क्या डिप्टी CM के OSD ने लिए 1 करोड़ रुपए? : कारोबारी बोला- शराब ठेका के बदले 50 लाख कैश, 50 लाख खाते में लिए; देवड़ा ने पद से हटाया
MP CG Times / Fri, Oct 9, 2026
मध्यप्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने अपने OSD दीपम रायचूरा को प्रभार से हटा दिया है। शराब ठेकों में गड़बड़ी के आरोप सामने आने के बाद देवड़ा ने 2024-25 के ठेकों की जांच कराने के निर्देश दिए हैं।
करीब 930 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी के आरोपी मोहित गोगिया के कथित बयान की कॉपी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। इसमें रायचूरा पर शराब ठेके दिलाने के बदले 1 करोड़ रुपए लेने का आरोप लगाया गया है। रायचूरा ने इन आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत बताया है।

50 लाख नकद और 50 लाख ट्रांसफर करने का आरोप
गोगिया के कथित बयान के मुताबिक, तानुजा सेठी ने उसकी मुलाकात दीपम रायचूरा से कराई थी। इसके बाद रायचूरा ने उसे दीपक दुबे से मिलवाया और कहा कि वही उनके सभी काम देखते हैं।
बयान में आरोप है कि 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर की दो शराब दुकानों के ठेके जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में मदद की गई। इसके बदले 1 करोड़ रुपए दिए गए। इसमें 50 लाख रुपए नकद और 50 लाख रुपए बैंक खाते में ट्रांसफर करने का दावा है।
गोगिया के मुताबिक, 50 लाख रुपए नकद दीपक दुबे ने होशंगाबाद रोड स्थित शालीमार फोर्ट लेजा के एक फ्लैट में लिए थे। बाकी 50 लाख रुपए आईएसबीटी के पास स्थित एक होटल के बैंक खाते में ट्रांसफर किए गए। गोगिया ने दावा किया है कि यह होटल रायचूरा के एक दोस्त का है।
फर्जी बैंक FDR से ठेका दिलाने में मदद का आरोप
कथित बयान में यह भी आरोप लगाया गया है कि शराब दुकान के ठेके की बैंक गारंटी के लिए इस्तेमाल की गई फर्जी बैंक FDR को मंजूरी दिलाने में मदद की गई थी।
गोगिया ने दावा किया कि रायचूरा ने उसकी मुलाकात गौरव शिवहरे से कराई। शिवहरे ने उसे कारोबारी अमरीक सिंह से मिलवाया। आरोप है कि टीटी नगर की दुकानों से बिना लाइसेंस शराब बेचने और सप्लाई करने में भी मदद की गई।
कथित बयान में रायचूरा से बातचीत और चैट के लिए इस्तेमाल किए गए एक मोबाइल नंबर का भी जिक्र है। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
सोल क्लब के मामले में पुलिस अधिकारी का भी जिक्र
गोगिया ने अपने कथित बयान में सोल क्लब के संचालन के दौरान पुलिस अधिकारी राजेश मिश्रा से संपर्क होने की बात भी कही है।
उसका दावा है कि जब उसे जांच एजेंसी की कार्रवाई की जानकारी मिली, तो उसने सिद्धांत ओझा से संपर्क किया। सिद्धांत ने उसे एक ऐसे व्यक्ति से मिलवाया, जिसने खुद को जांच एजेंसी का अधिकारी बताया। आरोप है कि उस व्यक्ति ने कार्रवाई रुकवाने के लिए 50 लाख रुपए मांगे।
गोगिया के मुताबिक, उसने उस व्यक्ति पर भरोसा करने को लेकर सवाल उठाया। इसके बाद सिद्धांत ने उसे राजेश मिश्रा से बात कराई। गोगिया का दावा है कि राजेश मिश्रा के आश्वासन के बाद उसने रकम दी। हालांकि, कथित बयान में यह नहीं कहा गया है कि राजेश मिश्रा ने सीधे तौर पर उससे पैसे मांगे थे।
देवड़ा बोले- रायचूरा तब मेरे OSD नहीं थे
डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा ने कहा कि दीपम रायचूरा फिलहाल उनके OSD हैं, लेकिन 2024-25 में वे भोपाल में सहायक आबकारी अधिकारी/सहायक आबकारी आयुक्त के पद पर थे। उस समय वे देवड़ा के OSD नहीं थे।
देवड़ा के मुताबिक, उन्हें शराब ठेकों में कथित गड़बड़ियों की जानकारी अखबारों के जरिए मिली। इसके बाद उन्होंने मामले की जांच कराने के निर्देश दिए।
रायचूरा बोले- आरोप झूठे और मनगढ़ंत
दीपम रायचूरा ने कहा कि उन्हें किसी भी जांच एजेंसी की ओर से कोई नोटिस नहीं मिला है। उनके मुताबिक, आरोप झूठे और मनगढ़ंत हैं।
रायचूरा ने कहा कि जब वे भोपाल में सहायक आबकारी आयुक्त थे, तब वे गोगिया को केवल शराब लाइसेंसधारक के तौर पर जानते थे। उन्होंने रिश्वत लेने के आरोपों को खारिज किया है।
करीब 930 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी का आरोपी है गोगिया
मोहित गोगिया पर करीब 200 लोगों से लगभग 930 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने का आरोप है। वह फिलहाल पंजाब की जेल में बंद है। आयकर विभाग और प्रवर्तन निदेशालय (ED) उसकी संपत्तियों पर कार्रवाई कर चुके हैं। उसकी कुछ संपत्तियां फ्रीज किए जाने की भी जानकारी सामने आई है।
गोगिया के कथित बयान में भोपाल के कुछ अन्य कारोबारियों के नाम भी हैं। उन पर वरिष्ठ अधिकारियों और नेताओं से संबंध होने के आरोप लगाए गए हैं। हालांकि, इन दावों की भी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
फिलहाल दीपम रायचूरा को किसी जांच एजेंसी की ओर से पूछताछ के लिए बुलाए जाने या नोटिस जारी होने की पुष्टि नहीं हुई है। मामले में जांच के बाद ही आरोपों की वास्तविकता स्पष्ट हो सकेगी।
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