'गैंग्स ऑफ वासेपुर' के खूनी खेल का सेफ हाउस बना CG : 13 साल से छिपकर रह रहा था डबल मर्डर का आरोपी गैंगस्टर शब्बीर; 40 एम्बुलेंस और बसों का खड़ा किया साम्राज्य
MP CG Times / Mon, Jul 6, 2026
मशहूर फिल्म 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' की रीयल लाइफ खूनी स्क्रिप्ट छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिला मुख्यालय (अंबिकापुर) में पिछले 13 सालों से चुपचाप लिखी जा रही थी। धनबाद (झारखंड) में दोहरे हत्याकांड को अंजाम देकर उम्रकैद की सजा काट रहा और कोर्ट की पेशी से फरार कुख्यात गैंगस्टर शब्बीर आलम (60 वर्ष) अपनी पहचान बदलकर अंबिकापुर में ऐश की जिंदगी काट रहा था।
हैरान करने वाली बात यह है कि इस भगोड़े अपराधी ने स्थानीय बस संचालक के साथ मिलकर शहर में करोड़ों रुपए का अवैध साम्राज्य खड़ा कर लिया था। 3 दिन पहले झारखंड पुलिस की रेड के दौरान गैंगस्टर और उसका साथी जावेद फिर चकमा देकर भाग निकले, जिसके बाद सरगुजा पुलिस ने स्थानीय मददगार पर शिकंजा कसा है।

फहीम खान की मां-मौसी की हत्या का है आरोपी
यह पूरा मामला धनबाद के कोयला माफिया और गैंगस्टरों के बीच चले आ रहे पुराने खूनी सिंडिकेट से जुड़ा है। 18 अक्टूबर 2001 को वासेपुर के डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून को गैंगस्टर शब्बीर आलम और उसके भाई शाहिद आलम ने 5 साथियों के साथ मिलकर सरेराह गोलियों से भून दिया था।
इस सनसनीखेज दोहरे हत्याकांड में शब्बीर को आजीवन कारावास की सजा हुई थी। साल 2013 में हाईकोर्ट में पेशी के दौरान शब्बीर पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया और सीधे छत्तीसगढ़ आ गया।
रंगदारी के पैसे से शुरू किया राजहंस बस सर्विस
अंबिकापुर पहुंचने के बाद शब्बीर आलम और उसका सबसे खास गुर्गा जावेद आलम उर्फ बाबू यहां के रसूखदार बस संचालक बैदुल खान (57 वर्ष) के संपर्क में आए। आरोप है कि बैदुल खान यह अच्छी तरह जानता था कि शब्बीर एक सजायाफ्ता और भगोड़ा क्रिमिनल है, इसके बावजूद उसने उसे शरण दी।
गैंगस्टर शब्बीर के तार धनबाद के क्रिमिनल सिंडिकेट से लगातार जुड़े हुए थे। वहां से रंगदारी और कोयलांचल की अवैध वसूली का मोटा पैसा लगातार अंबिकापुर पहुंचता था। इसी पैसे के दम पर शब्बीर और बैदुल खान ने 'राजहंस बस सर्विस' के तहत बसों की खरीदी की और इन्हें बिहार के सासाराम और पटना रूट पर चलाने लगे।
40 एम्बुलेंस और रियल एस्टेट, वनांचल में बिछाया जाल
शब्बीर आलम का आर्थिक साम्राज्य सिर्फ बसों तक सीमित नहीं था। जांच में सामने आया है कि इस सिंडिकेट ने एसईसीएल (SECL) सहित अन्य बड़े औद्योगिक इलाकों में लगभग 40 एंबुलेंस लगा रखी थीं, जिससे मोटी कमाई हो रही थी।
इसके अलावा, गैंगस्टर शब्बीर और उसके सहयोगी जावेद ने शहर के खरसिया नाका के पास करोड़ों की जमीनें खरीदकर अवैध प्लॉटिंग (रियल एस्टेट) का धंधा भी शुरू कर दिया था। अंबिकापुर के पॉश इलाके में उसने एक आलीशान मकान भी खड़ा कर लिया था, जहां वह परिवार के साथ रहता था।
"पुलिस की बड़ी नाकामी, सुरक्षा पर गंभीर सवाल"
इस पूरे मामले पर भाजपा पार्षद आलोक दुबे ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा, "झारखंड का इतना बड़ा और कुख्यात हत्यारा 13 साल तक हमारे शहर में बेखौफ घूमता रहा, करोड़ों का साम्राज्य बना लिया और लोकल पुलिस को भनक तक नहीं लगी। यह पुलिस के इंटेलिजेंस और सूचना तंत्र की एक बहुत बड़ी नाकामी है। शहर की सुरक्षा राम भरोसे है। उसे छिपाने वाले सफेदपोशों पर सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए।"
पार्टनर बैदुल खान के खिलाफ FIR, आर्थिक नेटवर्क की जांच शुरू
सरगुजा एसएसपी (SSP) राजेश अग्रवाल ने बताया कि झारखंड पुलिस की दबिश के बाद आरोपी तो भागने में कामयाब रहे, लेकिन स्थानीय मददगारों को बख्शा नहीं जाएगा। सोमवार को कोतवाली पुलिस ने गैंगस्टर के पार्टनर बस संचालक बैदुल खान के खिलाफ गंभीर धाराओं के तहत नामजद एफआईआर (FIR) दर्ज कर ली है।
सरगुजा पुलिस अब इस पूरे सिंडिकेट के बैंक खातों, बेनामी संपत्तियों और अन्य स्थानीय मददगारों की कुंडली खंगाल रही है। पुलिस का कहना है कि बहुत जल्द ही इस पूरे नेटवर्क को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया जाएगा।
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