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: Sehore: 70 साल के बूढ़े को 20 साल की कैद, जन्म से दृष्टिहीन 11 वर्षीय बच्ची से किया था रेप

News Desk / Sun, Nov 27, 2022


(सांकेतिक तस्वीर)

(सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : सोशल मीडिया

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मध्य प्रदेश के सीहोर कोर्ट ने 70 साल के बूढ़े को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। उसने जन्म से दृष्टिहीन बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया था। पॉक्सो मामले के विशेष न्यायाधीश ने छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। साथ ही पीड़िता को प्रतिकर के रूप में  एक लाख रुपये दिए जाने का आदेश दिया गया।  

जानकारी के अनुसार मामला पिछले साल नवंबर का है। अभियोजन के अनुसार एक नवंबर 2021 को 11 वर्षीय पीड़िता अपनी मां के साथ दादी के घर जा रही थी। तभी पड़ोस में रहने वाले 70 साल के घासीराम मालवीय ने उसे बुलाया। उसे घर में ले जाकर दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। बच्ची चुप रही। तीन दिसंबर 2021 को बच्ची की तबीयत जब ज्यादा खराब हुई तब मामले का खुलासा हुआ। हालांकि पीड़िता जन्म से दोनों आखों से देख नहीं पाती है तथा वह गांव वालों कों आवाज से पहचान लेती है। फरियादिया ने उक्त घटना की सूचना थाना आष्टा में दी, जिस पर से थाना आष्टा में अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया। 

मामला कोर्ट में पहुंचा। सभी पक्षों को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) आष्टा सुरेश कुमार चौबे ने फैसला सुनाया। मामले में कोर्ट ने विशेष लेख किया कि बालिका जन्म से दृष्टिहीन थी। आरोपी को पहचानने में असमर्थ थी। इस कारण कोर्ट में बालिका द्वारा आवाज से आरोपी की पहचान की गई थी। कोर्ट द्वारा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्य एवं विधिक आधारों पर की गई अंतिम बहस के तर्कों से सहमत होते हुए आरोपी घासीराम पिता सिद्धनाथ जिला सीहोर को दोषी करार दिया। 5 (एम)/6 पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष का सश्रम कारावास व 5000 रुपये अर्थदंड एवं धारा 506 (भाग-2) भादवि में एक वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। कोर्ट ने पीड़िता को प्रतिकर स्वरूप में एक लाख रुपये दिए जाने का आदेश दिया गया।  शासन की ओर से पैरवी अति. जिला अभियोजन अधिकारी देवेन्द्र सिंह ठाकुर एवं सहा. जिला अभियोजन अधिकारी महेन्द्र सितोले ने की। 
 

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मध्य प्रदेश के सीहोर कोर्ट ने 70 साल के बूढ़े को 20 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। उसने जन्म से दृष्टिहीन बच्ची को अपनी हवस का शिकार बनाया था। पॉक्सो मामले के विशेष न्यायाधीश ने छह हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। साथ ही पीड़िता को प्रतिकर के रूप में  एक लाख रुपये दिए जाने का आदेश दिया गया।  

जानकारी के अनुसार मामला पिछले साल नवंबर का है। अभियोजन के अनुसार एक नवंबर 2021 को 11 वर्षीय पीड़िता अपनी मां के साथ दादी के घर जा रही थी। तभी पड़ोस में रहने वाले 70 साल के घासीराम मालवीय ने उसे बुलाया। उसे घर में ले जाकर दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी। बच्ची चुप रही। तीन दिसंबर 2021 को बच्ची की तबीयत जब ज्यादा खराब हुई तब मामले का खुलासा हुआ। हालांकि पीड़िता जन्म से दोनों आखों से देख नहीं पाती है तथा वह गांव वालों कों आवाज से पहचान लेती है। फरियादिया ने उक्त घटना की सूचना थाना आष्टा में दी, जिस पर से थाना आष्टा में अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया। 

मामला कोर्ट में पहुंचा। सभी पक्षों को सुनने के बाद विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो एक्ट) आष्टा सुरेश कुमार चौबे ने फैसला सुनाया। मामले में कोर्ट ने विशेष लेख किया कि बालिका जन्म से दृष्टिहीन थी। आरोपी को पहचानने में असमर्थ थी। इस कारण कोर्ट में बालिका द्वारा आवाज से आरोपी की पहचान की गई थी। कोर्ट द्वारा अभियोजन द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजी साक्ष्य एवं विधिक आधारों पर की गई अंतिम बहस के तर्कों से सहमत होते हुए आरोपी घासीराम पिता सिद्धनाथ जिला सीहोर को दोषी करार दिया। 5 (एम)/6 पॉक्सो एक्ट में 20 वर्ष का सश्रम कारावास व 5000 रुपये अर्थदंड एवं धारा 506 (भाग-2) भादवि में एक वर्ष का सश्रम कारावास एवं 1000 रुपये अर्थदंड से दंडित किया। कोर्ट ने पीड़िता को प्रतिकर स्वरूप में एक लाख रुपये दिए जाने का आदेश दिया गया।  शासन की ओर से पैरवी अति. जिला अभियोजन अधिकारी देवेन्द्र सिंह ठाकुर एवं सहा. जिला अभियोजन अधिकारी महेन्द्र सितोले ने की। 
 


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