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7,669 करोड़ का दावा छोड़ा, उल्टा 231 करोड़ भरेगी MP सरकार : नर्मदा नदी से जुड़ी 21 हजार हेक्टेयर जमीन डूबी, 192 गांव उजड़े; सरदार सरोवर डील की इनसाइड स्टोरी

MP Narmada Project | Sardar Sarovar Dam Settlement Controversy Explained | Mohan Yadav: मध्य प्रदेश की करीब 21 हजार हेक्टेयर जमीन सरदार सरोवर डैम के बैकवॉटर में हमेशा के लिए डूब गई। 192 गांव उजड़ गए। इस नुकसान के बदले मध्य प्रदेश ने गुजरात से 7,669 करोड़ रुपए का मुआवजा मांगा था, लेकिन 30 साल तक चला विवाद आखिर ऐसे खत्म हुआ कि मुआवजा मिलने के बजाय अब मध्य प्रदेश सरकार को ही गुजरात को 231.80 करोड़ रुपए देने होंगे।

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MP Narmada Project | Sardar Sarovar Dam Settlement Controversy Explained | Mohan Yadav: दिल्ली में 7 जुलाई को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में मध्य प्रदेश, गुजरात, महाराष्ट्र और राजस्थान के बीच 'वन टाइम सेटलमेंट' हुआ। सरकार इसे बड़ी उपलब्धि बता रही है, जबकि कांग्रेस इसे प्रदेश के साथ बड़ा समझौता और नुकसान बता रही है। आखिर 30 साल पुराना विवाद कैसे खत्म हुआ, मध्य प्रदेश को नुकसान हुआ या फायदा, और विस्थापितों का क्या होगा? आइए पूरी कहानी विस्तार से समझते हैं।

सवाल-1: सरदार सरोवर डैम का 'वन टाइम सेटलमेंट' क्या है?

जवाब: विवाद पानी से शुरू हुआ, मुआवजे पर आकर अटक गया

नर्मदा नदी मध्य प्रदेश के अमरकंटक से निकलकर महाराष्ट्र की सीमा छूते हुए गुजरात के भरूच में अरब सागर में मिलती है। वर्ष 1961 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने गुजरात के नवागाम में सरदार सरोवर डैम की नींव रखी थी।

शुरुआती वर्षों में विवाद केवल नर्मदा के पानी के बंटवारे को लेकर था। इसे सुलझाने के लिए 'नर्मदा वॉटर डिस्प्यूट ट्रिब्यूनल (NWDT)' बनाया गया। लगभग 10 साल की सुनवाई के बाद 1979 में पानी के बंटवारे का विवाद तो सुलझ गया, लेकिन 90 के दशक में 'नर्मदा बचाओ आंदोलन' शुरू हो गया।

विस्थापन और पुनर्वास के मुद्दे पर 1995 में सुप्रीम कोर्ट ने डैम निर्माण पर रोक लगा दी। कई वर्षों तक काम बंद रहने से परियोजना की लागत बढ़ती गई। इसके बाद डूब क्षेत्र, पुनर्वास और मुआवजे को लेकर मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच नया विवाद शुरू हो गया।

MP Narmada Project | Sardar Sarovar Dam Settlement Controversy Explained | Mohan Yadav: शुरुआत में जब डैम की ऊंचाई 90 मीटर तय थी, तब मध्य प्रदेश ने गुजरात से केवल 281 करोड़ रुपए मुआवजा मांगा था। लेकिन 2014 में डैम की ऊंचाई बढ़ाकर 138.68 मीटर कर दी गई। इससे बैकवॉटर का दायरा बढ़ गया और मध्य प्रदेश के 192 गांव तथा करीब 20,822 हेक्टेयर जमीन स्थायी रूप से डूब क्षेत्र में आ गई।

इसके बाद मध्य प्रदेश सरकार ने नए भूमि अधिग्रहण कानून के तहत नया आकलन तैयार किया और गुजरात से 7,669 करोड़ रुपए मुआवजे की मांग कर दी। गुजरात ने यह मांग मानने से इनकार कर दिया। वह पुराने 281 करोड़ रुपए देने की बात पर कायम रहा। साथ ही उसने कहा कि डैम निर्माण में जो खर्च हुआ है, उसमें मध्य प्रदेश को अपनी हिस्सेदारी पहले चुकानी होगी। इसी वित्तीय विवाद के कारण मामला करीब 30 वर्षों तक अटका रहा।

MP Narmada Project | Sardar Sarovar Dam Settlement Controversy Explained | Mohan Yadav: आखिरकार 7 जुलाई को दिल्ली में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल की मौजूदगी में चार राज्यों के बीच 'वन टाइम सेटलमेंट' हुआ। इस समझौते के तहत मध्य प्रदेश ने 7,669 करोड़ रुपए का दावा वापस ले लिया और बदले में 1,500 करोड़ रुपए की पुरानी देनदारी की जगह केवल 231.80 करोड़ रुपए चुकाने पर सहमति बनी।

सवाल-2: मध्य प्रदेश की जमीन ज्यादा डूबी, फिर उसे ही ₹231.80 करोड़ क्यों देने पड़ रहे हैं?

