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: MP News: मास्टर प्लान में छेड़छाड़ कर एक करोड़ का नुकसान पहुंचाया, निवाड़ी कलेक्टर समेत कई अफसरों पर केस दर्ज

News Desk / Fri, Oct 21, 2022


विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ग्वालियर के मास्टर प्लान में छेड़छाड़

विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ग्वालियर के मास्टर प्लान में छेड़छाड़ - फोटो : अमर उजाला

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मध्य प्रदेश विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त संगठन ग्वालियर ने विशेष क्षेत्र प्राधिकरण ग्वालियर (साडा) के तत्कालीन अध्यक्ष राकेश जादौन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी IAS तरुण भटनागर एवं अन्य के विरुद्ध पद के दुरुपयोग करने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। साडा के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी तरुण भटनागर वर्तमान में निवाड़ी कलेक्टर के पद पर पदस्थ है। इन पर साडा के मास्टर प्लान में छेड़छाड़ कर शासन को एक करोड़ रुपए से अधिक के राजस्व की हानि पहुंचाने का आरोप है।  
 
लोकायुक्त पुलिस को जनवरी 2020 में मुरार ग्वालियर निवासी संकेत साहू ने शिकायत दी कि विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ग्वालियर में अधिकार न होने के बावजूद और मास्टर प्लान में छेड़छाड़ कर अधिकारियों ने शराब फैक्ट्री रायऊ डिस्टलरी को 26.59 हैक्टेयर जमीन आवंटित की। यह जमीन आवासीय एवं सार्वजनिक व अर्धसार्वजनिक लैण्डयूज की जमीन है। जिस पर साडा के अफसरों ने शराब फैक्ट्री के विस्तार के लिए नियम विरूद्ध जमीन आवंटित कर दी। इसके लिए अधिकार नहीं होने के बावजूद मास्टर प्लान भी बदल दिया। जिससे शासन को 1.07 करोड़ रु. के राजस्व की हानि हुई। इस मामले में साहू ने कोर्ट में भी याचिका दायर की थी। कोर्ट के आदेश पर साडा के अध्यक्ष और सीईओ एवं अन्य के विरुद्ध केस दर्ज कर लोकायुक्त ने जांच की।   
 
जांच में सामने आया कि साडा में एलकाब्रियू प्रा. लि. (रायरू डिस्टलरी) ग्वालियर को ग्राम जिनावली, ग्राम मिलावली और ग्राम निरावली की कुल 26.59 हैक्टेयर भूमि 14 लाख रुपए जमा करने के बाद उपयंत्री भवन अधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा अध्यक्ष के अनुमोदन उपरांत संस्था को औद्योगिक विकास एवं भवन अनुज्ञा जारी की गई। जबकि यह भूमि साडा विकास योजना 2011 के अनुसार आवासीय वाणिज्यिक, सार्वजिनक मार्ग एवं हरित क्षेत्र के उपयोग के लिए थी। यहीं नहीं साडा की भूमि उपयोग के परिवर्तन का अधिकार नहीं होने के बावजूद अधिकरियों ने अनुमोदन दिया गया।
 
शराब फैक्ट्री मालिक रायऊ डिस्टलरी ने अपने फैक्ट्री के विस्तार और बड़े लोन एमाउण्ट के लिए साडा के मास्टर प्लान में छेड़छाड करवाई। इससे शासन को म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश नियम 2012 के नियम 15 के उप नियम 13 एवं 14 के अनुसार गणना करने पर लगभग 1.07 करोड़ रु. की शासन को आर्थिक क्षति हुई। एवं पुराने निर्माण का कम्पाउंडिंग शुल्क बचाने के लिए साड़ा के अधिकारियों जिसमें तत्कालीन साड़ा अध्यक्ष राकेश जादौन, तत्कालीन सीईओ तरूण भटनागर, उपयंत्री नवल सिंह राजपूत, अधीक्षण यंत्री आर एल एस. मौर्य एवं अन्य संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा अपने पद का दुरूपयोग किया और लाभ प्राप्त किया। 

बता दें विशेष क्षेत्र प्राधिकरण ग्वालियर (साडा) का गठन 1992 में नया ग्वालियर शहर बसाने क लिए किया गया था। आवासीय योजनाओं को लोगों की तरफ से रिस्पांस नहीं मिलने के बाद इसमें औद्योगिक प्लाट भी काट दिए गए। अभी तक साडा का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाया है। 
 
