क्या CM ने कटवाया नरोत्तम मिश्रा का टिकट ? : गृहमंत्री की कुर्सी, इंटरनल सर्वे और IAS कनेक्शन; पढ़िए अंदरखाने की इनसाइड स्टोरी
MP CG Times / Sat, Jul 11, 2026
Narottam Mishra Ticket News | CM Mohan Yadav | Ashutosh Tiwari BJP | MP By Election Datia: दतिया में सब कुछ तय माना जा रहा था। डॉ. नरोत्तम मिश्रा नामांकन फॉर्म खरीद चुके थे, चुनाव प्रचार शुरू कर चुके थे। कार्यकर्ताओं को भरोसा था कि टिकट उन्हीं का होगा। लेकिन ऐन वक्त पर भाजपा ने पत्ता पलट दिया। टिकट आशुतोष तिवारी को मिला और दतिया की सियासत सड़क पर उतर आई। सवाल सिर्फ इतना नहीं कि टिकट क्यों कटा, बल्कि यह भी है कि क्या भाजपा ने एक प्रभावशाली नेता की जगह संगठन को तरजीह दी, क्या पार्टी 'पावर सेंटर' बनने से बचना चाहती थी, क्या 2023 की हार और इंटरनल सर्वे ने फैसला बदल दिया, या फिर मोहन यादव सरकार सत्ता और संगठन का नया संतुलन गढ़ रही है?
Narottam Mishra Ticket News | CM Mohan Yadav | Ashutosh Tiwari BJP | MP By Election Datia: टिकट कटने के बाद हाईवे जाम हुआ, पथराव और तोड़फोड़ हुई, धारा 163 लागू करनी पड़ी और भोपाल से दतिया तक डैमेज कंट्रोल शुरू हो गया। मुख्यमंत्री निवास पर लगातार बैठकों का दौर चला। वरिष्ठ नेताओं को मैदान में उतारा गया, जबकि खुद नरोत्तम मिश्रा ने पार्टी के फैसले को स्वीकार करने की बात कही। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ एक उपचुनाव का टिकट था, या फिर मध्य प्रदेश भाजपा में बदलते शक्ति संतुलन, नई पीढ़ी की राजनीति और भविष्य के नेतृत्व का बड़ा संकेत?

अब पढ़िए दतिया की सियासत की पूरी कहानी ?
मध्य प्रदेश की राजनीति में पूर्व गृहमंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटना सबसे बड़ी सियासी चर्चाओं में है। दतिया विधानसभा उपचुनाव के लिए उन्होंने नामांकन फॉर्म तक खरीद लिया था। लगातार जनसंपर्क कर रहे थे, बैठकों का दौर शुरू हो चुका था और मंचों से 2023 की हार के बाद हुई गलतियों के लिए जनता से माफी भी मांग रहे थे। लगभग तय माना जा रहा था कि भाजपा एक बार फिर उन्हीं पर दांव लगाएगी, लेकिन 10 जुलाई को पार्टी ने ऐन वक्त पर उनका टिकट काटकर संगठन से जुड़े आशुतोष तिवारी को उम्मीदवार घोषित कर दिया।
टिकट की घोषणा के बाद दतिया में भाजपा के भीतर खुली नाराजगी सामने आ गई। समर्थक सड़कों पर उतर आए, ग्वालियर-झांसी हाईवे पर चक्काजाम किया, पथराव और तोड़फोड़ हुई। हालात संभालने के लिए धारा 163 लागू करनी पड़ी। सवाल उठने लगे कि आखिर ऐसा क्या हुआ कि पार्टी के सबसे मजबूत दावेदार का टिकट अंतिम समय में कट गया? क्या इसके पीछे सिर्फ चुनावी गणित था या संगठन और सत्ता के भीतर कोई बड़ा संदेश छिपा था? आइए पूरी कहानी समझते हैं।
क्यों इतने कॉन्फिडेंट थे नरोत्तम?
नरोत्तम मिश्रा मध्य प्रदेश की डबरा और दतिया सीट से कुल छह बार विधायक रहे हैं। शिवराज सिंह चौहान सरकार में वे गृह मंत्री थे और सरकार के सबसे प्रभावशाली नेताओं में गिने जाते थे। उन्हें केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के करीबी नेताओं में भी माना जाता है।
Narottam Mishra Ticket News | CM Mohan Yadav | Ashutosh Tiwari BJP | MP By Election Datia: फिल्मों और विवादित बयानों को लेकर वे राष्ट्रीय स्तर तक चर्चा में रहे और उन्होंने अपनी पहचान एक आक्रामक नेता के रूप में बनाई। हालांकि, उनकी राजनीतिक शुरुआत डबरा से हुई थी। 1990 में वे पहली बार डबरा से विधायक बने। 2008 में परिसीमन के बाद डबरा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित हो गई, जिसके बाद उन्होंने दतिया को अपनी राजनीतिक कर्मभूमि बनाया।
2023 की हार के बाद भी उम्मीद क्यों थी?
