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: Indore MIC Meeting: हुकुमचंद मिल को लेकर महापौर परिषद का बड़ा फैसला, मजदूरों को पैसा देने की तैयारी

News Desk

News Desk / Thu, Nov 24, 2022

Indore MIC Meeting: हुकुमचंद मिल को लेकर महापौर परिषद का बड़ा फैसला, मजदूरों को पैसा देने की तैयारी

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इंदौर महापौर परिषद की दूसरी बैठक इस बार कई मायनों में खास रही। इस बार की बैठक में हुकुमचंद मिल मज़दूरों को उनका हक मिलने की उम्मीद बंधी है। बैठक में साढ़े तीन सौ करोड़ के विकास कार्यों को मंज़ूरी मिली है। 

बता दें कि शुक्रवार को नगर निगम में महापौर परिषद की दूसरी बैठक हुई। इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सबसे चर्चित फैसला हुकुमचंद मिल को लेकर लिया गया। निगम के माध्यम से स्पेशल एजेंसी बनाकर लंबे समय से रुका मजदूरों का पैसा देने की तैयारी की जाएगी। इस फैसले से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे मजदूरों को उम्मीद बंधी है। एमआईसी में प्रपोजल को मंजूरी मिल गई है। अब निगम कोर्ट के सामने प्रस्ताव रखेगी। 

बता दें कि इंदौर में 90 के दशक में हुकुमचंद मिल बंद कर दी गई थी। इससे कई मजदूरों का रोजगार छिन गया था और उनका पैसा फंस गया था। मामला मुंबई आर्बिटेटर में चला गया। कई बार मिल को बेचकर मजदूरों को पैसा देने की बात भी सामने आई पर कोई खरीदार सामने नहीं आ सका। बीते विधानसभा चुनाव में भी मामला उठा था तब सीएम के हस्तक्षेप के बाद इंदौर नगर निगम ने कुछ पैसा मजदूरों को दिया था। 

इसके अलावा महापौर परिषद की बैठक में गरीब हित में अन्य फैसले भी लिए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1032 EWS हितग्राहियों को वन बीएचके के आवास की रजिस्ट्री में मिलेगी। पांच करोड़ से अधिक की स्टाम्प ड्यूटी की छूट देने का निर्णय भी लिया गया। यशवंत सागर जल ग्रहण क्षमता बढ़ाए जाने से डूब प्रभावित कृषि भूमि के फसल मुआवज़े के तीन वर्षों की 2 करोड़ 75 लाख 86 हज़ार 167 रुपये मंज़ूर किए गए। बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, परिषद सदस्य मुन्ना लाल यादव, राजेंद्र राठौड़, मनीष शर्मा आदि मौजूद थे।

विस्तार

इंदौर महापौर परिषद की दूसरी बैठक इस बार कई मायनों में खास रही। इस बार की बैठक में हुकुमचंद मिल मज़दूरों को उनका हक मिलने की उम्मीद बंधी है। बैठक में साढ़े तीन सौ करोड़ के विकास कार्यों को मंज़ूरी मिली है। 

बता दें कि शुक्रवार को नगर निगम में महापौर परिषद की दूसरी बैठक हुई। इसमें कई महत्वपूर्ण फैसले लिए गए। सबसे चर्चित फैसला हुकुमचंद मिल को लेकर लिया गया। निगम के माध्यम से स्पेशल एजेंसी बनाकर लंबे समय से रुका मजदूरों का पैसा देने की तैयारी की जाएगी। इस फैसले से अपने हक की लड़ाई लड़ रहे मजदूरों को उम्मीद बंधी है। एमआईसी में प्रपोजल को मंजूरी मिल गई है। अब निगम कोर्ट के सामने प्रस्ताव रखेगी। 

बता दें कि इंदौर में 90 के दशक में हुकुमचंद मिल बंद कर दी गई थी। इससे कई मजदूरों का रोजगार छिन गया था और उनका पैसा फंस गया था। मामला मुंबई आर्बिटेटर में चला गया। कई बार मिल को बेचकर मजदूरों को पैसा देने की बात भी सामने आई पर कोई खरीदार सामने नहीं आ सका। बीते विधानसभा चुनाव में भी मामला उठा था तब सीएम के हस्तक्षेप के बाद इंदौर नगर निगम ने कुछ पैसा मजदूरों को दिया था। 

इसके अलावा महापौर परिषद की बैठक में गरीब हित में अन्य फैसले भी लिए गए। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत 1032 EWS हितग्राहियों को वन बीएचके के आवास की रजिस्ट्री में मिलेगी। पांच करोड़ से अधिक की स्टाम्प ड्यूटी की छूट देने का निर्णय भी लिया गया। यशवंत सागर जल ग्रहण क्षमता बढ़ाए जाने से डूब प्रभावित कृषि भूमि के फसल मुआवज़े के तीन वर्षों की 2 करोड़ 75 लाख 86 हज़ार 167 रुपये मंज़ूर किए गए। बैठक में महापौर पुष्यमित्र भार्गव, परिषद सदस्य मुन्ना लाल यादव, राजेंद्र राठौड़, मनीष शर्मा आदि मौजूद थे।


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