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: मियां भोपाली के झोले-बतोले: आदिवासी इलाकों में फिर भगवा परचम!

News Desk / Fri, Sep 30, 2022


अमर उजाला ग्राफिक्स

अमर उजाला ग्राफिक्स - फोटो : अमर उजाला

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को खां, उधर कांगरेस में अध्यक्ष को लेके जमकर खींचतान मची हेगी, इधर एमपी में नगरीय निकाय चुनावों की मिनी सियासी जोर आजमाइश में भाजपा ने बाजी मार ली हेगी। नगरीय निकाय चुनाव पार्ट दो में 46 नगर पालिका ओर नगर परिषदों में से बीजेपी ने 28 पे अपना भगवा लहरा दिया हे तो कांगरेस सिरफ चार नगर पालिका जीत पाई। बंपर खेला तो पिरदेश कांगरेस अध्यक्ष कमलनाथ के घर छिंदवाड़ा में हुआ, जहां बीजेपी ने छह में से चार निकाय कांगरेस से छीन लिए। ये वोई इलाका हेगा, जहां मुखमंतरी शिवराजसिंह चोहान ने पब्लिक से अपील करी थी कि खां, इस बार कम से कम परिषद तो जिता दो। लगता हे पब्लिक ने मामा की अपील सुन ली।

मियां, मधपिरदेश में नगरीय निकाय चुनावों का पेला ओर बड़ा दोर तो जुलाई में हो गया था, जब भाजपा को कांगरेस के मुकाबिल झटके ज्यादा लगे थे। कई नगर निगम उसके हाथ से छिन गए थे। ओर तो ओर नई नवेली आप पार्टी ने सिंगरोली नगर निगम में दस्तक देके कमल निशान वालों को हेरान कर दिया था। अब दूसरे दोर में उन नगरीय निकायों में चुनाव हुए हेंगे, जहां कानूनी अड़चनों की वजह से उस वखत नई हो पाए थे।

इन चुनावों की अहमियत इसलिए भी थी कि इन 46 में से ज्यादातर नगर पालिकाएं ओर नगर परिषद पिरदेश के आदिवासी इलाकों में पड़ती हें। बीजेपी पूरी ताकत लगा रई हे के अगले विधानसभा चुनाव में एमपी की 47 आदिवासी सीटों में से ज्यादा से ज्यादा सीटें जीती जाएं ताकि पार्टी हुकूमत से चंद कदम दूर नई रे जाए। लिहाजा इन इलाकों में जमकर पिरचार हुआ। पिरचार कांगरेस ने भी करा मगर उसमें वो बात नई थी। इन 46 नगरीय निकायों में 17 नगर पालिका ओर 29 नगर परिषद हेंगी। इनमें से 17 नगर पालिका में से 11 पे बीजेपी जीती ओर चार पे कांगरेस को कामयाबी मिली। एक नगर पालिका बिजुरी में मामला टाई हो गया तो नेनपुर नगर पालिका में निर्दलीय ज्यादा जीत गए। उधर नगर परिषद में भी बीजेपी ने 29 में 18 में भगवा लहरा दिया। कांगरेस के खाते में सिरफ छह नगर परिषद आईं। सरई ओर बरगवां में आजाद उम्मीदवार ज्यादा जीत गए। वहां वोटर ने किसी भी पार्टी पर भरोसा नई जताया।

खां, सबसे दिलचस्प मामला रिया कमलनाथ के इलाके में। ये इलाका कांगरेस का गढ़ हेगा। बीजेपी हर लोकसभा चुनाव में यहां से मात खाती हे। इस दफे पार्टी ने पूरी ताकत लगा दी थी। यहां के ज्यादातर नगरीय निकाय कांगरेस के कब्जे में थे ओर वोटर भी ज्यादातर आदिवासी हेंगे। यहां बीजेपी ने 6 में से 4 निकाय कांग्रेस से छीन लिए। सौंसर में तो कांगरेस को एक भी सीट नई मिली।

मियां गोरतलब हे के बीजेपी ने कांगरेस से 5 नगर पालिका ओर 5 नगर परिषदें भी छीन लीं। उधर कांगरेस ने भी बीजेपी से 9 निकाय छीन लिए। 14 निकायों में भाजपा और 1 में कांगरेस दोबारा जीती।

इन चुनावो में वोटर ने झटके तो दोनो पार्टियों के आला नेताओं को दिए हेंगे। मसलन पिरदेश के वन मंतरी विजय शाह के गढ़ हरसूद में बीजेपी हार गई तो कांगरेस विधायक विजय लक्ष्मी साधो के महेश्वर में कांगरेस को पटखनी मिली। मियां, असल चिंता ये हेगी के आदिवासी इलाकों में बीजेपी ने अपना परचम फिर लहरा दिया हेगा। इसका असर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। ये चुनाव मिनी सेमीफाइनल रिया।

- बतोलेबाज 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें [email protected]।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।