2023 के विधानसभा चुनाव में नरोत्तम मिश्रा कांग्रेस के राजेंद्र भारती से 7,742 वोटों से हार गए थे। इसके बाद दिल्ली की एक अदालत ने राजेंद्र भारती को एक पुराने मामले में तीन साल की सजा सुनाई। सजा के बाद उनकी विधायकी चली गई और दिल्ली हाईकोर्ट ने भी राहत देने से इनकार कर दिया। इसके बाद दतिया सीट पर उपचुनाव की स्थिति बनी।
Narottam Mishra Ticket News | CM Mohan Yadav | Ashutosh Tiwari BJP | MP By Election Datia: उपचुनाव घोषित होते ही नरोत्तम मिश्रा पूरी तैयारी में जुट गए। उन्होंने नामांकन फॉर्म खरीदा, लगातार जनसंपर्क शुरू किया, कार्यकर्ताओं की बैठकें लीं और मंचों से जनता के बीच जाकर पुरानी गलतियों के लिए माफी भी मांगी। भाजपा के स्थानीय कार्यकर्ताओं और उनके समर्थकों को भी पूरा भरोसा था कि टिकट उन्हें ही मिलेगा।

फिर अचानक क्या बदल गया?
10 जुलाई को भाजपा ने उम्मीदवारों की घोषणा की तो नरोत्तम मिश्रा का नाम गायब था। उनकी जगह संगठन से जुड़े आशुतोष तिवारी को टिकट दे दिया गया। इस फैसले ने दतिया की राजनीति में भूचाल ला दिया।
घोषणा होते ही बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़कों पर उतर आए। ग्वालियर-झांसी हाईवे पर कई किलोमीटर लंबा जाम लगा। जगह-जगह पथराव और तोड़फोड़ हुई। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़प भी हुई। हालात बिगड़ने पर प्रशासन को धारा 163 लागू करनी पड़ी। भाजपा कार्यालय के बाहर भी कार्यकर्ताओं का धरना जारी रहा और टिकट बदलने की मांग उठने लगी।
Narottam Mishra Ticket News | CM Mohan Yadav | Ashutosh Tiwari BJP | MP By Election Datia: इस पूरे घटनाक्रम के बीच नरोत्तम मिश्रा पहली बार सामने आए। उन्होंने मीडिया से कहा कि पार्टी के किसी बड़े नेता का उन्हें फोन नहीं आया, लेकिन पार्टी ने जो निर्णय लिया है, उसका वे सम्मान करते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि नाराज कार्यकर्ताओं को समझाया जाएगा और सभी मिलकर चुनाव लड़ेंगे।
भोपाल में शुरू हुआ डैमेज कंट्रोल
दतिया में बढ़ते विरोध के बाद भाजपा नेतृत्व तुरंत सक्रिय हो गया। डैमेज कंट्रोल के लिए डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा, कृषि मंत्री एदल सिंह कंसाना और प्रदेश महामंत्री राहुल कोठारी को दतिया भेजा गया।
उधर भोपाल में मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के निवास पर नरोत्तम मिश्रा के साथ लंबी बैठक हुई। बैठक में क्षेत्रीय संगठन महामंत्री अजय जमवाल और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल भी मौजूद रहे। बाद में विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर को भी मुख्यमंत्री निवास बुलाया गया। माना गया कि पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने नरोत्तम मिश्रा को साधने और कार्यकर्ताओं की नाराजगी कम करने की रणनीति पर चर्चा की।
आखिर ऐन वक्त पर टिकट क्यों कटा?
