Ujjain के Mahakal की हर Arti का रेट तय : महाकाल के श्रद्धालुओं का फूटा गुस्सा, कहा-हिंदू भक्तों से भेदभाव, सालाना 150 करोड़ की कमाई
MP CG Times / Sun, Mar 1, 2026
Ujjain Mahakal Arti Fee Protest | Controversy Hindu | Sandhya Shayan Aarti: उज्जैन के महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग में अब आप संध्या और शयन आरती में तभी शामिल हो सकेंगे, जब आपके पास 250 रुपए का पास होगा। मंदिर समिति ने भस्म आरती की तर्ज पर इन आरतियों के दर्शन की नई व्यवस्था शुरू की है। इससे समिति को रोजाना 6 लाख रुपए की अतिरिक्त आय होगी। यानी हर महीने 1.80 करोड़ और साल के 22 करोड़ अतिरिक्त मिलेंगे।
Ujjain Mahakal Arti Fee Protest | Controversy Hindu | Sandhya Shayan Aarti: हालांकि, इस फैसले पर भक्तों ने विरोध जताना शुरू कर दिया है। महाकाल में आस्था रखने वाले इसे 'तुगलकी फरमान' बता रहे हैं। मंदिर प्रशासन से न सिर्फ श्रद्धालु नाराज हैं, बल्कि खुद धर्मस्व मंत्री भी इसके खिलाफ खड़े हो गए हैं। प्रशासन का तर्क है कि भस्म आरती की तरह संध्या-शयन आरती की ब्रांडिंग कर भीड़ नियंत्रित की जाएगी।
आखिर क्या है पूरा विवाद, क्यों शयन आरती के पैसे ले रहे हैं और क्या इस विरोध के बाद फैसला वापस लिया जाएगा?

अभी ये हालात…श्रद्धालु नाराज, प्रशासन सख्त
मंदिर समिति का फैसला पूरी तरह प्रशासनिक आदेश है। इसमें किसी भी जनप्रतिनिधी, पंडित या भक्त मंडलों से बात नहीं की गई। ऐसे लोग जो पैसे देकर भस्म आरती नहीं कर पाते थे, वे निशुल्क शयन या संध्या आरती करते थे।
अब जिस दर्शनार्थी के पास 250 रुपए नहीं है तो वे चाहकर भी महाकाल की तीनों आरतियों में पूरे समय तक शामिल नहीं हो पाएंगे। फिलहाल उनके पास सिर्फ चलित दर्शन की व्यवस्था है। महाकाल मंदिर से जुड़े लोगों में मंदिर प्रशासन का डर साफ नजर आ रहा है। वे इस फैसले के खिलाफ तो हैं लेकिन डर के कारण बोल नहीं रहे।
Ujjain Mahakal Arti Fee Protest | Controversy Hindu | Sandhya Shayan Aarti: इन आरतियों की बुकिंग पूरी तरह ऑनलाइन है। मंदिर प्रशासन इस व्यवस्था को पारदर्शिता का नाम दे रहा है, लेकिन ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में असमर्थ लोगों के लिए कोई पुख्ता व्यवस्था नहीं है। सहायता के लिए मंदिर में हैल्प डेस्क लगाई गई है।
श्रद्धालु बोले- महाकाल राजा, प्रजा के बीच भेद कैसा
खरगोन निवासी इंजीनियर राजेंद्र पाटीदार वर्षों से महाकाल की संध्या और शयन आरती में शामिल होते रहे हैं। पाटीदार ने कहा, 250 रुपए शुल्क जमा करने वालों को मंदिर के नीचे हॉल में जगह मिली, लेकिन बाकी श्रद्धालुओं को ऊपरी हॉल और बाहरी प्रांगण से धक्के देकर बाहर निकाल दिया गया।
यह दृश्य अत्यंत दुखद है। भगवान के दरबार में राजा और प्रजा एक समान होने चाहिए, लेकिन यहां पैसे के आधार पर भक्ति का बंटवारा हो रहा है। महाकाल उज्जैन के राजा हैं, तो उनका नियम सभी प्रजा के लिए एक जैसा होना चाहिए।
