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Aravalli Hills पर क्यों मचा है बवाल ? : अरावली में Mining पूरी तरह बैन क्यों नहीं, नुकसान से क्या खमियाजा होगा, 6 सवालों का जवाब जो आपके लिए जरूरी

भारत की सबसे पुरानी पर्वतमाला Aravalli Hills एक बार फिर national debate का मुद्दा बन गई है। हाल ही में Supreme Court of India verdict के बाद अरावली पहाड़ियों की एक नई legal definition तय की गई, जिसे लेकर environmentalists, climate experts और स्थानीय लोग नाराज हैं। सवाल यह है कि इस फैसले से ecology, groundwater और climate balance पर क्या असर पड़ेगा।

क्या है अरावली पहाड़ियों की नई परिभाषा? | New Legal Definition of Aravalli

नवंबर–दिसंबर 2025 के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक central committee report के आधार पर अरावली की नई कानूनी परिभाषा को मंजूरी दी। इसके अनुसार अब सिर्फ वही पहाड़ियां Aravalli Mountain Range का हिस्सा मानी जाएंगी, जिनकी ऊंचाई जमीन से minimum 100 meters अधिक है।

कोर्ट के मुताबिक, अरावली 5 राज्यों में फैली है और हर राज्य के अलग-अलग नियम थे। इस regulatory confusion को खत्म करने के लिए यह परिभाषा तय की गई।

पर्यावरणविद् सवाल क्यों उठा रहे हैं? | Why Environmentalists Are Angry

Forest Survey of India (FSI report) की एक इंटरनल स्टडी के अनुसार, अरावली क्षेत्र में मैप की गई 12,081 पहाड़ियों में से सिर्फ 1,048 ही 100-meter benchmark पर खरी उतरती हैं। यानी महज 8.7% hills को ही कानूनी सुरक्षा मिलेगी।

इसका सीधा मतलब है कि अरावली का करीब 90% area may lose legal protection, जिससे mining activities, real estate projects और deforestation का खतरा बढ़ जाएगा। इससे यह प्राचीन पर्वतमाला अपनी geographical continuity खो सकती है।

अरावली में Mining पूरी तरह बैन क्यों नहीं? | Mining Ban Explained

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि complete mining ban का अनुभव पहले अच्छा नहीं रहा। पूर्ण प्रतिबंध से illegal mining, sand mafia और अवैध गतिविधियां बढ़ीं।

इसलिए कोर्ट ने regulated mining policy अपनाई है। फिलहाल नई माइनिंग को मंजूरी नहीं दी गई है, लेकिन strict rules and monitoring के साथ सीमित खनन जारी रखने की अनुमति है।

अरावली पर्वतमाला का महत्व क्या है? | Importance of Aravalli Hills

करीब 200 million years old Aravalli range थार रेगिस्तान को Rajasthan, Haryana, Delhi NCR और Western UP की ओर बढ़ने से रोकती है। यह क्षेत्र groundwater recharge, biodiversity conservation और climate regulation में अहम भूमिका निभाता है।

दिल्ली से गुजरात तक करीब 650 km stretch में फैली अरावली से Chambal, Sabarmati और Luni rivers को पानी मिलता है। यहां lead, zinc, copper, gold, साथ ही limestone, marble, granite जैसे खनिज पाए जाते हैं।

अरावली को नुकसान से क्या खमियाजा होगा? | Environmental Impact

अगर अरावली की पहाड़ियां नष्ट होती हैं, तो dust pollution, water scarcity, extreme heat waves और climate stress बढ़ेगा। अरावली का forest cover चार राज्यों गुजरात, राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली—में सूखे को रोकने में मदद करता है।

इनके खत्म होने से rainfall pattern change, heat island effect और human-animal conflict बढ़ेगा। साथ ही wildlife habitat loss भी एक बड़ा खतरा है।

अब तक Mining के खिलाफ क्या कार्रवाई हुई? | Timeline of Legal Action

  • 1990s: पर्यावरण मंत्रालय ने mining regulations सख्त किए

  • 2009: सुप्रीम कोर्ट ने Faridabad, Gurugram और Mewat में खनन पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया

  • 2024: नई माइनिंग लीज और रिन्यूअल पर रोक

  • CEC Recommendations: scientific mapping, micro-level Environmental Impact Assessment (EIA) और eco-sensitive zones में माइनिंग रोकने की सलाह

  • November 2025: कोर्ट ने CEC की सिफारिशें स्वीकार कीं।

  • June 2025: केंद्र सरकार ने Aravalli Green Wall Project लॉन्च किया, जिसके तहत 29 जिलों में 5 km buffer zone में ग्रीन कवर बढ़ाया जाएगा

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