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छत्तीसगढ़ में ED की बड़ी सर्जिकल स्ट्राइक : DMF घोटाले को लेकर 5 जिलों में एक साथ रेड; कांग्रेस नेता और बड़े ठेकेदारों के ठिकानों पर दबिश, परिजनों के मोबाइल जब्त

छत्तीसगढ़ में भ्रष्टाचार और मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आज सुबह एक बार फिर बड़ी कार्रवाई की है। प्रदेश के बहुचर्चित डिस्ट्रिक्ट मिनरल फाउंडेशन (DMF) घोटाले से जुड़े मामलों को लेकर ईडी की टीमों ने राज्य के 5 अलग-अलग जिलों में एक साथ छापेमारी (रेड) की है।

इस कार्रवाई के दायरे में राजधानी रायपुर, दुर्ग, धमतरी, सरगुजा (अंबिकापुर) और महासमुंद जिले के कई रसूखदार कारोबारी, ठेकेदार और राजनीतिक चेहरे आए हैं। टीमों द्वारा दस्तावेजों, डिजिटल सबूतों और वित्तीय लेन-देन के रिकॉर्ड्स को खंगाला जा रहा है।

सरगुजा: पूर्व कांग्रेस जिलाध्यक्ष राकेश गुप्ता के फर्म 'मानसून एग्रो' पर छापा

मंगलवार सुबह ईडी की एक विंग सुरक्षा बलों के साथ सरगुजा जिला मुख्यालय अंबिकापुर पहुंची। यहाँ टीम ने कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष और कृषि विभाग के बड़े सप्लायर राकेश गुप्ता के फर्म 'मानसून एग्रो' पर दबिश दी।

सूत्रों के मुताबिक, पूर्ववर्ती भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल के दौरान राकेश गुप्ता की फर्म द्वारा कृषि विभाग और अन्य सरकारी विभागों में की गई करोड़ों रुपये की सप्लाई के रिकॉर्ड और डिजिटल डेटा की बारीकी से जांच की जा रही है।

धमतरी: ठेकेदार दीपेश गांधी के घर जांच, परिजनों के मोबाइल फोन जब्त

इधर, धमतरी जिले के कोतवाली थाना क्षेत्र के अंतर्गत आमापारा वार्ड स्थित बड़े ठेकेदार दीपेश गांधी के निवास पर भी सुबह-सुबह ईडी की गाड़ियां पहुंच गईं। केंद्रीय सुरक्षा बलों के घेरे के बीच 6 से अधिक अधिकारियों की टीम मकान के भीतर मौजूद है।

कार्रवाई के शुरुआती चरण में ही ईडी ने सुरक्षा के लिहाज से घर में मौजूद सभी परिवार वालों के मोबाइल फोन अपने कब्जे में ले लिए हैं, ताकि कोई बाहरी संपर्क न हो सके। दीपेश गांधी पेशे से ठेकेदार हैं, जो अलग-अलग बड़ी सरकारी और निजी परियोजनाओं में रसूखदारों के साथ मिलकर काम करते हैं। इसके अलावा राजधानी रायपुर के वल्लभ नगर में नामचीन कारोबारी शाश्वत लुणावत के आवास पर भी तलाशी अभियान जारी है।

क्या है DMF घोटाला, जिसमें हो रही है मनी लॉन्ड्रिंग की जांच?

दरअसल, यह पूरा मामला डिस्ट्रिक्ट माइनिंग फंड (DMF) में हुए अरबों रुपये के टेंडर घोटाले और उसमें हुई कमीशनखोरी से जुड़ा हुआ है। ईडी की प्राथमिक रिपोर्ट के आधार पर राज्य की आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (EOW) ने पहले ही धारा 120बी और 420 के तहत मामला दर्ज किया था।

जांच में सामने आया है कि कोरबा सहित छत्तीसगढ़ के कई आदिवासी व खनन प्रभावित जिलों में प्रभावित लोगों के विकास के लिए बने DMF ट्रस्ट के पैसों का दुरुपयोग किया गया। टेंडर आवंटन में बड़े पैमाने पर आर्थिक अनियमितताएं कर चुनिंदा ठेकेदारों को अवैध लाभ पहुंचाया गया।

25 से 40% तक वसूला गया था मोटा कमीशन

ईडी की अब तक की जांच में यह बेहद चौंकाने वाला तथ्य सामने आया है कि ठेकेदारों ने तत्कालीन बड़े अधिकारियों और रसूखदार राजनेताओं को कुल कॉन्ट्रैक्ट वैल्यू का 25% से लेकर 40% तक का भारी-भरकम कमीशन (रिश्वत) दिया था। ठेकेदारों और सप्लायर्स ने रिश्वत में दी गई इस ब्लैक मनी को छिपाने के लिए अपने अकाउंट्स बुक में इसे 'आवासीय' (Accommodation Entry) के रूप में दर्ज किया था।

जांच के दायरे में ये बिचौलिए और सिंडिकेट

ईडी के अनुसार, टेंडर प्रक्रिया को प्रभावित करने में संजय शिंदे, अशोक कुमार अग्रवाल, मुकेश कुमार अग्रवाल, ऋषभ सोनी के साथ-साथ मुख्य बिचौलिए मनोज कुमार द्विवेदी, रवि शर्मा, पियूष सोनी, पियूष साहू, अब्दुल और शेखर नामक सिंडिकेट के लोग शामिल थे, जिनकी कड़ियों को जोड़ते हुए आज यह राज्यव्यापी कार्रवाई की गई है।

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