जवाब: इसकी वजह ट्रिब्यूनल का फार्मूला है

1979 में बने नर्मदा वॉटर डिस्प्यूट ट्रिब्यूनल के नियम के अनुसार, डैम गुजरात में होने के बावजूद उससे पानी और बिजली लेने वाले राज्यों को निर्माण लागत में भी हिस्सा देना होगा।

इसी आधार पर इस वर्ष फरवरी में अटॉर्नी जनरल ने सुझाव दिया कि सरदार सरोवर परियोजना के पुनर्वास और निर्माण लागत में मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत मानी जाए। इस हिसाब से गुजरात पर मध्य प्रदेश की करीब 1,500 करोड़ रुपए की देनदारी बन रही थी।

दिल्ली में हुए समझौते में केंद्र सरकार ने मध्य प्रदेश की हिस्सेदारी 31.98 प्रतिशत से घटाकर सीधे 16.17 प्रतिशत कर दी। इसका सीधा फायदा यह हुआ कि 1,500 करोड़ रुपए की देनदारी घटकर केवल 231.80 करोड़ रुपए रह गई।

यही वजह है कि जमीन ज्यादा डूबने के बावजूद मध्य प्रदेश को यह राशि चुकानी पड़ेगी।

सवाल-3: क्या मोहन सरकार ने घाटे का सौदा किया?

जवाब: सरकार और विपक्ष दोनों की दलील अलग-अलग है

कांग्रेस इस समझौते को मध्य प्रदेश का बड़ा नुकसान बता रही है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को 'सरेंडर' और 'कॉम्प्रोमाइज्ड सीएम' तक कहा।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में जीतू पटवारी ने कहा, "मुख्यमंत्री जी, आप राजा हरिश्चंद्र नहीं हैं कि जो कह देंगे, जनता सच मान लेगी।"

MP Narmada Project | Sardar Sarovar Dam Settlement Controversy Explained | Mohan Yadav: नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने भी सवाल उठाया कि अब मध्य प्रदेश की जमीन, किसानों और आदिवासियों के अधिकारों की कीमत कौन देगा? कांग्रेस ने पूरे मामले पर श्वेत पत्र जारी करने की मांग की है।

MP Narmada Project | Sardar Sarovar Dam Settlement Controversy Explained | Mohan Yadav: दूसरी तरफ मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव इसे मध्य प्रदेश की बड़ी जीत बता रहे हैं। उनका कहना है कि वर्षों से अटका विवाद समाप्त हुआ और प्रदेश के हित सुरक्षित रहे।

आर्थिक जानकारों का भी तर्क अलग है। उनका कहना है कि गुजरात किसी भी स्थिति में 7,669 करोड़ रुपए देने को तैयार नहीं था। ऐसे में मध्य प्रदेश ने अपनी 1,500 करोड़ रुपए की संभावित देनदारी घटाकर केवल 231.80 करोड़ रुपए करा ली। यानी प्रदेश के खजाने के करीब 1,268 करोड़ रुपए बच गए। इसलिए इसे पूरी तरह घाटे का सौदा कहना उचित नहीं होगा।

सवाल-4: इस समझौते से मध्य प्रदेश को आखिर मिला क्या?

जवाब: डैम गुजरात में है, लेकिन सबसे ज्यादा फायदा मध्य प्रदेश को मिलता है

सरदार सरोवर डैम से बनने वाली कुल जलविद्युत का 57 प्रतिशत हिस्सा मध्य प्रदेश को मिलता है। महाराष्ट्र को 27 प्रतिशत और गुजरात को केवल 16 प्रतिशत बिजली मिलती है।

MP Narmada Project | Sardar Sarovar Dam Settlement Controversy Explained | Mohan Yadav: नर्मदा नदी के कुल 28 MAF पानी में से 18.25 MAF पानी मध्य प्रदेश के हिस्से में आता है, जबकि गुजरात को 9 MAF पानी मिलता है।

MP Narmada Project | Sardar Sarovar Dam Settlement Controversy Explained | Mohan Yadav: डैम से मिलने वाली बिजली भी बेहद सस्ती है। अब तक मध्य प्रदेश को लगभग 3,900 करोड़ यूनिट बिजली केवल 85 पैसे प्रति यूनिट की दर से मिल चुकी है।

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के मुताबिक, इस परियोजना से प्रदेश की करीब 31 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि को सिंचाई मिल रही है। साथ ही इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, देवास, धार और कटनी जैसे बड़े शहरों की पेयजल व्यवस्था भी इसी परियोजना से मजबूत हुई है।

सवाल-5: जिन विस्थापितों के लिए 7,669 करोड़ रुपए मांगे गए थे, उनका क्या होगा?

जवाब: मुआवजा खत्म नहीं हुआ, जिम्मेदारी बदल गई

MP Narmada Project | Sardar Sarovar Dam Settlement Controversy Explained | Mohan Yadav: तकनीकी रूप से विस्थापितों का मुआवजा समाप्त नहीं हुआ है। फर्क सिर्फ इतना है कि अब यह राशि गुजरात नहीं देगा।

7,669 करोड़ रुपए का दावा वापस लेने के बाद विस्थापितों के पुनर्वास और मुआवजे की पूरी जिम्मेदारी अब मध्य प्रदेश सरकार पर आ गई है। यानी यदि पात्र लोगों को मुआवजा देना होगा तो वह प्रदेश सरकार को अपने खजाने से देना पड़ेगा।

इसी मुद्दे पर 'नर्मदा बचाओ आंदोलन' की नेत्री मेधा पाटकर ने भी सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि सबसे बड़ी चिंता उन हजारों विस्थापित परिवारों की है, जिनके पुनर्वास और मुआवजे का सवाल अभी भी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। अब यह देखना होगा कि राज्य सरकार उन्हें किस तरह और कब तक राहत देती है।

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