विस्तार

को खां, उधर कांगरेस में अध्यक्ष को लेके जमकर खींचतान मची हेगी, इधर एमपी में नगरीय निकाय चुनावों की मिनी सियासी जोर आजमाइश में भाजपा ने बाजी मार ली हेगी। नगरीय निकाय चुनाव पार्ट दो में 46 नगर पालिका ओर नगर परिषदों में से बीजेपी ने 28 पे अपना भगवा लहरा दिया हे तो कांगरेस सिरफ चार नगर पालिका जीत पाई। बंपर खेला तो पिरदेश कांगरेस अध्यक्ष कमलनाथ के घर छिंदवाड़ा में हुआ, जहां बीजेपी ने छह में से चार निकाय कांगरेस से छीन लिए। ये वोई इलाका हेगा, जहां मुखमंतरी शिवराजसिंह चोहान ने पब्लिक से अपील करी थी कि खां, इस बार कम से कम परिषद तो जिता दो। लगता हे पब्लिक ने मामा की अपील सुन ली।

मियां, मधपिरदेश में नगरीय निकाय चुनावों का पेला ओर बड़ा दोर तो जुलाई में हो गया था, जब भाजपा को कांगरेस के मुकाबिल झटके ज्यादा लगे थे। कई नगर निगम उसके हाथ से छिन गए थे। ओर तो ओर नई नवेली आप पार्टी ने सिंगरोली नगर निगम में दस्तक देके कमल निशान वालों को हेरान कर दिया था। अब दूसरे दोर में उन नगरीय निकायों में चुनाव हुए हेंगे, जहां कानूनी अड़चनों की वजह से उस वखत नई हो पाए थे।

इन चुनावों की अहमियत इसलिए भी थी कि इन 46 में से ज्यादातर नगर पालिकाएं ओर नगर परिषद पिरदेश के आदिवासी इलाकों में पड़ती हें। बीजेपी पूरी ताकत लगा रई हे के अगले विधानसभा चुनाव में एमपी की 47 आदिवासी सीटों में से ज्यादा से ज्यादा सीटें जीती जाएं ताकि पार्टी हुकूमत से चंद कदम दूर नई रे जाए। लिहाजा इन इलाकों में जमकर पिरचार हुआ। पिरचार कांगरेस ने भी करा मगर उसमें वो बात नई थी। इन 46 नगरीय निकायों में 17 नगर पालिका ओर 29 नगर परिषद हेंगी। इनमें से 17 नगर पालिका में से 11 पे बीजेपी जीती ओर चार पे कांगरेस को कामयाबी मिली। एक नगर पालिका बिजुरी में मामला टाई हो गया तो नेनपुर नगर पालिका में निर्दलीय ज्यादा जीत गए। उधर नगर परिषद में भी बीजेपी ने 29 में 18 में भगवा लहरा दिया। कांगरेस के खाते में सिरफ छह नगर परिषद आईं। सरई ओर बरगवां में आजाद उम्मीदवार ज्यादा जीत गए। वहां वोटर ने किसी भी पार्टी पर भरोसा नई जताया।

खां, सबसे दिलचस्प मामला रिया कमलनाथ के इलाके में। ये इलाका कांगरेस का गढ़ हेगा। बीजेपी हर लोकसभा चुनाव में यहां से मात खाती हे। इस दफे पार्टी ने पूरी ताकत लगा दी थी। यहां के ज्यादातर नगरीय निकाय कांगरेस के कब्जे में थे ओर वोटर भी ज्यादातर आदिवासी हेंगे। यहां बीजेपी ने 6 में से 4 निकाय कांग्रेस से छीन लिए। सौंसर में तो कांगरेस को एक भी सीट नई मिली।

मियां गोरतलब हे के बीजेपी ने कांगरेस से 5 नगर पालिका ओर 5 नगर परिषदें भी छीन लीं। उधर कांगरेस ने भी बीजेपी से 9 निकाय छीन लिए। 14 निकायों में भाजपा और 1 में कांगरेस दोबारा जीती।

इन चुनावो में वोटर ने झटके तो दोनो पार्टियों के आला नेताओं को दिए हेंगे। मसलन पिरदेश के वन मंतरी विजय शाह के गढ़ हरसूद में बीजेपी हार गई तो कांगरेस विधायक विजय लक्ष्मी साधो के महेश्वर में कांगरेस को पटखनी मिली। मियां, असल चिंता ये हेगी के आदिवासी इलाकों में बीजेपी ने अपना परचम फिर लहरा दिया हेगा। इसका असर अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। ये चुनाव मिनी सेमीफाइनल रिया।

- बतोलेबाज 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यह लेखक के निजी विचार हैं। आलेख में शामिल सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। अपने विचार हमें [email protected]।co।in पर भेज सकते हैं। लेख के साथ संक्षिप्त परिचय और फोटो भी संलग्न करें।


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