Logo
Breaking News Exclusive
गरियाबंद कलेक्टर ने कराया था सील, फिर खुला; संचालक बोला- अनुमति क्यों दिखाऊं ? 41वें चक्रधर समारोह में श्रीकृष्ण-राधा के होली-रास ने बांधा समां; 4 साल की उम्र से सीख रहीं कथक पास्टर के घर जुटी केरल समेत कई राज्यों की भीड़; पुलिस ने 55 लोगों की लिस्ट बनाई बारिश से बचने पेड़ के नीचे छिपे थे 2 चरवाहे, गाज गिरने से दोनों की मौत गरियाबंद में 36 परिवारों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, बोले-जल-जंगल-जमीन नहीं छोड़ेंगे मां नर्मदा की महाआरती; साल, रुद्राक्ष और अर्जुन समेत 376 पौधे रोपे गए Abhishek Sharma का तूफानी शतक, Rohit Sharma का रिकॉर्ड तोड़ा; भारत ने Powerplay में बनाए 100 रन अबू धाबी में फिर सजेगा बॉलीवुड का मेला; जानिए Date, Venue, Tickets और कौन-कौन स्टार्स आएंगे 2 लाख रुपए में 4 क्विंटल की मूर्ति बनी, 1300 किमी पिकअप चलाकर पहुंचे मुंबई कुकी-नगा तनाव के बीच ₹450KG बिकी चीनी, 7 दिन से स्कूल-बाजार बंद; 6 की हत्या के बाद गांवों में आगजनी और अंधाधुंध फायरि गरियाबंद कलेक्टर ने कराया था सील, फिर खुला; संचालक बोला- अनुमति क्यों दिखाऊं ? 41वें चक्रधर समारोह में श्रीकृष्ण-राधा के होली-रास ने बांधा समां; 4 साल की उम्र से सीख रहीं कथक पास्टर के घर जुटी केरल समेत कई राज्यों की भीड़; पुलिस ने 55 लोगों की लिस्ट बनाई बारिश से बचने पेड़ के नीचे छिपे थे 2 चरवाहे, गाज गिरने से दोनों की मौत गरियाबंद में 36 परिवारों ने कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन, बोले-जल-जंगल-जमीन नहीं छोड़ेंगे मां नर्मदा की महाआरती; साल, रुद्राक्ष और अर्जुन समेत 376 पौधे रोपे गए Abhishek Sharma का तूफानी शतक, Rohit Sharma का रिकॉर्ड तोड़ा; भारत ने Powerplay में बनाए 100 रन अबू धाबी में फिर सजेगा बॉलीवुड का मेला; जानिए Date, Venue, Tickets और कौन-कौन स्टार्स आएंगे 2 लाख रुपए में 4 क्विंटल की मूर्ति बनी, 1300 किमी पिकअप चलाकर पहुंचे मुंबई कुकी-नगा तनाव के बीच ₹450KG बिकी चीनी, 7 दिन से स्कूल-बाजार बंद; 6 की हत्या के बाद गांवों में आगजनी और अंधाधुंध फायरि

8 साल की आशिका ने बिखेरा कथक का रंग : 41वें चक्रधर समारोह में श्रीकृष्ण-राधा के होली-रास ने बांधा समां; 4 साल की उम्र से सीख रहीं कथक

MP CG Times / Wed, Sep 23, 2026

गिरीश जगत, रायपुर। 41वें चक्रधर समारोह में इस बार एक नन्हीं कलाकार की कथक प्रस्तुति ने दर्शकों का खास ध्यान खींचा। महज 8 वर्ष की बाल नृत्यांगना आशिका सिंघल ने अपनी शानदार कथक प्रस्तुति से मंच पर ऐसा समां बांधा कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो गए। भाव-भंगिमाओं, लय, ताल और नृत्य की बारीकियों के सुंदर समन्वय ने उनकी प्रस्तुति को समारोह के प्रमुख आकर्षणों में शामिल कर दिया।

