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भगवान राम के घर करोड़ों की चोरी की सीक्रेट स्टोरी : चायवाला कैसे बना पावरफुल, करोड़ों की संपत्ति, गोबर में किसने गाड़ा कैश, CCTV फुटेज डिलीट; जानिए कितने किरदार ?

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case Insid Story: जहां लोग अपने पाप धोने आते हैं… अगर वहीं हिसाब में गड़बड़ी हो जाए तो सच कौन बताएगा? अयोध्या… श्रीराम की पावन जन्मभूमि… करोड़ों लोगों की आस्था का सबसे बड़ा केंद्र। हर दिन यहां लाखों श्रद्धालु आंखों में विश्वास और दिल में भक्ति लेकर दान करते हैं। लेकिन आज उसी आस्था के केंद्र के भीतर एक ऐसी कहानी सामने आई है, जिसने पूरे सिस्टम को कटघरे में खड़ा कर दिया है। दानपेटियों से लेकर बैंक तक पहुंचने वाले चढ़ावे की हर परत अब सवालों में है।

भगवान राम मंदिर में रखवालों की हरकतें भरोसे की नींव हिला रही हैं। करीब 7 करोड़ रुपए के चढ़ावे, गहनों और नकदी में हेराफेरी हुई है। अब तक 7 किरदार सामने आ चुके हैं। इनमें टिन्नू यादव का नाम भी है, जो ट्रस्ट की व्यवस्था का अहम हिस्सा बताया जा रहा है। 5 लोगों से 2 करोड़ मिले हैं। एक के घर 10 लाख रुपए गोबर में गड़े मिले।

चढ़ावे की सुरक्षा, गिनती, लॉकर से बैंक तक जमा और मैनपावर मैनेजमेंट तक जिसकी सीधी भूमिका बताई जाती है। CCTV डिलीट कांड और बिना रिकॉर्ड जेवरों की एंट्री ने को और भी रहस्यमय बना दिया है। अब सवाल ये है कि क्या ये सिर्फ चोरी है या सिस्टम के अंदर छुपा कोई बड़ा खेल? पढ़िए MPCGTIMES.COM की इनवेस्टिगेशन रिपोर्ट...

सरकार ने जांच के लिए SIT बना दी, अब तक 5 लोगों से 2 करोड़ रिकवर

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case Insid Story: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे से चोरी का मामला तूल पकड़ रहा है। सरकार ने जांच के लिए शनिवार को SIT बना दी, जो रविवार रात तक अयोध्या पहुंची। 5 दिन पहले ही केंद्र सरकार ने एक IPS अफसर को यहां भेजा था। उनकी देख-रेख में चढ़ावा चोरी मामले की गोपनीय जांच चल रही है। हालांकि, इसको लेकर अधिकारी अभी चुप्पी साधे हैं।

इधर, चढ़ावा चोरी में अब तक 5 लोगों (लवकुश, अवनीश, अनुकल्प, करुणे और रमाशंकर) के नाम सामने आए हैं। इनकी निशानदेही से अब तक 2 करोड़ रुपए की रिकवरी हुई है। ये सभी दान राशि की गिनती की ड्यूटी से जुड़े हैं। अब तक हुई रिकवरी भी इन्हीं पांच लोगों ने कराई है। लवकुश और अनुकल्प पुलिस हिरासत में हैं।

7 करोड़ रुपए की चोरी, घर में गोबर से 10 लाख रुपए बरामद

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case Insid Story: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के 7 करोड़ रुपए की चोरी के दावे का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। मंदिर के कर्मचारी लवकुश मिश्रा (27) के घर से 10 लाख रुपए बरामद हुए हैं। उसने रुपए गोबर में दबाकर छिपाए थे। इसके अलावा, कुछ पैसे बक्से में भी रखे थे।

हालांकि, ये रुपए किसके हैं, यह अभी पता नहीं चल पाया है। वहीं लवकुश के पिता ने भी रुपए मिलने की पुष्टि की है। लवकुश मंदिर में चढ़ावे की रकम गिनने का काम करता था। लवकुश की नौकरी उसके ससुर ने लगवाई थी। लवकुश का साला अनुकल्प मिश्रा पहले से मंदिर में नौकरी कर रहा था। अनुकल्प और लवकुश दोनों अभी पुलिस हिरासत में हैं।

