नवा रायपुर मंत्रालय कैंटीन में नई नीति लागू : अब नहीं मिलेगी सरकारी सब्सिडी, बाजार दर पर मिलेगा खाना, कर्मचारियों की निगाहें नई व्यवस्था पर
छत्तीसगढ़ के नवा रायपुर स्थित महानदी भवन मंत्रालय में कैंटीन व्यवस्था में हुए हालिया बदलाव ने कर्मचारियों के बीच व्यापक चर्चा छेड़ दी है। यह बदलाव मंत्रालय कर्मचारी संघ की मांग और चुनावी वादों के बाद लागू किया गया है, जिससे पुरानी सब्सिडी आधारित व्यवस्था समाप्त हो गई है।
पुरानी व्यवस्था में सब्सिडी और संचालन
अब तक मंत्रालय की कैंटीन का संचालन इंडियन कॉफी हाउस (ICH) के माध्यम से बिना निविदा प्रक्रिया के किया जा रहा था। इस व्यवस्था में राज्य सरकार द्वारा लगभग ₹12 लाख प्रतिमाह की सब्सिडी दी जाती थी, जो बिक्री आय से अलग थी। इसी वजह से कैंटीन में खाद्य पदार्थ बाजार दरों की तुलना में काफी सस्ते मिलते थे और कर्मचारियों को राहत मिलती थी।
कर्मचारी संघ की मांग और चुनावी वादा
मंत्रालय कर्मचारी संघ ने अपने चुनावी एजेंडे में कैंटीन व्यवस्था को पारदर्शी बनाने और सब्सिडी आधारित सिस्टम खत्म करने की मांग प्रमुखता से रखी थी। चुनाव के बाद संघ ने शासन के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई, जिसमें कैंटीन की गुणवत्ता, सेवा में देरी और सब्सिडी के औचित्य पर सवाल उठाए गए। इसके बाद शासन ने मामले की विस्तृत समीक्षा शुरू की।
प्रशासनिक प्रक्रिया और सब्सिडी पर रोक
प्रकरण की फाइल वित्त विभाग को भेजी गई, जहां कर्मचारी संघ की आपत्तियों को ध्यान में रखते हुए सब्सिडी समाप्त करने का निर्णय लिया गया। हालांकि, सेवा में बाधा न आए इसके लिए ICH को अस्थायी विस्तार दिया गया, लेकिन यह स्पष्ट कर दिया गया कि अब आगे कोई सरकारी सब्सिडी नहीं दी जाएगी।

नई व्यवस्था और टेंडर प्रक्रिया
सब्सिडी खत्म होने के बाद ICH ने बिना वित्तीय सहायता के संचालन जारी रखने में असमर्थता जताई। इसके बाद खुली निविदा प्रक्रिया शुरू की गई। शुरुआती चरण में पर्याप्त प्रतिस्पर्धा नहीं मिली, लेकिन बाद में एक एजेंसी का चयन कर नई व्यवस्था लागू की गई।
लागत आधारित मॉडल लागू
नई व्यवस्था के तहत अब कैंटीन पूरी तरह कॉस्ट-रिकवरी मॉडल पर चलेगी, जिसमें दरों का निर्धारण वास्तविक लागत के आधार पर किया जाएगा। यह बदलाव सीधे तौर पर कर्मचारी संघ की उस मांग का परिणाम है, जिसे उन्होंने अपने चुनावी घोषणा पत्र में शामिल किया था।
आगे की स्थिति पर नजर
अब सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि नई व्यवस्था मंत्रालय कर्मचारियों की अपेक्षाओं पर कितनी खरी उतरती है और क्या इससे सेवा की गुणवत्ता तथा लागत में संतुलन बना रहता है या नहीं।
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