4 शादियां करने वाली निकली वकील की पत्नी : घर के माहौल से परेशान होकर भाई ने की आत्महत्या, सच छिपाने पर कोर्ट ने सुनाई सजा
MP CG Times / Wed, Jan 21, 2026
एमपी के भोपाल की जिला अदालत ने शादी का सच छिपाकर विवाह करने के मामले में एक महिला को दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। महिला पर आरोप था कि उसने अपने पूर्व वैवाहिक संबंधों को छिपाकर एक वकील से निकाह किया था। मामले में अदालत ने महिला को दोषी मानते हुए यह सख्त फैसला सुनाया।
जिला न्यायालय भोपाल में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता तबरेज उल्लाह ने बताया कि उनका निकाह 27 मई 2022 को हसीना नाम की महिला से हुआ था। महिला ने शादी से पहले केवल एक पूर्व पति सलमान के बारे में बताया था और कहा था कि उससे तलाक हो चुका है।
शादी के बाद बदला व्यवहार
शादी के एक से डेढ़ महीने बाद ही महिला का व्यवहार बदलने लगा। आए दिन घर में झगड़े होने लगे। कुछ समय बाद हसीना अपनी बेटियों के साथ वकील के घर रहने लगी। लगातार विवाद और मानसिक तनाव के कारण वकील और उनके भाई पर इसका गहरा असर पड़ा।
मानसिक तनाव में भाई ने की आत्महत्या
घर के माहौल से परेशान होकर वकील के भाई ने आत्महत्या कर ली। इस घटना के बाद तबरेज उल्लाह ने महिला के अतीत की गहराई से जांच शुरू की, जिसमें चौंकाने वाले खुलासे सामने आए।
चार शादियों का खुलासा
जांच में पता चला कि हसीना पहले ही चार शादियां कर चुकी थी। उसके निकाह शमशेर, मतलूब हसन, सलमान और साबिर से हुए थे। कोर्ट में ट्रायल के दौरान यह भी सामने आया कि महिला ने किसी भी पूर्व पति से वैधानिक तलाक के दस्तावेज पेश नहीं किए।
उज्जैन और भोपाल से पेश हुए सबूत
फरियादी वकील ने ट्रायल के दौरान कई अहम दस्तावेज अदालत में पेश किए, जिनमें—
उज्जैन न्यायालय से मतलूब हसन से जुड़े केस की प्रमाणित प्रति
भोपाल न्यायालय में साबिर के खिलाफ दर्ज मामले की कॉपी
अन्य निकाह से संबंधित रिकॉर्ड और शपथ पत्र
इन सभी को न्यायालय ने साक्ष्य के रूप में स्वीकार किया।
महिला की दलील खारिज
कोर्ट की कार्यवाही के दौरान महिला ने दावा किया कि मतलूब, सलमान और साबिर एक ही व्यक्ति के अलग-अलग नाम हैं, लेकिन वह इसके समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सकी। अदालत ने इस दलील को खारिज कर दिया।
19 जनवरी 2026 को सुनाया गया फैसला
सभी साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर 19 जनवरी 2026 को न्यायालय ने फैसला सुनाया। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी मेघा अग्रवाल की अदालत ने महिला को धारा 82(2) के तहत दोषी ठहराया, जबकि धारा 82(1) में संदेह का लाभ दिया गया।
दो साल की सजा, फिलहाल जमानत
अदालत ने महिला को दो साल का कठोर कारावास और जुर्माना लगाया। हालांकि सजा के बाद उसे अपील दायर करने के लिए अस्थायी जमानत दे दी गई है।
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