सरकार ने SIT बनाई, इनमें 3 अफसरों को शामिल किया गया

SIT में लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत (IAS), किरन एस. (IPS, आईजी रेंज) और नीलरतन (विशेष सचिव, वित्त) को शामिल किया गया है। किरन एस. सीबीआई में डीआईजी रह चुके हैं। यानी वित्त, कानून के एक्सपर्ट को कमिश्नर लीड करेंगे।

विजय विश्वास पंत: IIT कानपुर से बी.टेक पास हैं। अभी लखनऊ के मंडलायुक्त हैं। SIT की अध्यक्षता करेंगे। चढ़ाव और दान की व्यवस्था को समझेंगे। बेहतर करने के सुझाव देंगे।

किरन एस.: अपराध की जांच का लंबा अनुभव है। चढ़ावा चोरी के आरोपों की तह तक जाएंगे। यानी, पुलिस के एंगल से जांच संभालेंगे।

नीलरतन: वित्त विभाग में विशेष सचिव हैं। यह मंदिर के ऑडिट, दान और वित्तीय लेन-देन का निरीक्षण करके रिपोर्ट तैयार करेंगे।

अब विस्तार से पढ़िए मंदिर में चढ़ावे की चोरी के किरदार और सीक्रेट कहानी

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case Insid Story: दरअसल, अयोध्या के श्रीराम मंदिर में चढ़ावे की चोरी के बाद देशभर में टिन्नू यादव सुर्खियों में है। अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के 7 करोड़ रुपए की चोरी के बारे में हर कोई जानना चाह रहा, लेकिन इस चोरी में कई किरदार सामने आ रहे हैं।

इनमें एक नाम टिन्नू यादव का भी, जिसने ऑटो चलाने से शुरूआत की और राम मंदिर से जुड़कर करोड़ों की संपत्ति बनाई। कहने को टिन्नू ट्रस्ट के महामंत्री चंपत राय के खास सहयोगी है, लेकिन श्रीराम मंदिर ट्रस्ट में वह बहुत पावरफुल बताया जाता है।

चाहे सिक्योरिटी का मैनेजमेंट हो या चढ़ावे को बैंक में डिपॉजिट कराना हो, टिन्नू ही सब कुछ मैनेज करता आया है। भले ही राम मंदिर ट्रस्ट ने अभी तक इस मामले में कोई FIR नहीं की है, लेकिन सरकार ने जांच के लिए SIT बना दी है।

पिता चाय बेचते थे, ड्राइवर टिन्नू कारसेवकपुरम आने लगा

विहिप से जुड़े एक पदाधिकारी बताते हैं- टिन्नू का पूरा नाम राम शंकर यादव है। उसके पिता अयोध्या के नया घाट पर चाय बेचा करते थे। टिन्नू की कहानी साल 1994-95 में शुरू हुई। तब वो अयोध्या की सड़कों पर टेंपो चलाता था। पिता के साथ चाय की दुकान भी चलाता था। अचानक श्रीराम जन्मभूमि मुक्ति यज्ञ समिति के मंत्री महेश नारायण के संपर्क में आया। उन्होंने अपनी कार चलाने के लिए टिन्नू को ड्राइवर रख लिया। अब वो महेश नारायण के साथ कारसेवकपुरम आने-जाने लगा।

महेश के निधन के बाद चंपत राय के लिए काम करने लगा

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case Insid Story: टिन्नू कारसेवकपुरम में लोगों से अच्छा व्यवहार रख रहा था। मेहनती था। साल 1991 में चंपत राय को क्षेत्रीय संगठन मंत्री बनाकर अयोध्या भेजा गया। 1996 में विश्व हिंदू परिषद के केंद्रीय मंत्री बनाए गए।

साल 1998 में टिन्नू यादव चंपत राय के संपर्क में आया। 31 मई, 2002 में महेश नारायण का निधन हो गया, तब चंपत राय की मदद से टिन्नू कारसेवकपुरम में अलग-अलग गाड़ियां चलाने लगा। जीप से लेकर मालवाहक वाहन तक। यहीं से वह चंपत राय के विश्वस्त लोगों में शामिल हो गया।

मंदिर निर्माण के दौरान ट्रस्ट से जुड़ा, फिर ताकत बढ़ती गई

2019 में श्रीराम मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने के बाद जब मंदिर निर्माण शुरू हुआ, तब टिन्नू ट्रस्ट की ओर से कामकाज संभालने लगा। ट्रस्ट ने उसे आंतरिक वेतनभोगी कार्यकर्ता के रूप में रखा था।

