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: इस मंदिर में मिलता है संतान प्राप्ति का आशीर्वाद: मां यशोदा भरती हैं सूनी गोद, 200 साल से भी पुराना है मंदिर का इतिहास

Mother Yashoda temple at Rajwada of Indore blessed to have a child: मां और बच्चे के बीच प्यार को दर्शाने के लिए भगवान कृष्ण और मां यशोदा से बेहतर कोई उदाहरण नहीं है. हर मां अपने बच्चे में कृष्ण को ढूंढती है, लेकिन इस दुनिया में कई महिलाएं ऐसी भी हैं जिन्हें संतान सुख नहीं मिल पाता और वह अस्पतालों के दरवाजे खटखटाती हैं. लेकिन मध्यप्रदेश के इंदौर में एक ऐसा मंदिर है, जहां नि:संतान महिलाएं पिछले कई सालों से प्रार्थना कर रहे हैं. जिससे सूनी गोद भर जाती है. राजवाड़ा पर माता यशोदा का मंदिर है, जहां स्वयं श्रीकृष्ण बाल रूप में माता की गोद में बैठे हैं. मंदिर का इतिहास 200 साल से भी ज्यादा पुराना है मंदिर की नियमित सेवा करने वाले मनीष दवे ने बताया कि इस जगह का इतिहास 200 साल पुराना है और शुरुआत से ही महिलाएं यहां पूजा करती आ रही हैं. इस मंदिर की स्थापना पंडित आनंदी लाल दीक्षित ने की थी. मंदिर में श्रीकृष्ण के साथ राधा, रुखमणी, नंदबा और ग्वाल बाल विराजमान हैं, जिनकी मूर्तियां जयपुर के कारीगरों ने बनाई हैं. अब दीक्षित परिवार द्वारा उनकी नियमित पूजा की जाती है. Janmashtami 2023: मध्यप्रदेश में भगवान श्रीकृष्ण ने यहां ली थी शिक्षा, 64 दिन में वेद-शास्त्र-पुराण और गीता का लिया ज्ञान, इसी आश्रम में हुई थी सुदामा से मित्रता गोद श्रीफल और एक विशेष जड़ी-बूटी से भरी होती है बता दें कि मंदिर में जिन भी महिलाओं की गोद भरी जाती है, उनकी गोद यशोदा माता की मूर्ति के पास रखे श्रीफल और एक विशेष जड़ी-बूटी से भरी जाती है, जो संतान प्राप्ति का आशीर्वाद देती है. इन महिलाओं को एक विशेष पुस्तिका भी दी जाती है जिसमें उन नियमों के बारे में लिखा होता है जिनका पालन उन्हें गोद भराई के बाद करना होता है. कई महिलाओं की इच्छाएं पूरी होती हैं इस मंदिर से जिन भी महिलाओं की गोदभराई हुई है, वे आज अपने बच्चों के साथ खुशहाल जीवन जी रही हैं. मनोकामना पूरी होने पर महिलाएं अपने बच्चों के साथ दर्शन के लिए आती हैं और मिठाई, फल, फूल चढ़ाकर मां यशोदा को धन्यवाद देती हैं. Read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanistan Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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