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: kartik purnima 2024: आखिर क्यों मनाया जाता है कार्तिक पूर्णिमा, जानिए इसके पीछे के 3 पौराणिक रहस्य

kartik purnima 2024: देश भर में कार्तिक पूर्णिमा को बड़ी धूम दाम से मनाया जाता है। कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का संहार किया था। इस लिए इस दिन को देव दिवाली के रूप में मनाया जाता है। जानकारी के मुताबिक, इस साल कार्तिक पूर्णिमा 15 नवंबर 2024 को मनाया जा रहा है। कार्तिक पूर्णिमा को "गंगा स्नान पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन लोगों स्नान, दान और दीप दान करने का बड़ा ही विशेष महत्व है। 15 नवंबर को कार्तिक पूर्णिमा सुबह 6 बजकर 19 मिनट से शूरू होकर रात के 2 बजकर 58 तक रहेगा। बताया जा रहा है कि इस साल कार्तिक पूर्णिमा में 30 साल के बाद राजयोग बन रहा है, जो बहुत ही शुभ माना जाता है। कार्तिक पूर्णिमा मनाने के पीछे क्या खास दिन जरूर जाने- भगवान शिव ने किया था राक्षस का वध कार्तिक पूर्णिमा को "त्रिपुरी पूर्णिमा" भी कहा जाता है। इस दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस संहार किया था। त्रिपुरासुर राक्षस ने तीनों लोको में हाहाकार मचा रखा था। वही भगवान शिव ने इस राक्षस से मुक्ति दिलाने के लिए उसका वध किया। त्रिपुरासुर के मरने के बाद देवताओं नो भगवान शिव का धन्यवाद किया। उसी दिन देवताओं ने शिवलोक यानि काशी में आकर दीपावली मनाई। तभी से ये परंपरा काशी में चली आ रही हैं। माना जाता है कि कार्तिक मास के इस दिन काशी में दीप दान करने से पूर्वजों को मुक्ति मिलती है। कार्तिक मास के दिन भगवान विष्णु ने मतस्य अवतार लिया था। कहा जाता है कि भगवान विष्णु ने प्रलय काल में वेदों की रक्षा के लिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन मत्स्य रूप धारण किया था। माना जाता है कि, कार्तिक मास में नारायण मत्स्य रूप में जल में विराजमान रहते हैं और इस दिन मत्स्य अवतार को त्यागकर वापस बैकुंठ धाम चले जाते हैं। गुरूनानक देव का जन्म कार्तिक मास का सिख धर्म में भी विशेष महत्व है। इस दिन गुरु नानक देव जी का जन्म हुआ था। सिख धर्म में इसे "गुरु पर्व" के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर गुरुद्वारों में विशेष पूजा पाठ और लंगर का आयोजन किया जाता है। Read More- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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