उसे हर महीने करीब 22 हजार रुपए से ज्यादा मिलते थे। हालांकि, वेतन से ज्यादा महत्वपूर्ण ओहदा उसे मंदिर परिसर में मिला हुआ है। मंदिर की सुरक्षा और प्रबंधन से जुड़े लोगों को वॉकी-टॉकी दे दिया गया। टिन्नू को भी वॉकी-टॉकी दिया गया।

पूर्व लेखा प्रभारी बोले- दान पेटियों का चढ़ावा टिन्नू ही बैंक में जमा कराता था

मंदिर परिसर में 14 दानपेटियां रखी गई हैं। रोजाना मंदिर में 1 करोड़ से ज्यादा का चढ़ावा आता है। इसके अलावा बड़ी मात्रा में सोने-चांदी और हीरे के जेवर भी भक्त दानपेटी में डालते हैं। इसमें आने वाले चढ़ावे की रकम को बंद कमरे में गिना जाता है। यह काम CCTV की निगरानी में ट्रस्ट के 6 पदाधिकारी, बैंक और TCS से जुड़े कुल 9 लोग करते हैं।

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case Insid Story: राम मंदिर ट्रस्ट के पूर्व लेखा प्रभारी महिपाल सिंह कहते हैं- गिनती के बाद यह रकम रामजन्मभूमि परिसर के लॉकर में रखी जाती थी। अगले दिन टिन्नू इस धनराशि को बैंक में जमा कराने लेकर जाता था। सबसे अहम यह था कि सोने-चांदी के जेवरों को तौले बिना सिर्फ अनुमान के आधार पर रखा जाता था।

महिपाल का दावा है- कि उन्होंने दान में आए जेवरों की फोटो खींचकर टिन्नू को चंपत राय को भेजते देखा था। इन जेवरों के बैंक में जमा होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है। जबकि टिन्नू का दावा है कि सारे जेवर समेत रुपए बैंक में जमा किए जाते रहे हैं।

पूर्व लेखा प्रभारी के आरोप- 8 महीने की CCTV डिलीट कराई

महिपाल सिंह बताते हैं- 2021 में जब मैं रामजन्मभूमि परिसर में रहता था, तब एक दिन नोट गिन रहे कर्मचारियों की हेरा-फेरी पकड़ ली गई। वे लोग 10 की जगह 12 गड्डी पैक कर रहे थे। तब मैंने चंपत राय से शिकायत की। दो लोगों की ड्यूटी और लगा दी गई। बाद में मुझे गिनती के काम से हटा दिया गया।

आरोप है कि कुछ दिन बाद टिन्नू एक प्राइवेट कर्मचारी के साथ आए और CCTV रिकॉर्डिंग डिलीट करा दी। ये करीब 8 महीने की रिकॉर्डिंग थी। इसके कुछ दिन बाद महिपाल ने नौकरी छोड़ दी। बताया जाता है कि पूरे कार्यकाल में महिपाल ने ट्रस्ट से कोई पारिश्रमिक (मेहनताना) नहीं लिया था।

राम मंदिर से सिर्फ 1.5 किमी दूर टिन्नू का पुश्तैनी घर

टिन्नू यादव का किरदार समझने के बाद हमने उससे बात का प्रयास किया। टिन्नू का पुश्तैनी घर तुलसी पार्क के पीछे स्वर्गद्वारी मोहल्ले में है। यह जगह राम मंदिर से सिर्फ 1.5 किमी दूर है।

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case Insid Story: सामने से यह घर करीब 7 फीट चौड़ा है। 3 मंजिला मकान में टिन्नू के भाई मिले। बातचीत में पता चला कि टिन्नू करीब 55 साल का है। उसकी 2 संतानों में से एक बेटी का 8 साल पहले निधन हो चुका है। इकलौता बेटा रवि यादव PWD में संविदा पर जॉब करता है।

Ayodhya Ram Mandir Donation Theft Case Insid Story: भाई से टिन्नू का मोबाइल नंबर मिला। फोन करने पर पता चला कि वह श्रीराम मंदिर परिसर के ट्रस्ट कार्यालय में है। उसने वहीं मिलने के लिए बुलाया।