Narottam Mishra Ticket News | CM Mohan Yadav | Ashutosh Tiwari BJP | MP By Election Datia: भाजपा ने आधिकारिक तौर पर टिकट बदलने की कोई वजह नहीं बताई है, लेकिन राजनीतिक विश्लेषकों, पार्टी सूत्रों और संगठन से जुड़े नेताओं से बातचीत में कई ऐसे फैक्टर सामने आते हैं, जिन्होंने अंतिम फैसले को प्रभावित किया।
1. लगातार घटता वोट मार्जिन और एंटी-इनकंबेंसी
राजनीतिक विश्लेषक रवि ठाकुर का कहना है कि विधायक रहने के दौरान नरोत्तम मिश्रा की कार्यशैली को लेकर आम लोगों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच नाराजगी रही। पिछले दो वर्षों में डैमेज कंट्रोल की कोशिश जरूर हुई, लेकिन उसका असर सीमित माना गया। 2023 की हार ने भी पार्टी नेतृत्व को यह सोचने पर मजबूर किया कि उपचुनाव में पुराने चेहरे पर फिर दांव लगाना कितना सुरक्षित होगा।
2. हार का ठीकरा सीधे मुख्यमंत्री पर फूटने का डर
रवि ठाकुर के मुताबिक उपचुनाव को हमेशा मौजूदा मुख्यमंत्री के नेतृत्व की परीक्षा माना जाता है। यदि नरोत्तम मिश्रा को टिकट मिलता और वे दोबारा हार जाते, तो इसकी राजनीतिक जिम्मेदारी सीधे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव पर आती। साथ ही नरोत्तम मूल रूप से डबरा की राजनीति से जुड़े रहे हैं, इसलिए दतिया में 'स्थानीय बनाम बाहरी' का मुद्दा भी उठ रहा था।
3. भाजपा का 'जनरेशनल शिफ्ट'
राजनीतिक विश्लेषक दिनेश गुप्ता का मानना है कि भाजपा इस समय नई पीढ़ी के नेताओं को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही है। ऐसे में पार्टी ने एक बड़े और विवादित चेहरे की जगह अपेक्षाकृत युवा तथा संगठन आधारित नेता आशुतोष तिवारी को मौका दिया। उनके मुताबिक भाजपा अब व्यक्ति-केंद्रित राजनीति की बजाय संगठन-केंद्रित नेतृत्व को प्राथमिकता दे रही है।
क्या किसी 'अपने' की भूमिका भी रही?
इस सवाल पर कई तरह की राजनीतिक चर्चाएं हैं, लेकिन इनकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
1. रामनरेश यादव, IAS भरत यादव कनेक्शन
राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि दतिया जिला पंचायत सदस्य रामनरेश यादव और उनके भाई IAS भरत यादव की भूमिका को लेकर भी अटकलें लगाई जा रही हैं। भरत यादव मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की कोर टीम का हिस्सा माने जाते हैं। हालांकि इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और न ही दोनों की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आई है।
2. 'पावर सेंटर' बनने की आशंका
नरोत्तम मिश्रा शिवराज सरकार के सबसे प्रभावशाली नेताओं में रहे हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि वे फिर विधायक बनकर आते तो सरकार के भीतर एक अलग 'पावर सेंटर' के रूप में उनकी भूमिका मजबूत हो सकती थी। पहले से ही कैलाश विजयवर्गीय, प्रह्लाद पटेल और नरेंद्र सिंह तोमर जैसे वरिष्ठ नेता सक्रिय हैं। ऐसे में संगठन अतिरिक्त शक्ति केंद्र बनने के जोखिम से बचना चाहता था।
3. वरिष्ठ नेताओं की राय बनाम इंटरनल सर्वे
भाजपा सूत्रों के मुताबिक प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल ने टिकट तय करने से पहले वरिष्ठ नेताओं से राय ली थी। बताया जाता है कि कैलाश विजयवर्गीय और प्रह्लाद पटेल ने नरोत्तम मिश्रा के पक्ष में राय दी थी, लेकिन पार्टी के इंटरनल सर्वे में उनके प्रति नकारात्मक फीडबैक सामने आया। यह भी चर्चा रही कि पिछले कुछ वर्षों में स्थानीय स्तर पर कई नेताओं ने संगठन के भीतर नए नेतृत्व को आगे बढ़ाने की पैरवी की।
4. क्या गृह विभाग और सत्ता संतुलन की भी चिंता थी?
राजनीतिक गलियारों में एक चर्चा यह भी है कि यदि डॉ. नरोत्तम मिश्रा उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचते, तो उनके कद और अनुभव को देखते हुए मंत्री बनाए जाने की मांग भी जोर पकड़ सकती थी। चूंकि वे शिवराज सरकार में लंबे समय तक गृह मंत्री रहे हैं, इसलिए अटकलें लगाई जा रही थीं कि उनके समर्थक फिर गृह विभाग की मांग कर सकते हैं।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इससे सरकार के भीतर सत्ता संतुलन और विभागों के बंटवारे पर दबाव बन सकता था। हालांकि, इस तरह की किसी आशंका या निर्णय की न तो भाजपा ने आधिकारिक पुष्टि की है और न ही मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव या पार्टी नेतृत्व ने इस पर कोई टिप्पणी की है।

आखिर आशुतोष तिवारी ही क्यों?
