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: Jabalpur: हाईकोर्ट के मिले पत्रों की जांच के निर्देश, दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार टीआई की जमानत का मामला

News Desk / Fri, Sep 30, 2022


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court new - फोटो : istock

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दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार टीआई की जमानत आवेदन के संबंध में हाईकोर्ट को दो पत्र मिले थे। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की युगलपीठ ने पाया कि पत्र की भाषा ऐसी है कि वह सिर्फ न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित नहीं करती बल्कि अवमानना की श्रेणी में आती है। एकलपीठ ने प्राप्त पत्रों की जांच के निर्देश दिए हैं, जिससे पत्र भेजने वाले का खुलासा हो सके।

गौरतलब है कि कटनी में पदस्थ टीआई संदीप अयाची के खिलाफ एक महिला आरक्षक की शिकायत पर महिला थाना जबलपुर ने दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज किया था। हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी के अग्रिम जमानत आवेदन को निरस्त कर दी थी। गिरफ्तार के बाद थाना प्रभारी ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन दायर किया था। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी ने आवेदन पर गुरुवार को सुनवाई की थी। एकलपीठ ने आवेदन पर शुक्रवार को पुन सुनवाई निर्धारित की थी।

एकलपीठ ने शुक्रवार को पारित अपने आदेश में कहा है कि जमानत के संबंध में हाईकोर्ट को दो पत्र प्राप्त हुए। पत्र भेजने वाले ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पर आरोप लगाए हैं। पत्र की भाषा ऐसी है कि वह सिर्फ न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित नहीं करती बल्कि अवमानना की श्रेणी में आती है। इस तरह की पुर्नावृत्ति नहीं हो इसके लिए मामले की जांच आवश्यक है। रजिस्टार जनरल इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को सूचित करे कि जांच के लिए जिम्मेदारी अधिकारियों को नियुक्त करें।

पुलिस अपनी जांच रिपोर्ट रजिस्टार जनरल को सौंपेगी और वह न्यायालय के समक्ष पेश करेंगे। आदेश में कहा गया है कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के संज्ञान में उक्त जानकारी लाई जाए। आदेश उनके द्वारा पारित किया गया है कि इसलिए उक्त प्रकरण किस कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया जाए, इस संबंध में चीफ जस्टिस निर्णय लें। उन्हें पुन: सुनवाई के लिए प्रकरण अवंटित किया जाता है तो वह मैरिट के आधार पर आदेश पारित करेंगे।

विस्तार

दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार टीआई की जमानत आवेदन के संबंध में हाईकोर्ट को दो पत्र मिले थे। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी की युगलपीठ ने पाया कि पत्र की भाषा ऐसी है कि वह सिर्फ न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित नहीं करती बल्कि अवमानना की श्रेणी में आती है। एकलपीठ ने प्राप्त पत्रों की जांच के निर्देश दिए हैं, जिससे पत्र भेजने वाले का खुलासा हो सके।

गौरतलब है कि कटनी में पदस्थ टीआई संदीप अयाची के खिलाफ एक महिला आरक्षक की शिकायत पर महिला थाना जबलपुर ने दुष्कर्म का प्रकरण दर्ज किया था। हाईकोर्ट ने थाना प्रभारी के अग्रिम जमानत आवेदन को निरस्त कर दी थी। गिरफ्तार के बाद थाना प्रभारी ने हाईकोर्ट में जमानत के लिए आवेदन दायर किया था। हाईकोर्ट जस्टिस संजय द्विवेदी ने आवेदन पर गुरुवार को सुनवाई की थी। एकलपीठ ने आवेदन पर शुक्रवार को पुन सुनवाई निर्धारित की थी।

एकलपीठ ने शुक्रवार को पारित अपने आदेश में कहा है कि जमानत के संबंध में हाईकोर्ट को दो पत्र प्राप्त हुए। पत्र भेजने वाले ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता पर आरोप लगाए हैं। पत्र की भाषा ऐसी है कि वह सिर्फ न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित नहीं करती बल्कि अवमानना की श्रेणी में आती है। इस तरह की पुर्नावृत्ति नहीं हो इसके लिए मामले की जांच आवश्यक है। रजिस्टार जनरल इस संबंध में पुलिस अधीक्षक को सूचित करे कि जांच के लिए जिम्मेदारी अधिकारियों को नियुक्त करें।

पुलिस अपनी जांच रिपोर्ट रजिस्टार जनरल को सौंपेगी और वह न्यायालय के समक्ष पेश करेंगे। आदेश में कहा गया है कि हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस के संज्ञान में उक्त जानकारी लाई जाए। आदेश उनके द्वारा पारित किया गया है कि इसलिए उक्त प्रकरण किस कोर्ट के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत किया जाए, इस संबंध में चीफ जस्टिस निर्णय लें। उन्हें पुन: सुनवाई के लिए प्रकरण अवंटित किया जाता है तो वह मैरिट के आधार पर आदेश पारित करेंगे।


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