टिन्नू के मकान में 14 कमरे, सब किराये पर उठे

इसके बाद हम टिन्नू के नए लग्जरी मकान की तलाश में नाका इलाके में पहुंचे। कोचिंग सेंटर के पास उसका नया 2 मंजिला मकान मिला, जो काफी शानदार दिख रहा था।

इस मकान के बाहर एक स्टूडेंट मिल गया। उसने बताया- इस मकान में ग्राउंड फ्लोर पर 9 कमरे हैं। पहली मंजिल पर 5 कमरे हैं। नीचे लड़के और ऊपर लड़कियां रहकर पढ़ाई करती हैं। हर कमरे का किराया 2700 रुपए लिया जाता है।

हमने कमरे के हिसाब से कैलकुलेट किया, तो करीब 37 हजार रुपए हर महीने किराया आ रहा था। यह मकान 1500 वर्गफीट जगह में बना हुआ है। ये मकान जिस लोकेशन पर बना था, वहां जमीन का रेट 2500-3000 रुपए प्रति वर्गफीट का है।

मोहल्ले के युवक बोले- मंदिर से जुड़ने के बाद तरक्की की

यहां रहने वाले लोगों ने बताया कि 5 महीने पहले इस मकान में टिन्नू ने अपने बेटे की भव्य शादी की थी। पूरे मोहल्ले और परिचितों को बुलाया। शादी में खूब खर्च किया था।

मोहल्ले के एक युवक ने बताया- टिन्नू चाचा जब से मंदिर से जुड़े, तब से काफी तरक्की कर ली है। उनका निषाद राज चौराहे के पास एक हॉस्टल भी है। चर्चा यह भी है कि बस्ती जिले के विक्रमजोत इलाके में इन्होंने 20 से 22 बीघा खेती की जमीन खरीद रखी है। लखनऊ में एक घर है, वहां पर स्कॉर्पियो रहती है। यहां रामजन्म भूमि परिसर में 3 गाड़ियां अनुबंध पर चलती हैं। उसका किराया आता है।

अब पढ़िए टिन्नू ने आरोपों को लेकर क्या-क्या कहा ?

सवाल- राम मंदिर की दानपेटियों में आने वाले चढ़ावे की चोरी के आरोप लग रहे?
टिन्नू- सिर्फ बदनाम करने के लिए कहानी बनाई जा रही है। अगर किसी के पास कोई साक्ष्य है तो पेश करे। दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा।

सवाल- आरोप है कि पिछले कुछ सालों में आपकी खुद की संपत्तियां करोड़ों रुपए की हो गईं?
टिन्नू- कोई सबूत भी देना चाहिए। सब कुछ ऑनलाइन है, आप देख लो। मेरा और मेरे बेटे का…।

सवाल- यह भी आरोप है कि बैंक के 2 कर्मचारियों को आपने अपॉइंट करवाया था?
टिन्नू-
ये गलत है।

सवाल- सब कहते हैं कि आप यहां पावरफुल हैं?
टिन्नू- नहीं, नहीं… यहां डॉ. अनिल हैं, चंपत राय हैं, गोपालजी हैं। वो इंचार्ज हैं। मैं कर्मचारी हूं। यहां किसी की नहीं, सिर्फ रामजी की चलती है।

सवाल- कहा गया कि आपने 8 महीने पहले CCTV डिलीट करवाए थे?
टिन्नू-
सब झूठ है। ऐसी किसी के पास पावर नहीं है। वो डॉ. अनिल और चंपत राय से पूछ लें। आप आइए, हम आपको फुटेज दिखाते हैं।

राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती की व्यवस्था जानिए…

राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती बैंक कर्मचारी ट्रस्ट के लोगों की मौजूदगी में करते हैं। यह काम सीसीटीवी की निगरानी में होता है।

दान की रकम को रजिस्टर पर चढ़ाया जाता है। फिर उसे राम मंदिर परिसर में ही बने लॉकर में रख दिया जाता है। अगले दिन रुपए बैंक में जमा कर दिए जाते हैं। ट्रस्ट का मुख्य खाता अयोध्या धाम के भारतीय स्टेट बैंक में है।

चढ़ावे की रकम के ऑडिट का पूरा काम टीसीएस (टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज) की निगरानी में किया जाता है। राम मंदिर में चढ़ावा कितना आता है। इसकी जानकारी ट्रस्ट की बैठक में ही दी जाती है। आखिरी बार दिसंबर 2025 में चढ़ावे की जानकारी दी गई थी।