Narottam Mishra Ticket News | CM Mohan Yadav | Ashutosh Tiwari BJP | MP By Election Datia: आशुतोष तिवारी दतिया जिले के भांडेर क्षेत्र के रहने वाले हैं और यह उनका पहला विधानसभा चुनाव है। वे लंबे समय से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और भाजपा संगठन से जुड़े रहे हैं। मध्य प्रदेश भाजपा में कई संभागों के संगठन मंत्री रह चुके हैं। इसके अलावा वे मध्य प्रदेश हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष भी रह चुके हैं, जिन्हें कैबिनेट मंत्री का दर्जा प्राप्त था।
उनके पक्ष में कौन से फैक्टर रहे?
दतिया में ब्राह्मण मतदाताओं का प्रभाव।
स्थानीय चेहरा होने का फायदा।
साफ-सुथरी और अपेक्षाकृत विवाद-मुक्त छवि।
RSS और भाजपा संगठन में मजबूत पकड़।
संगठन आधारित राजनीति को आगे बढ़ाने की रणनीति।
Narottam Mishra Ticket News | CM Mohan Yadav | Ashutosh Tiwari BJP | MP By Election Datia: राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा फिलहाल ऐसे नेताओं को आगे बढ़ा रही है, जिनसे सरकार के सामने अलग शक्ति केंद्र बनने का खतरा कम हो।
अब नरोत्तम मिश्रा के सामने क्या विकल्प हैं?
राजनीतिक विश्लेषक रवि ठाकुर का कहना है कि पिछले करीब 35 वर्षों में नरोत्तम मिश्रा ने कभी पार्टी नहीं छोड़ी। इसलिए उनके अधिकांश विकल्प भाजपा के भीतर ही दिखाई देते हैं।
1. टिकट वापस कराने की कोशिश
पहला प्रयास यही था कि टिकट बदल जाए। टिकट कटने के बाद वे दिल्ली भी गए, लेकिन अंततः पार्टी ने फैसला नहीं बदला।
2. समर्थकों के जरिए दबाव की राजनीति
दतिया में उनके समर्थकों का विरोध प्रदर्शन इस बात का संकेत माना जा रहा है कि वे अपनी राजनीतिक ताकत और जनाधार का संदेश पार्टी नेतृत्व तक पहुंचाना चाहते हैं।
3. निर्दलीय चुनाव लड़ने की संभावना
कुछ राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यदि कार्यकर्ताओं का दबाव बहुत बढ़ता तो निर्दलीय चुनाव की संभावना बन सकती थी। हालांकि नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के फैसले का सम्मान करने की बात कही है।
4. संगठन में बड़ी जिम्मेदारी
केंद्रीय नेतृत्व से उनके पुराने संबंधों को देखते हुए यह संभावना भी जताई जा रही है कि भविष्य में उन्हें संगठन या किसी दूसरे राज्य में चुनावी जिम्मेदारी दी जा सकती है।
5. वरिष्ठ मार्गदर्शक की भूमिका
भाजपा में नई पीढ़ी को आगे लाने की रणनीति के बीच एक संभावना यह भी मानी जा रही है कि वे भविष्य में संगठन के वरिष्ठ मार्गदर्शक की भूमिका निभाएं। हालांकि राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनके जैसे सक्रिय नेता के लिए फिलहाल पूरी तरह सक्रिय राजनीति से पीछे हटने की संभावना कम है।
फिलहाल तस्वीर क्या कहती है?
भाजपा ने उम्मीदवार बदलने का फैसला नहीं बदला है और आशुतोष तिवारी चुनाव मैदान में हैं। दूसरी ओर, नरोत्तम मिश्रा ने सार्वजनिक रूप से पार्टी के निर्णय को स्वीकार करने की बात कही है, लेकिन दतिया में उनके समर्थकों की नाराजगी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है। यही वजह है कि टिकट कटने का यह फैसला अब सिर्फ एक उपचुनाव का मुद्दा नहीं, बल्कि मध्य प्रदेश भाजपा की बदलती राजनीति, संगठन की प्राथमिकताओं और नेतृत्व की नई रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

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