स्तुति से शुरू हुई कथक की प्रस्तुति

आशिका सिंघल ने अपनी प्रस्तुति की शुरुआत ‘जय-जय जगतजननी देवी...’ स्तुति से की। मंच पर आते ही उन्होंने अपनी प्रस्तुति में कथक की पारंपरिक शैली और भावों का सुंदर प्रदर्शन किया। इसके बाद उन्होंने कथक के अलग-अलग पक्षों को अपनी नृत्य प्रस्तुति के माध्यम से सामने रखा।

आशिका ने तोड़ा, 50 चक्कर, टुकड़ा, आमद और तत्कार की प्रस्तुति दी। नृत्य के दौरान उनके कदमों की गति, ताल के साथ पैरों का सटीक तालमेल और भाव-भंगिमाओं ने दर्शकों को बांधे रखा। कम उम्र में कथक की इन बारीकियों को मंच पर आत्मविश्वास के साथ प्रस्तुत करना उनकी मेहनत और प्रशिक्षण को दर्शाता है।

श्रीकृष्ण-राधा के होली-रास ने बांधा समां

कथक की पारंपरिक प्रस्तुतियों के बाद आशिका ने श्रीकृष्ण और राधा-रानी के होली-रास पर आधारित नृत्य-नाटिका प्रस्तुत की। इस प्रस्तुति में उन्होंने नृत्य के साथ भावों और अभिनय का भी सुंदर इस्तेमाल किया।

श्रीकृष्ण और राधा-रानी के होली-रास के प्रसंग को उन्होंने अपनी भाव-भंगिमाओं के जरिए मंच पर जीवंत करने का प्रयास किया। लय और ताल के साथ भावों का संतुलन उनकी प्रस्तुति की खासियत रहा। प्रस्तुति पूरी होने के बाद दर्शकों ने तालियां बजाकर उनकी कला की सराहना की।

4 साल की उम्र से सीख रहीं कथक

आशिका सिंघल रायपुर के राजकुमार कॉलेज में कक्षा तीसरी की छात्रा हैं। उन्होंने महज 4 वर्ष की उम्र से कथक का प्रशिक्षण लेना शुरू किया था। वर्तमान में वह अपनी गुरु सुश्री नेहा सिंह के मार्गदर्शन में कथक की साधना कर रही हैं।

कम उम्र में ही आशिका ने कथक के प्रति रुचि विकसित की और लगातार अभ्यास के जरिए इस शास्त्रीय नृत्य की बारीकियां सीख रही हैं। उनकी प्रस्तुति में नृत्य की तकनीक के साथ भाव और ताल का संतुलन भी देखने को मिला।

पहले भी बड़े मंचों पर दे चुकी हैं प्रस्तुति

आशिका सिंघल के लिए 41वां चक्रधर समारोह पहला बड़ा मंच नहीं है। वह इससे पहले भी कई प्रतिष्ठित आयोजनों में अपनी कथक प्रस्तुति दे चुकी हैं। इनमें पावस प्रसंग, राज्योत्सव और 40वां चक्रधर समारोह शामिल हैं।

इन मंचों पर प्रस्तुति देने के अनुभव का असर इस बार भी उनके प्रदर्शन में दिखाई दिया। 41वें चक्रधर समारोह में उनकी प्रस्तुति ने न सिर्फ दर्शकों का मनोरंजन किया, बल्कि कम उम्र में भारतीय शास्त्रीय नृत्य के प्रति उनकी लगन और समर्पण को भी सामने रखा।

आशिका की प्रस्तुति ने यह भी दिखाया कि कला और शास्त्रीय नृत्य की साधना के लिए उम्र बाधा नहीं है। निरंतर अभ्यास, गुरु का मार्गदर्शन और मंच पर प्रस्तुति का अनुभव किसी भी कलाकार को अपनी प्रतिभा निखारने में मदद करता है। 41वें चक्रधर समारोह में आशिका की प्रस्तुति इसी लगन और साधना की एक झलक रही।

विज्ञापन

विज्ञापन

जरूरी खबरें

विज्ञापन