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: छत्तीसगढ़: धान पर सियासत; साव बोले- झूठी वाहवाही लूट रही सरकार, कांग्रेस का जवाब- 1 किलो धान नहीं खरीदता केंद्र

News Desk / Thu, Feb 9, 2023


बीेजेपी प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम

बीेजेपी प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष मोहन मरकाम - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

छत्तीसगढ़ में धान पर सियासत गरमाई हुई है। बीजेपी और कांग्रेस मामले में एक दूसरे पर निशाना साध रहे हैं। जमकर एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगाकर जुबानी हमले कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ प्रदेश भाजपा अध्यक्ष और सांसद अरुण साव ने कहा है कि किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य पर केंद्र सरकार की ओर से किए जाने वाले भुगतान को लेकर राज्य सरकार ने आंकड़े जारी करने की चुनौती स्वीकार नहीं की। क्योंकि राज्य सरकार ने भ्रामक जानकारी दी थी। 

उन्होंने कहा कि कांग्रेस जनता को सत्य बताने की हिम्मत नहीं जुटा सकी तो उन्होंने राष्ट्रीय परिपेक्ष की जगह राज्य के आंकड़े जारी किए हैं। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने फिर एक चुनौती दी है कि कांग्रेस में दम है तो बताए कि धान का कितना पैसा उन्होंने किसानों को दिया और उसी धान से बना चावल खरीदकर केंद्र ने कितना पैसा दिया? उन्होंने कहा कि आंकड़े जारी किए तो मालूम हो जाएगा कि धान खरीदी के सोलह आने में से मात्र 1आना राज्य सरकार दे रही है। केंद्र सरकार धान खरीदी के लिए बारदाने से लेकर परिवहन तक सभी व्यय वहन करती है।

'केंद्र का चंदन घिसकर खुद को सुगंधीलाल साबित करने की कोशिश'
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि भूपेश बघेल केंद्र का चंदन घिसकर खुद को सुगंधीलाल साबित करने की कोशिश कर रहे हैं। कांग्रेस केंद्र सरकार के पैसों से वाहवाही लूटना बंद करे और आंकड़े जारी करे कि छत्तीसगढ़ के किसानों को केंद्र सरकार कितना पैसा दे रही है और कांग्रेस की भूपेश सरकार कितना पैसा दे रही है। छत्तीसगढ़ के किसानों का 61 लाख मैट्रिक टन चावल जो लगभग 90 से 95 लाख मैट्रिक टन धान होता है। उसे केंद्र की मोदी सरकार खरीद रही है। कांग्रेस आंकड़े जारी करने की चुनौती स्वीकार करे और बताए कि केंद्र ने चावल खरीद कर कितना रुपया दिया और इस वर्ष कितना देने वाली है।

केंद्र की राशि पर झूठी वाहवाही लूट रही सरकार: साव
उन्होंने कहा केंद्र की ओर से दी जा रही राशि पर वाहवाही लूटना कांग्रेस की आदत बन चुकी है।
राज्य सरकार बार-बार झूठ कहती है कि धान का एक भी रुपया केंद्र नहीं देता जबकि विधानसभा में स्वयं वह स्वीकार कर चुकी है कि राज्य एक एजेंसी के रूप में ही धान की खरीदारी करता है। यहां तक की मंत्री अमरजीत भगत ने तो विधानसभा में यह राशि भी बताई थी। कांग्रेस में दम है तो ये आंकड़े जनता के सामने रखें।


राज्य सरकार अपने दम पर करती है धान खरीदी: मरकाम
मामले में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भाजपा धान खरीदी पर लगातार झूठ बोल रही है। भाजपा अध्यक्ष अरुण साव झूठा दावा कर रहे है कि केंद्र सरकार धान खरीदी का बारदाना, सुतली और ट्रांसपोर्टिंग तक का पैसा देती है। जबकि हकीकत यह है कि केंद्र सरकार 1 किलो भी धान की खरीदी नहीं करती है। राज्य सरकार अपने दम पर मार्कफेड के माध्यम से धान की खरीदी करती है। केंद्र का इसके एक रुपए का भी योगदान नहीं है। 

'केंद्र सरकार अपनी आवश्यकताओं के लिए राज्य से चावल खरीदती है'
उन्होंने कहा कि केंद्र अपनी आवश्यकताओं के लिए राज्य से चावल खरीदता है। छत्तीसगढ़ सरकार की नीतियों के कारण किसानों को देश में सबसे ज्यादा धान की कीमत 2640 और 2660 रुपए मिल रही है। केंद्र सरकार के अडंगेबाजी के कारण किसानों को धान की पूरी कीमत एक साथ नहीं मिल पाता है। किसानों को धान की कीमत 2640 और 2660 रु. जो मिला उसके पीछे कांग्रेस की राजीव गांधी किसान न्याय योजना है। जिसके कारण किसानों को 9000 रु. प्रति एकड़ की इन्पुट सब्सिडी मिल रही है। इन्पुट सब्सिडी प्रति एकड़ 15 क्विंटल धान खरीदी के हिसाब से 600 रु. प्रति एकड़ होती है। 600 रु और समर्थन मूल्य के 2040 तथा 2060 रु. का जोड़ मिलाकर किसानों को 2640 और 2660 रु मिला है। राजीव गांधी किसान न्याय योजना की यह सहायता भाजपा के किसान विरोधी निर्णय के कारण ही शुरू की गयी। केंद्र सरकार रोक नहीं लगाती तो किसानों को कांग्रेस सरकार एकमुश्त भुगतान करती।



'भाजपा की कथनी करनी में अंतर'
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष मोहन मरकाम ने कहा कि भाजपा की कथनी करनी का अंतर हमेशा से अलग रही। छत्तीसगढ़ में सरकार में रहते भाजपा ने वायदा किया कि धान का 2100 रूपये समर्थन मूल्य देंगे, नहीं दिया। 5 साल तक 300 रूपये बोनस देंगे, 5 साल नही दिया। धान का एक-एक दाना खरीदेंगे, नहीं खरीदा। 10 क्विंटल खरीद रहे थे कांग्रेस के विरोध के बाद बढ़ाया। 2014 के चुनाव के पहले मोदी ने वायदा किया था स्वामीनाथन कमेटी की सिफारिशों लागू करेंगे लागत मूल्य पर 50 प्रतिशत जोंडकर समर्थन मूल्य देंगे, नहीं दिया। 2022 तक किसानों की आय दुगुनी करेंगे। 2022 बीत गया किसानों की आय बढ़ने के बजाये घट गयी।

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