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: गरियाबंद में जमीन बिक्री की सीक्रेट कहानी ? कैसे 184 टुकड़ों में बंटी जमीन, कैसे रजिस्ट्री हुई शून्य, जानिए 300 हेक्टेयर पर कैसे बरसा पैसा ?

गिरीश जगत, गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद के 38 गांवों के कोटवारों द्वारा 184 टुकड़ों में बेची गई 94.45 हेक्टेयर सेवा भूमि की रजिस्ट्री शून्य हो गई है। एसडीएम के आदेश के बाद तहसीलदार ने बेची गई जमीन को सेवा भूमि में शामिल कर लिया है। जिले भर में 300 हेक्टेयर से अधिक जमीन वापस की गई है।

Chhattisgarh Gariaband 300 Hectares Of Land Registered: अभी दो दिन पहले ही देवभोग तहसीलदार चितेश देवांगन ने एसडीएम कोर्ट से मिले निर्देश पर देवभोग तहसील में बेची गई 94.45 हेक्टेयर सेवा भूमि से क्रेताओं के नाम हटाकर राजस्व अभिलेखों में वापस सेवा भूमि के रूप में दर्ज करने की कार्रवाई की है। साथ ही सेवा भूमि के बी-वन में इसे अहस्तांतरणीय के रूप में दर्ज किया है, ताकि भविष्य में इसे बेचा न जा सके। Chhattisgarh Gariaband 300 Hectares Of Land Registered: तहसीलदार देवांगन ने बताया कि एसडीएम कोर्ट से मिले निर्देश के बाद 38 गांवों के कोटवारों द्वारा 184 टुकड़ों में बेची गई जमीन से क्रेताओं के नाम हटा दिए गए हैं। Chhattisgarh Gariaband 300 Hectares Of Land Registered: मामले में एसडीएम तुलसी दास मरकाम ने बताया कि शासन द्वारा जारी निर्देश के आधार पर 7 माह पूर्व प्रकरण पंजीबद्ध कर सुनवाई की गई। क्रेताओं के नाम हटाने के साथ ही रजिस्ट्री शून्य घोषित कर दी गई है। शासन के निर्देश पर वाद भी दायर किया जाएगा। 300 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर कार्रवाई Chhattisgarh Gariaband 300 Hectares Of Land Registered: 2022 में हाईकोर्ट के निर्णय के बाद राज्य शासन ने कोटवारों को दी गई सेवा भूमि की बिक्री पर संज्ञान लेना शुरू कर दिया था। बेची गई भूमि को वापस करने की यह कार्रवाई पूरे प्रदेश में चल रही है। Chhattisgarh Gariaband 300 Hectares Of Land Registered: गरियाबंद जिले की 6 तहसीलों में बेची गई 300 हेक्टेयर से अधिक भूमि को सेवा भूमि के खाते में वापस किया गया है। जिला भू अभिलेख अधिकारी अर्पिता पाठक ने इसकी पुष्टि की है। बेदखली के लिए नोटिस, पर्याप्त समय दिया जाएगा Chhattisgarh Gariaband 300 Hectares Of Land Registered: देवभोग तहसील में सबसे अधिक बिक्री देवभोग, झाराबहाल, डोहेल कोटवार द्वारा की गई है। यह भूमि हाईवे से लगी हुई है, साथ ही देवभोग शहर के प्रमुख स्थान पर थी। इसलिए यहां बड़े-बड़े व्यवसायिक भवन बन गए हैं। सरकारी बीएसएनएल कार्यालय से लेकर कई निजी स्कूल संचालित हो रहे हैं। इस कार्रवाई के बाद निजी खरीदारों में हड़कंप है। तहसीलदार चितेश देवांगन ने भी कहा है कि कोटवारी भूमि पर निजी निर्माण पर बेदखली की कार्रवाई की जानी है। इसके लिए उच्च अधिकारियों से मार्गदर्शन लेकर खरीदारों को बेदखली नोटिस दिया जाएगा। उन्हें जमीन खाली करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाएगा। Chhattisgarh Gariaband 300 Hectares Of Land Registered: सरकार के निर्देश पर सेवा भूमि बेचने वाले कोटवारों पर भी कार्रवाई की जाएगी। खरीदार सुप्रीम कोर्ट जाने की योजना बना रहे हैं। वर्ष 1950 में सरकार ने कोटवारों को आजीविका के लिए सरकारी जमीन उपलब्ध कराई थी। जिसे सेवा भूमि का नाम दिया गया। Chhattisgarh Gariaband 300 Hectares Of Land Registered: वर्ष 2001 में इस जमीन पर काबिज कोटवारों को भूमि स्वामित्व अधिकार दिया गया। भू-राजस्व संहिता 158 के तहत सक्षम अधिकारी की अनुमति से इस जमीन को बेचने का अधिकार भी दिया गया। Chhattisgarh Gariaband 300 Hectares Of Land Registered: इसी आदेश के आधार पर जरूरतमंद कोटवारों ने जमीन बेच दी थी। लेकिन कुछ कोटवारों ने 1998 से पहले ही जमीन बेचना शुरू कर दिया था। जिस तहसील में जमीन दर्ज थी, उसी तहसील से बिक्री का रिकॉर्ड जारी होता था। Chhattisgarh Gariaband 300 Hectares Of Land Registered: नामांतरण भी आसानी से हो जाता था। प्रशासन की इस गलती को आधार बनाकर खरीदारों ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती देने का फैसला किया है। Chhattisgarh Gariaband 300 Hectares Of Land Registered: साथ ही विक्रेता के दोषी पाए जाने पर कोटवार को भी बराबर का भागीदार बनाने का केस दायर करेंगे, ताकि मौजूदा कीमत पर नुकसान का आंकलन कर विक्रेताओं से क्षतिपूर्ति भी वसूली जा सके। Read more- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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