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: आरक्षण विधेयक अटका: राज्यपाल ने कहा- कानूनी सलाह के बाद ही कर पाऊंगी हस्ताक्षर, अब उपचुनाव के बाद फैसला

News Desk

News Desk / Fri, Dec 2, 2022

आरक्षण विधेयक अटका: राज्यपाल ने कहा- कानूनी सलाह के बाद ही कर पाऊंगी हस्ताक्षर, अब उपचुनाव के बाद फैसला

अनुसुइया उइके, राज्यपाल छत्तीसगढ़।

अनुसुइया उइके, राज्यपाल छत्तीसगढ़। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

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छत्तीसगढ़ विधानसभा में पास हुआ आरक्षण संशोधन विधेयक फिलहाल अटक गया है। इसके अब भानुप्रतापपुर उपचुनाव के बाद ही लागू होने की संभावना है। राज्यपाल अनुसुइया उइके ने अभी इस विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं कर रहीं। उनका कहना है कि उनके कानूनी सलाहकार छुट्टी पर हैं। उनकी सलाह के बाद ही वे हस्ताक्षर कर सकेंगी। ऐसे में उपचुनाव में विधेयक का राजनीतिक फायदा भूपेश सरकार को मिल पाएगा या नहीं यह नतीजों के बाद ही पता चल सकेगा। 
 

यह भी पढ़ें...Chhattisgarh : विधानसभा में आरक्षण संशोधन विधेयक पारित, SC, ST, OBC का बढ़ा, पर EWS का छह फीसदी हुआ कम

राज्यपाल अनुसुइया उइके ने शनिवार को मीडिया से चर्चा करते हुए साफ कर दिया कि उनके कानूनी सलाहकार छुट्टी पर हैँ। वह शादी में गए हैं और शनिवार व रविवार को छुट्टी है। ऐसे में पांच दिसंबर को लौटेंगे। उसके बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा में पास आरक्षण बिल को उनके कार्यालय में प्रस्तुत किया जाएगा। राज्यपाल ने कहा कि, उसका अवलोकन करने के बाद ही कानूनी सलाहकार उनके सामने लाएंगे। उसके बाद ही हस्ताक्षर कर पाऊंगी। कहा कि इस बिल के लिए उन्होंने भी जोर दिया था। 

राज्यपाल  से मिले थे पांच मंत्री
इससे पहले विधेयक की कॉपी लेकर देर शाम राज्य सरकार के मंत्री  रविंद्र चौबे, मोहम्मद अकबर, कवासी लखमा, अमरजीत भगत और शिव डहरिया ने राज्यपाल अनुसुइया उइके से राजभवन में मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने उन्हें आरक्षण विधेयक सौंपकर जल्द कार्यवाही का आग्रह किया था। विधानसभा में छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) संशोधन विधेयक और छत्तीसगढ़ शैक्षणिक संस्था प्रवेश में आरक्षण विधेयक पारित किया गया। 

यह भी पढ़ें...आरक्षण पर सवाल: नेता प्रतिपक्ष ने कहा- कांग्रेस की नीयत में खोट, SC को 16, EWS को 10% मिलना चाहिए

विधानसभा में आरक्षण संशोधन विधेयक पारित
आरक्षण संशोधन विधेयक में अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 13 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसी प्रकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 4 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। सदन में छत्तीसगढ़ लोक सेवा संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि आज का दिन बहुत विशेष दिन है। आज महत्वपूर्ण और विशेष निर्णय हुए हैं, इसलिए विधानसभा के सत्र को विशेष सत्र कहा गया।

विस्तार

छत्तीसगढ़ विधानसभा में पास हुआ आरक्षण संशोधन विधेयक फिलहाल अटक गया है। इसके अब भानुप्रतापपुर उपचुनाव के बाद ही लागू होने की संभावना है। राज्यपाल अनुसुइया उइके ने अभी इस विधेयक पर हस्ताक्षर नहीं कर रहीं। उनका कहना है कि उनके कानूनी सलाहकार छुट्टी पर हैं। उनकी सलाह के बाद ही वे हस्ताक्षर कर सकेंगी। ऐसे में उपचुनाव में विधेयक का राजनीतिक फायदा भूपेश सरकार को मिल पाएगा या नहीं यह नतीजों के बाद ही पता चल सकेगा। 


 

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राज्यपाल अनुसुइया उइके ने शनिवार को मीडिया से चर्चा करते हुए साफ कर दिया कि उनके कानूनी सलाहकार छुट्टी पर हैँ। वह शादी में गए हैं और शनिवार व रविवार को छुट्टी है। ऐसे में पांच दिसंबर को लौटेंगे। उसके बाद छत्तीसगढ़ विधानसभा में पास आरक्षण बिल को उनके कार्यालय में प्रस्तुत किया जाएगा। राज्यपाल ने कहा कि, उसका अवलोकन करने के बाद ही कानूनी सलाहकार उनके सामने लाएंगे। उसके बाद ही हस्ताक्षर कर पाऊंगी। कहा कि इस बिल के लिए उन्होंने भी जोर दिया था। 

राज्यपाल  से मिले थे पांच मंत्री
इससे पहले विधेयक की कॉपी लेकर देर शाम राज्य सरकार के मंत्री  रविंद्र चौबे, मोहम्मद अकबर, कवासी लखमा, अमरजीत भगत और शिव डहरिया ने राज्यपाल अनुसुइया उइके से राजभवन में मुलाकात की थी। इस दौरान उन्होंने उन्हें आरक्षण विधेयक सौंपकर जल्द कार्यवाही का आग्रह किया था। विधानसभा में छत्तीसगढ़ लोक सेवा (अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों एवं अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण) संशोधन विधेयक और छत्तीसगढ़ शैक्षणिक संस्था प्रवेश में आरक्षण विधेयक पारित किया गया। 


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विधानसभा में आरक्षण संशोधन विधेयक पारित
आरक्षण संशोधन विधेयक में अनुसूचित जनजाति को 32 प्रतिशत, अनुसूचित जाति को 13 प्रतिशत और अन्य पिछड़ा वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण दिया गया है। इसी प्रकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग को 4 प्रतिशत आरक्षण का लाभ मिलेगा। सदन में छत्तीसगढ़ लोक सेवा संशोधन विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि आज का दिन बहुत विशेष दिन है। आज महत्वपूर्ण और विशेष निर्णय हुए हैं, इसलिए विधानसभा के सत्र को विशेष सत्र कहा गया।


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