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: Torture Case Sanjiv Bhatt: गुजरात दंगों में मोदी की भूमिका होने का लगा चुके हैं आरोप, कोर्ट ने पूर्व IPS को किया बरी

Gujarat IPS Officer Sanjiv Bhatt Custodial Torture Case | Porbandar Court: गुजरात के पोरबंदर की एक अदालत ने 1997 के हिरासत में यातना मामले में पूर्व आईपीएस अधिकारी संजीव भट्ट को बरी कर दिया है। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता यह साबित नहीं कर सका कि संजीव भट्ट ने शिकायतकर्ता को अपराध कबूल करने के लिए मजबूर किया था।

Gujarat IPS Officer Sanjiv Bhatt Custodial Torture Case | Porbandar Court:  अदालत ने यह भी कहा कि भट्ट उस समय पुलिस अधिकारी थे और उन पर मुकदमा चलाने के लिए आवश्यक मंजूरी नहीं ली गई थी। Gujarat IPS Officer Sanjiv Bhatt Custodial Torture Case | Porbandar Court: हालांकि संजीव फिलहाल कोर्ट से बाहर नहीं आ पाएंगे, क्योंकि वे 1990 के एक अन्य मामले में जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे हैं। क्या है पूरा मामला... Gujarat IPS Officer Sanjiv Bhatt Custodial Torture Case | Porbandar Court: 1994 के हथियार बरामदगी मामले में 22 आरोपियों में से एक नारन जादव ने 6 जुलाई 1997 को मजिस्ट्रेट कोर्ट में भट्ट के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। Gujarat IPS Officer Sanjiv Bhatt Custodial Torture Case | Porbandar Court: उन्होंने कहा था कि संजीव भट्ट और कांस्टेबल वजुभाई चौ ने आतंकवादी और विध्वंसकारी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (टाडा) और शस्त्र अधिनियम मामले में कबूलनामा कराने के लिए पुलिस हिरासत में उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया। Gujarat IPS Officer Sanjiv Bhatt Custodial Torture Case | Porbandar Court:  उन्होंने भट्ट पर आरोप लगाया कि पोरबंदर पुलिस की एक टीम 5 जुलाई 1997 को ट्रांसफर वारंट पर जादव को अहमदाबाद की साबरमती सेंट्रल जेल से पोरबंदर स्थित भट्ट के घर ले गई। Gujarat IPS Officer Sanjiv Bhatt Custodial Torture Case | Porbandar Court: जादव को उनके निजी अंगों और शरीर के अन्य हिस्सों पर बिजली के झटके दिए गए। उनके बेटे को भी बिजली के झटके दिए गए। Gujarat IPS Officer Sanjiv Bhatt Custodial Torture Case | Porbandar Court: जादव ने कोर्ट को इस प्रताड़ना के बारे में बताया, जिसके बाद जांच के आदेश दिए गए। कोर्ट ने 31 दिसंबर 1998 को मामला दर्ज कर भट्ट और चौ को समन जारी किया। Gujarat IPS Officer Sanjiv Bhatt Custodial Torture Case | Porbandar Court: 15 अप्रैल 2013 को कोर्ट ने भट्ट और चौ के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। चौ की मौत के बाद मामले को दबा दिया गया। मोदी की रिकॉर्डिंग की और कोर्ट में हलफनामा भी दिया Gujarat IPS Officer Sanjiv Bhatt Custodial Torture Case | Porbandar Court: भट्ट तब चर्चा में आए जब उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी पर 2002 के गुजरात दंगों में भूमिका का आरोप लगाया। बाद में एसआईटी ने इन आरोपों को खारिज कर दिया। Gujarat IPS Officer Sanjiv Bhatt Custodial Torture Case | Porbandar Court: संजीव भट्ट दिसंबर 1999 से सितंबर 2002 तक गांधीनगर में स्टेट इंटेलिजेंस ब्यूरो के डिप्टी कमिश्नर थे। जब गोधरा कांड हुआ, तब वे तत्कालीन सीएम नरेंद्र मोदी की सुरक्षा की जिम्मेदारी भी संभाल रहे थे। गोधरा कांड के बाद पूरे गुजरात में बड़े पैमाने पर दंगे भड़क उठे। सितंबर 2002 में मोदी के भाषण की रिकॉर्डिंग राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग को देने के आरोप में भट्ट का तबादला कर दिया गया। भट्ट पहले से ही जेल की सज़ा काट रहे हैं भट्ट को इससे पहले जामनगर में 1990 में हिरासत में हुई मौत के मामले में आजीवन कारावास की सज़ा सुनाई गई थी और 1996 में पालनपुर में राजस्थान के एक वकील को फंसाने के लिए ड्रग्स रखने के मामले में मार्च 2024 में 20 साल की सज़ा सुनाई गई थी। भट्ट फिलहाल राजकोट सेंट्रल जेल में बंद हैं। Gujarat IPS Officer Sanjiv Bhatt Custodial Torture Case | Porbandar Court: भट्ट पर कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ और गुजरात के पूर्व पुलिस महानिदेशक आर बी श्रीकुमार के साथ मिलकर 2002 के गुजरात दंगों से जुड़े सबूतों को कथित तौर पर गढ़ने का भी आरोप है। Gujarat IPS Officer Sanjiv Bhatt Custodial Torture Case | Porbandar Court: भट्ट को गुजरात सरकार ने अनुपस्थिति के कारण पुलिस सेवा से हटा दिया था। इसके बाद उन्होंने गुजरात उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती दी और सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया, जहां उनकी अपील खारिज कर दी गई। Read More- Landmines, Tanks, Ruins: The Afghanista Taliban Left Behind in 2001 29 IAS-IPS

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