भक्त मंडल अध्यक्ष ने कहा- लट्ठ खाकर भी दर्शन करेंगे
Ujjain Mahakal Arti Fee Protest | Controversy Hindu | Sandhya Shayan Aarti: महाकाल शयन आरती भक्त मंडल के अध्यक्ष महेंद्र कटियार ने कहा, पिछले 26 साल से हम शयन आरती में शामिल हो रहे हैं। शिवरात्रि के बाद बाबा महाकाल के विवाह का भव्य समारोह मना रहे हैं, लेकिन इस बार प्रशासन ने मन खराब कर दिया।
भस्म आरती पर शुल्क था, अब संध्या-शयन आरती में भी पैसे लेंगे, तो मंदिर जैसा क्या बचा? क्या दूसरे धर्मों में ऐसा होता है? हमारे मंदिरों में यह भेदभाव क्यों? अगर लट्ठ मारेंगे, तो लट्ठ खाकर भी अंदर दर्शन करने जाएंगे। इससे भक्तों पर असर पड़ेगा।

महाकाल के पुजारी बोले- हमसे परामर्श नहीं लिया
Ujjain Mahakal Arti Fee Protest | Controversy Hindu | Sandhya Shayan Aarti: महाकाल मंदिर के पुजारी पं. विनय शर्मा ने कहा, प्रशासन और मंदिर समिति ने शुल्क लगाने के निर्णय पर पुजारियों से कोई पूर्व परामर्श नहीं किया, क्योंकि वे खुद सक्षम हैं।
Ujjain Mahakal Arti Fee Protest | Controversy Hindu | Sandhya Shayan Aarti: नई व्यवस्था में 25% सीटें गरीब या बाहरी श्रद्धालुओं के लिए ऑफलाइन आरक्षित हों, जिनकी ऑनलाइन बुकिंग तकनीकी कारणों या जानकारी के अभाव में न बन पाए।
Ujjain Mahakal Arti Fee Protest | Controversy Hindu | Sandhya Shayan Aarti: तीर्थस्थल पर बार-बार आने वाले कम होते हैं, इसलिए उन्हें फ्री या मामूली शुल्क पर शांतिपूर्ण दर्शन मिलना चाहिए।
महाकाल एक लोटा जल से प्रसन्न, तो धन संग्रह क्यों- नेता प्रतिपक्ष
उज्जैन नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष रवि राय ने कहा, महाकाल तो इतने सरल हैं कि एक लोटा जल से प्रसन्न हो जाते हैं। दुर्भाग्य है कि उनके दरबार में आय के नए-नए साधन तलाशे जा रहे हैं। मंदिर समिति स्वीकार करती है कि दान-पेटी, सोना-चांदी से वार्षिक आय 170-180 करोड़ हो गई। फिर श्रद्धालुओं पर शुल्क क्यों?
हजारों कर्मचारियों का खर्च बढ़ा लिया, लेकिन आम भक्त मूलभूत सुविधाओं के लिए तरस रहा है। चिरौंजी-तिलक नि:शुल्क मिलता था, अब महंगे प्रसाद खरीदने पड़ते हैं। लड्डू-पेड़े से मुनाफा कमा रही समिति, 'नो प्रॉफिट-नो लॉस' का बहाना बना रही है। भीड़ नियंत्रण के लिए शुल्क वसूलने के बजाय वैज्ञानिक तरीके अपनाने चाहिए।
महापौर बोले- मैं समिति में हूं, लेकिन सहमति नहीं ली
उज्जैन नगर निगम के महापौर मुकेश टटवाल ने बताया, महाकाल मंदिर समिति के एक्ट के अनुसार उज्जैन महापौर समिति का पदेन सदस्य होता है और कलेक्टर अध्यक्ष हैं। इस शुल्क के निर्णय पर पदेन कार्यकारिणी की कोई बैठक नहीं हुई। न मुझे इस विषय में कोई जानकारी दी गई, न समिति में ऐसा कोई प्रस्ताव आया।
उन्होंने कहा, बाहर से आने वाले और स्थानीय लोग बिना तकलीफ के दर्शन कर पाएं, यह तो ठीक है, लेकिन निर्णय लेते समय मंदिर समिति ने मुझे किसी बैठक में नहीं बुलाया। मंदिर समिति की बैठक को काफी समय हो गया है। शिवरात्रि वाली बैठक का तो ध्यान भी नहीं, केवल एक बजट बैठक बुलाई गई थी।