 

विस्तार

मध्य प्रदेश विशेष पुलिस स्थापना लोकायुक्त संगठन ग्वालियर ने विशेष क्षेत्र प्राधिकरण ग्वालियर (साडा) के तत्कालीन अध्यक्ष राकेश जादौन, मुख्य कार्यपालन अधिकारी IAS तरुण भटनागर एवं अन्य के विरुद्ध पद के दुरुपयोग करने पर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज किया है। साडा के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी तरुण भटनागर वर्तमान में निवाड़ी कलेक्टर के पद पर पदस्थ है। इन पर साडा के मास्टर प्लान में छेड़छाड़ कर शासन को एक करोड़ रुपए से अधिक के राजस्व की हानि पहुंचाने का आरोप है।  
 
लोकायुक्त पुलिस को जनवरी 2020 में मुरार ग्वालियर निवासी संकेत साहू ने शिकायत दी कि विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण ग्वालियर में अधिकार न होने के बावजूद और मास्टर प्लान में छेड़छाड़ कर अधिकारियों ने शराब फैक्ट्री रायऊ डिस्टलरी को 26.59 हैक्टेयर जमीन आवंटित की। यह जमीन आवासीय एवं सार्वजनिक व अर्धसार्वजनिक लैण्डयूज की जमीन है। जिस पर साडा के अफसरों ने शराब फैक्ट्री के विस्तार के लिए नियम विरूद्ध जमीन आवंटित कर दी। इसके लिए अधिकार नहीं होने के बावजूद मास्टर प्लान भी बदल दिया। जिससे शासन को 1.07 करोड़ रु. के राजस्व की हानि हुई। इस मामले में साहू ने कोर्ट में भी याचिका दायर की थी। कोर्ट के आदेश पर साडा के अध्यक्ष और सीईओ एवं अन्य के विरुद्ध केस दर्ज कर लोकायुक्त ने जांच की।   
 
जांच में सामने आया कि साडा में एलकाब्रियू प्रा. लि. (रायरू डिस्टलरी) ग्वालियर को ग्राम जिनावली, ग्राम मिलावली और ग्राम निरावली की कुल 26.59 हैक्टेयर भूमि 14 लाख रुपए जमा करने के बाद उपयंत्री भवन अधिकारी, मुख्य कार्यपालन अधिकारी तथा अध्यक्ष के अनुमोदन उपरांत संस्था को औद्योगिक विकास एवं भवन अनुज्ञा जारी की गई। जबकि यह भूमि साडा विकास योजना 2011 के अनुसार आवासीय वाणिज्यिक, सार्वजिनक मार्ग एवं हरित क्षेत्र के उपयोग के लिए थी। यहीं नहीं साडा की भूमि उपयोग के परिवर्तन का अधिकार नहीं होने के बावजूद अधिकरियों ने अनुमोदन दिया गया।
 
शराब फैक्ट्री मालिक रायऊ डिस्टलरी ने अपने फैक्ट्री के विस्तार और बड़े लोन एमाउण्ट के लिए साडा के मास्टर प्लान में छेड़छाड करवाई। इससे शासन को म.प्र. नगर तथा ग्राम निवेश नियम 2012 के नियम 15 के उप नियम 13 एवं 14 के अनुसार गणना करने पर लगभग 1.07 करोड़ रु. की शासन को आर्थिक क्षति हुई। एवं पुराने निर्माण का कम्पाउंडिंग शुल्क बचाने के लिए साड़ा के अधिकारियों जिसमें तत्कालीन साड़ा अध्यक्ष राकेश जादौन, तत्कालीन सीईओ तरूण भटनागर, उपयंत्री नवल सिंह राजपूत, अधीक्षण यंत्री आर एल एस. मौर्य एवं अन्य संबंधित अधिकारियों कर्मचारियों द्वारा अपने पद का दुरूपयोग किया और लाभ प्राप्त किया। 

बता दें विशेष क्षेत्र प्राधिकरण ग्वालियर (साडा) का गठन 1992 में नया ग्वालियर शहर बसाने क लिए किया गया था। आवासीय योजनाओं को लोगों की तरफ से रिस्पांस नहीं मिलने के बाद इसमें औद्योगिक प्लाट भी काट दिए गए। अभी तक साडा का उद्देश्य पूरा नहीं हो पाया है। 
 
 

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