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: आरक्षण बिल विवाद: CM भूपेश ने कहा- BJP नेताओं के दबाव में राज्यपाल, एकात्म परिसर में बैठता है विधिक सलाहकार

News Desk / Mon, Dec 26, 2022


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल। - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

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छत्तीसगढ़ में आरक्षण संशोधन विधेयक पर मामला शांत होते नहीं दिखाई दे रहा है। कांग्रेस सरकार और राज्यपाल के बीच चल रहे विवाद में भाजपा नेताओं की भी एंट्री होती रही है। अब पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के बयान ने सियासी पारा फिर चढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि, राज्यपाल भाजपा नेताओं के दबाव में हैं। राजभवन का विधिक सलाहकार एकात्म परिसर में बैठता है। उन्होंने रमन सिंह पर भी निशाना साधा। 

यह भी पढ़ें...आरक्षण पर विवाद: CM भूपेश ने 30 को बुलाई कैबिनेट बैठक, राजभवन के रुख पर होगी बात, शीतकालीन सत्र भी 2 जनवरी से

रमन सिंह के बयान पर भी साधा निशाना
दरअसल, मुख्यमंत्री मंगलवार को बेमेतरा के साजा विधानसभा में भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के लिए रवाना हो रहे थे। इससे पहले उन्होंने पूर्व सीएम रमन सिंह के दिए बयान का जिक्र किया कि 'मुख्यमंत्री की इच्छा से तैयार किए गए बिल पर राज्यपाल हस्ताक्षर नहीं कर सकती'। इसे लेकर सीएम बघेल ने कहा कि, बिल विभाग तैयार करता है, कैबिनेट में प्रस्तुत होता है। फिर एडवाइजरी कमेटी के सामने जाता है, विधानसभा में चर्चा होती है। 

यह भी पढ़ें...आरक्षण पर रार: CM भूपेश ने कहा- विरोध पर भी राज्यपाल का ईगो सेटिस्फाई किया, विधानसभा से बड़ा है विधिक सलाहकार?

भाजपा के नेताओं ने राज्यपाल से हस्ताक्षर के लिए नहीं कहा
उन्होंने कहा कि, आरक्षण बिल के लिए सारी प्रक्रिया पूरी की गई। विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसमें सभी लोगों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि, विपक्ष ने भी इसमें भाग लिया, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि रमन सिंह जैसे व्यक्ति जो 15 साल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे, वह ऐसी बात कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि, भाजपा के एक भी नेता ने राज्यपाल से नहीं कहा कि बिल पर हस्ताक्षर करें। 

यह भी पढ़ें...आरक्षण विधेयक अटका: राज्यपाल ने कहा- कानूनी सलाह के बाद ही कर पाऊंगी हस्ताक्षर, अब उपचुनाव के बाद फैसला

राज्यपाल को बिल पर हस्ताक्षर ही नहीं करना
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि, ये जो विधिक सलाहकार है, कौन है। यह एकात्म परिसर में बैठते हैं। उन्होंने कहा कि, अफसरों के मना करने पर भी राज्यपाल के सवालों का जवाब दिया, लेकिन गड़बड़ी निकालेंगे। हम फिर भेजेंगे, फिर ऐसा करेंगे। कुल मिलाकर राज्यपाल को हस्ताक्षर नहीं करना है। उन्होंने कहा कि, नहीं करना है तो बिल वापस करें। उनके अधिकार क्षेत्र में है कि बिल उचित नहीं लगता है तो सरकार को वापस करें। 

यह भी पढ़ें...Chhattisgarh : विधानसभा में आरक्षण संशोधन विधेयक पारित, SC, ST, OBC का बढ़ा, पर EWS का छह फीसदी हुआ कम

