UPI पेमेंट पर नया नियम, समझिए पूरा गणित : ₹2,000 से ज्यादा के मर्चेंट ट्रांजैक्शन पर लगेगा 0.4% चार्ज, जानिए किसे देनी होगी फीस और आपकी जेब पर क्या पड़ेगा असर?
MP CG Times / Tue, Sep 15, 2026
नई दिल्ली। देश में डिजिटल लेनदेन का सबसे बड़ा जरिया बन चुके यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) को लेकर वित्त मंत्रालय ने नया नोटिफिकेशन जारी कर स्थिति साफ कर दी है। सरकार ने ₹2,000 से अधिक के व्यावसायिक (मर्चेंट) ट्रांजैक्शन पर 0.4% का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने का फैसला किया है।
हालांकि, सरकार ने यह स्पष्ट किया है कि ग्राहकों से कोई शुल्क नहीं लिया जाएगा और ₹2,000 तक के सभी लेनदेन पूरी तरह से निशुल्क रहेंगे। RuPay डेबिट कार्ड से होने वाले भुगतानों को भी इस छूट का फायदा मिलता रहेगा।

क्या है नया नियम और कितना लगेगा शुल्क?
₹2,000 से ज्यादा का पेमेंट: इस पर 0.4% की दर से शुल्क लगेगा। प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम फीस की लिमिट ₹300 तय की गई है।
ग्राहकों के लिए फ्री: यह शुल्क केवल कारोबारियों/दुकानदारों से लिया जाएगा, आम उपभोक्ताओं से नहीं।
₹2,000 तक फ्री: ₹2,000 तक के किसी भी यूपीआई भुगतान पर ग्राहक या दुकानदार किसी से भी कोई फीस नहीं ली जाएगी।
आसानी से समझिए: 5 सवाल-जवाब में नए चार्ज का पूरा गणित
सवाल 1: सरकार ने ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर चार्ज क्यों लगाया?
जवाब: वित्त वर्ष 2025-26 में दुकानदारों को UPI से ₹198 लाख करोड़ का भुगतान मिला। इसमें ₹2,000 से बड़े ट्रांजैक्शन भले ही सिर्फ 4% थे, लेकिन कुल वैल्यू का 66% (₹131 लाख करोड़) हिस्सा इन्हीं का था। बड़े व्यावसायिक लेन-देन से सिस्टम के रखरखाव का खर्च निकालने के लिए यह कदम उठाया गया है।
सवाल 2: MDR क्या होता है और यह किससे वसूला जाता है?
जवाब: MDR (Merchant Discount Rate) वह सर्विस फीस है जो डिजिटल पेमेंट स्वीकार करने की सुविधा के एवज में बैंक या ऐप कंपनियां दुकानदार से लेती हैं। कार्ड पेमेंट में यह शुल्क पहले से लागू है।
सवाल 3: क्या इसका असर आम ग्राहकों की जेब पर पड़ेगा?
जवाब: यह शुल्क मर्चेंट से जुड़ा है, इसलिए सीधे ग्राहक से पैसा नहीं कटेगा। बैंकों को सख्त हिदायत दी गई है कि वे दुकानदारों को यह चार्ज ग्राहकों से वसूलने की अनुमति न दें। हालांकि, यदि व्यापारी अपनी लागत बढ़ाने का तर्क देते हैं, तो इसका अप्रत्यक्ष असर सेवाओं की अंतिम कीमतों पर पड़ सकता है या नहीं, यह बाजार की स्थिति पर निर्भर करेगा।
सवाल 4: क्या छोटे दुकानदारों को छूट मिलेगी?
जवाब: हां, हर महीने ₹1 लाख तक का डिजिटल भुगतान प्राप्त करने वाले छोटे दुकानदारों के सभी ट्रांजैक्शन पर कोई चार्ज नहीं लगेगा। ऐप प्रोवाइडर्स को कोई भी हिडन या प्लेटफॉर्म चार्ज लगाने की अनुमति नहीं होगी।
सवाल 5: सरकार ने यह बदलाव क्यों किया?
जवाब: जून 2026 तक देश में लगभग 55.5 करोड़ UPI यूजर्स हो चुके हैं। साइबर फ्रॉड रोकने, इंफ्रास्ट्रक्चर अपग्रेड करने और बैंकिंग नेटवर्क को सुरक्षित रखने के लिए भारी लागत आती है, जिसकी भरपाई के लिए यह व्यवस्था बनाई गई है।
राहुल बोले— 'चुपचाप जेब काटने की तैयारी', खड़गे ने कहा— 'डिजिटल टैक्स'
सरकार के इस फैसले पर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है:
राहुल गांधी का आरोप: कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने कहा कि सरकार ने पीछे के दरवाजे से UPI पर फीस लगाने का रास्ता खोल दिया है। जब दुकानदार से फीस ली जाएगी, तो अंततः वह रकम ग्राहक की जेब से ही निकाली जाएगी।
मल्लिकार्जुन खड़गे का हमला: कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि थोक महंगाई पहले से ही 10% के करीब है। ऐसे समय में भाजपा सरकार ने आम जनता पर 'डिजिटल पेमेंट टैक्स' लगाकर उनकी बचत पर डाका डालने का प्लान बनाया है।
देश का 84% डिजिटल ट्रांजैक्शन UPI से
जुलाई 2026 तक देश के 741 बैंक यूपीआई नेटवर्क से जुड़ चुके हैं। अकेले जुलाई महीने में ₹29.88 लाख करोड़ मूल्य के करीब 2,366 करोड़ UPI ट्रांजैक्शन दर्ज किए गए। वित्त वर्ष 2025-26 में भारत के कुल डिजिटल भुगतानों में UPI की अकेले 84% हिस्सेदारी रही है।
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