मंदिर पर 2,475 करोड़ रुपए खर्च

13 दिसंबर, 2025 को मंदिर ट्रस्ट की बैठक में जानकारी सामने आई थी कि अब तक ट्रस्ट को कुल 4,575 करोड़ रुपए मिले हैं। पिछले 5 साल 9 महीने में मंदिर निर्माण, श्रीराम जन्मभूमि परिसर के विस्तार, जमीन और भवन की खरीद सहित अन्य कई कामों पर 2,475 करोड़ रुपए खर्च किए गए हैं। तब ट्रस्ट के पास लगभग 2100 करोड़ रुपए बचे थे।

राम मंदिर में रोजाना एक करोड़ रुपए से ज्यादा का दान

राम मंदिर में भगवान रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा 22 जनवरी, 2024 को हुई थी। बीते दो सालों में राम मंदिर की तस्वीर तेजी से बदली है। मंदिर की आय का मुख्य स्रोत दान और बैंक डिपॉजिट पर मिलने वाला ब्याज है।

ग्लोबल वेल्थ इंडेक्स-2026 की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंदिर की अचल संपत्तियों में लगभग 70 एकड़ का मुख्य परिसर और उसके आसपास की अधिग्रहित भूमि है। साथ ही निर्माणाधीन मंदिर की भव्य संरचना (जिसकी निर्माण लागत ही ₹1,800 करोड़ से अधिक है), इसकी कुल संपत्ति को ₹6,000 करोड़ से ₹8,000 करोड़ के पार ले जाती है।

सपा प्रमुख और पूर्व मंत्री ने चोरी का मुद्दा उठाया था

सपा सरकार में मंत्री रह चुके पवन पांडेय ने रविवार 7 जून को दावा किया था कि राम मंदिर से 5 से साढ़े 7 करोड़ रुपए तक की चोरी की गई। अखिलेश ने भी कहा था कि मामले पर सरकार की चुप्पी संदिग्ध है। कोर्ट को मामला देखना चाहिए। चंपत राय ने सफाई दी थी कि अभी तक ऐसी कोई भी बात सामने नहीं आई है।

विवाद बढ़ा तो भाजपा नेता डॉ. रजनीश सिंह ने 9 जून को प्रधानमंत्री को लेटर लिखकर CBI जांच की मांग की। अगले दिन यानी 10 जून को प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) ने मंदिर ट्रस्ट से मामले की रिपोर्ट मांग ली।

राम मंदिर में चढ़ावे की गिनती का सिस्टम और कमियां

राम मंदिर में आने वाले चढ़ावे की CCTV की निगरानी में रोजाना गिनती होती है।

कमी- आम श्रद्धालु इस गिनती को नहीं देख सकता। न ही CCTV फुटेज सार्वजनिक किए जाते हैं।

गिनती के बाद दान की रकम को रजिस्टर पर चढ़ाया जाता है। फिर उसे मंदिर परिसर में बने लॉकर में रख दिया जाता है। अगले दिन रुपए बैंक में जमा कराए जाते हैं।

कमी- मंदिर में कितना चढ़ावा आया, इसकी कोई आधिकारिक जानकारी नियमित रूप से सार्वजनिक नहीं की जाती।

राम मंदिर ट्रस्ट की समय-समय पर होने वाली बैठक में चढ़ावे की रकम की जानकारी दी जाती है। आखिरी बार दिसंबर, 2025 में हुई ट्रस्ट की बैठक में बताया गया था कि ट्रस्ट बनने से अब तक कुल ₹4575 करोड़ का दान मिला है।

कमी- इसके बाद जून, 2026 तक कितना चढ़ावा आया, यह किसी को पता नहीं है।

देश के अधिकतर बड़े मंदिरों में ऑडिट का काम अंदरूनी लोग या सरकार करती है। जैसे- शिरडी साईंबाबा मंदिर में चढ़ावे का महाराष्ट्र सरकार का 'लोकल फंड ऑडिट' विभाग करता है।

कमी- राम मंदिर में चढ़ावे की रकम के ऑडिट का पूरा काम प्राइवेट कंपनी TCS (टाटा कंसलटेंसी सर्विसेज) करती है.

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