राज्यपाल बहाना ढूंढ रहीं
सीएम ने कहा कि, राज्यपाल बिल को राष्ट्रपति को भेजें या फिर अनिश्चितकाल के लिए अपने पास रखें। वह अपने पास अनिश्चितकाल तक के लिए रखना चाहती हैं, लेकिन बहाना ढूंढ रही हैं। यह उचित नहीं है। बघेल ने कहा कि, जो विधानसभा छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पंचायत है, जहां सर्वसम्मति से विधेयक पारित किया गया है। ये विधिक सलाहकार जो एकात्म परिसर में बैठता है, वह विधानसभा से क्या बड़ा हो गया है।

विस्तार

छत्तीसगढ़ में आरक्षण संशोधन विधेयक पर मामला शांत होते नहीं दिखाई दे रहा है। कांग्रेस सरकार और राज्यपाल के बीच चल रहे विवाद में भाजपा नेताओं की भी एंट्री होती रही है। अब पूर्व सीएम डॉ. रमन सिंह के बयान ने सियासी पारा फिर चढ़ा दिया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा है कि, राज्यपाल भाजपा नेताओं के दबाव में हैं। राजभवन का विधिक सलाहकार एकात्म परिसर में बैठता है। उन्होंने रमन सिंह पर भी निशाना साधा। 

यह भी पढ़ें...आरक्षण पर विवाद: CM भूपेश ने 30 को बुलाई कैबिनेट बैठक, राजभवन के रुख पर होगी बात, शीतकालीन सत्र भी 2 जनवरी से

रमन सिंह के बयान पर भी साधा निशाना
दरअसल, मुख्यमंत्री मंगलवार को बेमेतरा के साजा विधानसभा में भेंट-मुलाकात कार्यक्रम के लिए रवाना हो रहे थे। इससे पहले उन्होंने पूर्व सीएम रमन सिंह के दिए बयान का जिक्र किया कि 'मुख्यमंत्री की इच्छा से तैयार किए गए बिल पर राज्यपाल हस्ताक्षर नहीं कर सकती'। इसे लेकर सीएम बघेल ने कहा कि, बिल विभाग तैयार करता है, कैबिनेट में प्रस्तुत होता है। फिर एडवाइजरी कमेटी के सामने जाता है, विधानसभा में चर्चा होती है। 

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भाजपा के नेताओं ने राज्यपाल से हस्ताक्षर के लिए नहीं कहा
उन्होंने कहा कि, आरक्षण बिल के लिए सारी प्रक्रिया पूरी की गई। विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित किया गया। इसमें सभी लोगों ने भाग लिया। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि, विपक्ष ने भी इसमें भाग लिया, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि रमन सिंह जैसे व्यक्ति जो 15 साल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रहे, वह ऐसी बात कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि, भाजपा के एक भी नेता ने राज्यपाल से नहीं कहा कि बिल पर हस्ताक्षर करें। 

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राज्यपाल को बिल पर हस्ताक्षर ही नहीं करना
मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि, ये जो विधिक सलाहकार है, कौन है। यह एकात्म परिसर में बैठते हैं। उन्होंने कहा कि, अफसरों के मना करने पर भी राज्यपाल के सवालों का जवाब दिया, लेकिन गड़बड़ी निकालेंगे। हम फिर भेजेंगे, फिर ऐसा करेंगे। कुल मिलाकर राज्यपाल को हस्ताक्षर नहीं करना है। उन्होंने कहा कि, नहीं करना है तो बिल वापस करें। उनके अधिकार क्षेत्र में है कि बिल उचित नहीं लगता है तो सरकार को वापस करें। 

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राज्यपाल बहाना ढूंढ रहीं
सीएम ने कहा कि, राज्यपाल बिल को राष्ट्रपति को भेजें या फिर अनिश्चितकाल के लिए अपने पास रखें। वह अपने पास अनिश्चितकाल तक के लिए रखना चाहती हैं, लेकिन बहाना ढूंढ रही हैं। यह उचित नहीं है। बघेल ने कहा कि, जो विधानसभा छत्तीसगढ़ की सबसे बड़ी पंचायत है, जहां सर्वसम्मति से विधेयक पारित किया गया है। ये विधिक सलाहकार जो एकात्म परिसर में बैठता है, वह विधानसभा से क्या बड़ा हो गया है।


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