरिया के समक्ष की गई। 

उक्त जानकारी होने पर घटना के दूसरे दिन कलेक्टर ने व्यक्तिगत रूप से पुलिस थाना उमरिया में जाकर आवेदिका के खिलाफ  FIR दर्ज करा दी। जिसे निरस्त करने हाईकोर्ट की शरण ली गई है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि  कलेक्टर ने दुर्भावनावश अपने खिलाफ की जा रही कार्रवाई से बचने के लिए अपने पद का दुरुपयोग करते हुए आवेदिका के ऊपर झूठी रिपोर्ट दर्ज कराई है। क्योंकि चुनाव मामले में जिला निर्वाचन अधिकारी को व्यक्तिगत रूप से पुलिस थाने में रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए जाना आवश्यक नहीं है। 

कोर्ट को बताया गया कि जिला निर्वाचन अधिकारी अपने किसी मातहत कर्मचारी को अधिकृत कर एफआईआर दर्ज करा सकता है अथवा मौके पर उपस्थित एसपी एवं थाना प्रभारी को निर्देश देकर एफआईआर दर्ज करा सकता है, किंतु कलेक्टर का एक दिन बाद व्यक्तिगत रूप से पुलिस थाने में जाना यह प्रमाणित करता है कि कलेक्टर ने दुर्भावनापूर्ण रिपोर्ट दर्ज कराई है। वह भी आवेदिका के रिपोर्ट दर्ज करने के बाद जो काउंटर मामले की श्रेणी में आता है। याचिकाकर्ता की ओर से दिए गए तर्कों से सहमत होते हुए न्यायालय ने कलेक्टर को नोटिस जारी कर चार सप्ताह में जवाब पेश करने के निर्देश दिए हैं। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता दिनेश उपाध्याय ने पक्ष रखा।

 

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