आरती के अलावा भी मंदिर ट्रस्ट की आय के कई स्त्रोत
सामान्य दिनों में यहां 2 से 3 लाख श्रद्धालु रोज पहुंचते हैं। उज्जैन महाकाल मंदिर ट्रस्ट के अधीन संचालित होता है। इसके प्रबंधक उज्जैन कलेक्टर हैं। राज्य सरकार की तरफ से प्रशासक की नियुक्ति होती है। ट्रस्ट के पदाधिकारियों के मुताबिक मंदिर की आय श्रद्धालुओं के चढ़ावे से होती है।
Ujjain Mahakal Arti Fee Protest | Controversy Hindu | Sandhya Shayan Aarti: वे नकद के साथ सोना-चांदी भी चढ़ावे के रूप में देते हैं। इसके अलावा शीघ्र दर्शन, भस्म आरती बुकिंग, अभिषेक, अन्नक्षेत्र में दान, धर्मशाला बुकिंग, उज्जैन दर्शन बस सेवा, भांग एवं ध्वजा बुकिंग से भी मंदिर को आय होती है।
Ujjain Mahakal Arti Fee Protest | Controversy Hindu | Sandhya Shayan Aarti: पिछले साल महाकाल मंदिर ने 53.50 करोड़ रुपए के लड्डू प्रसाद की बिक्री की है। 2022-23 के मुकाबले 2023-24 में 39 करोड़ रुपए ज्यादा आय हुई है। 2025 का डेटा सार्वजनिक नहीं किया गया है।
कांग्रेस का हमला- सरकार धर्म को व्यापार बना रही
कांग्रेसी नेता और पूर्व कृषि मंत्री सचिन यादव ने कहा, यह हमारा दुर्भाग्य है कि एक तरफ भाजपा सनातन और हिंदू धर्म का राग अलापने का काम करती है, और दूसरी तरफ भक्तों को कष्ट देती है। भक्त अपने ईष्ट देवताओं की पूजा-अर्चना के लिए जाते हैं तो बड़ी कठिनाईयों से दर्शन कर पाते हैं। सरकार धर्म को व्यापार बनाने का काम कर रही है।
धर्मस्व मंत्री बोले- जल्द मिलेगी खुशखबरी
Ujjain Mahakal Arti Fee Protest | Controversy Hindu | Sandhya Shayan Aarti: मध्य प्रदेश के पर्यटन एवं धर्मस्व मंत्री धर्मेंद्र लोधी ने कहा, महाकाल मंदिर में शुल्क लगाने का निर्णय मेरे संज्ञान में लागू होने के बाद आया। मैं भी इस निर्णय से सहमत नहीं हूं। अभी प्रबंधन समिति से बात चल रही है। हमारी सरकार धर्म को आगे बढ़ाने वाली सरकार है। भक्तों को परेशान नहीं होने देंगे।
चलित दर्शन की व्यवस्था सुचारू रहेगी- महाकाल मंदिर प्रशासक
Ujjain Mahakal Arti Fee Protest | Controversy Hindu | Sandhya Shayan Aarti: मंदिर समिति के प्रशासक प्रथम कौशिक ने बताया, मंदिर के अंदर संध्या और शयन आरती के दौरान श्रद्धालु व्यवस्थित तौर पर दर्शन कर सकें, इसलिए निःशुल्क संध्या-शयन आरती की व्यवस्था के साथ-साथ एक अतिरिक्त सुविधा शुरू की गई है।
उन्होंने कहा, इसके तहत श्रद्धालु महाकाल मंदिर की आधिकारिक वेबसाइट पर पूर्व से ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कर सकेंगे, जिससे व्यवस्थित दर्शन संभव हो सकेगा। इस तरह निःशुल्क दर्शन करने वाले और पूर्व-रजिस्ट्रेशन वाले दोनों श्रद्धालु सुचारू रूप से आरती देख सकेंगे।

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